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'चार साल अपने परिवार को बचाने में ही लगे रहे सीएम वीरभद्र'
ब्यूरो/अमर उजाला, भराड़ी (बिलासपुर)
Updated Mon, 05 Sep 2016 01:01 PM IST
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सांसद एवं बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह चार साल अपने परिवार को बचाने में ही लगे रहे। इसका परिणाम है कि प्रदेश में नशा, वन, तबादला और खनन माफिया का बोलबाला हो गया। युवा पीढ़ी नशे की दलदल में फंस रही है, लेकिन सरकार खामोश बैठी है।
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सरकार अभी घोषणापत्र में किए वायदों को पूरा नहीं कर पाई है। वर्ष 2003 में वीरभद्र सिंह ने कहा था कि हर घर से एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी। 2012 में युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही, लेकिन यह आज तक नहीं मिला। सीएम की अपनी कमाई करोड़ों में पहुंच गई है।
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केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने में प्रदेश सरकार नाकाम रही है। वन रैंक, वन पेंशन का मुद्दा प्रेम कुमार धूमल ने उठाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में इसे पूरा किया। सड़क, स्वास्थ्य और पानी के लिए जनता परेशान है और सरकार कुंभकर्णी नींद सोई है।
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वह केंद्र के सहयोग से प्रदेश के लिए एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट लाए हैं, लेकिन प्रदेश सरकार इन कार्यों को शुरू करवाने में आनाकानी कर रही है। इस दौरान राकेश गौतम, नरेंद्र ठाकुर, जोरावर सिंह, महेंद्र धर्माणी, राजेंद्र गर्ग, विक्रम शर्मा उपस्थित थे।
युवाओं में रहा सेल्फी का क्रेज
अनुराग ठाकुर के साथ सेल्फी लेने के लिए काफी उत्सुकता रही। गाहर में जनसभा के दौरान युवाओं ने अनुराग को घेर लिया और करीब एक घंटे तक सेल्फी का दौर चलता रहा।
बेटे के सेना में भर्ती होने से फूल जाता है पिता का सीना
बेटे के सेना में भर्ती होने से माता-पिता का सीना गर्व से फूल जाता है। अनुराग ने गाहर में कहा कि जब उन्हें लेफ्टिनेंट की उपाधि से नवाजा जा रहा था तो जितनी खुशी उन्होंने अपने पिता की आंखों में देखी, उतनी खुशी उनके चेहरे पर कभी नहीं थी। कहा कि उनके
पड़दादा और दादा भी फौज में नौकरी कर चुके हैं। मजाकिया लहजे में कहा कि उनके दादा 1916 में भर्ती हुए थे, जबकि वह पूरे 100 वर्ष बाद 2016 में लेफ्टिनेंट बने।