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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Answer sought from the Chief Secretary in the case of dirt near Atal Tunnel

HP High Court: अटल टनल के पास गंदगी होने के मामले में मुख्य सचिव से जवाब तलब, जानें सभी बड़े फैसले

Fri, 10 Mar 2023 10:42 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 10 Mar 2023 10:42 AM IST
सार

अटल टनल के आसपास कचरे के ढेरों पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने मुख्य सचिव से गंदगी रोकने के लिए बनाए गए प्रावधानों की जानकारी तलब की है।

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Answer sought from the Chief Secretary in the case of dirt near Atal Tunnel
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल हाईकोर्ट में अटल टनल के आसपास कचरे के ढेरों पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने मुख्य सचिव से गंदगी रोकने के लिए बनाए गए प्रावधानों की जानकारी तलब की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने मामले की आगामी सुनवाई अब 27 मार्च निर्धारित की है। मामले पर वीरवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत से ताजा शपथपत्र दायर करने का आग्रह किया। अदालत को बताया गया कि मुख्य सचिव या प्रधान सचिव पर्यटन की ओर से शपथपत्र के माध्यम से ताजा रिपोर्ट दायर की जाएगी। अदालत ने गंदगी को हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने वाले नियम व पिछले एक वर्ष में वसूल किए गए जुर्माने की रकम की जानकारी भी मांगी थी।

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अटल टनल के आसपास गंदगी को रोकने के लिए बनाए गए अथवा बनाए जाने वाले प्रावधानों की जानकारी भी मांगी गई थी। इनमें चेतावनी बोर्ड, डस्टबिन, पुरुषों व महिलाओं के लिए शौचालय और क्षेत्र को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे उपाय शामिल हैं। बता दें कि अटल टनल एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में उभरा है और बड़ी तादाद में पर्यटक लाहौल की खूबसूरत वादियों में घूमने आते हैं। पर्यटकों द्वारा अटल टनल के आसपास कचरा फैलाया जा रहा है। यहां न तो पर्याप्त कूड़ेदान है और न ही पुरुषों और महिलाओं के लिए पर्याप्त शौचालय हैं। यह टनल हिमालय की पीर पंजाल श्रृंखला के उत्तरी क्षेत्र में रोहतांग दर्रे के नीचे बनाई गई है। 3200 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस टनल का लोकार्पण 3 अक्तूबर, 2020 को किया गया था। रक्षा मंत्रालय के तहत बीआरओ ने इसका कार्य पूरा किया था।

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नेशनल बागवानी बोर्ड को प्रोजेक्ट के लिए सब्सिडी देने के आदेश
वहीं, हाईकोर्ट ने एक अन्य फैसले में नेशनल बागवानी बोर्ड को प्रोजेक्ट के लिए सब्सिडी देने के आदेश दिए है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने बोर्ड की ओर से सब्सिडी न देने के निर्णय को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि बोर्ड 13 अप्रैल तक सभी याचिकाकर्ताओं को नियमानुसार बनाए गए प्रोजेक्टों को सब्सिडी अदा करें। याचिकाकर्ता सुधीर खिमटा, ज्योति लाल मेहता और राजेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए अदालत ने यह निर्णय सुनाया। मामले के अनुसार बागवानी के विकास और प्रोत्साहन के लिए भारत सरकार ने 1984 में नेशनल बागवानी बोर्ड की स्थापना की थी। बोर्ड बागवानों को सहायता प्रदान करने के लिए सब्सिडी देता है। इसके लिए समय-समय पर बागवानोें के हितों में स्कीमें निकाली जाती है। सेब के फलों की पैकिंग व ग्रेडिंग यूनिट को स्थापित करने के लिए बोर्ड ने स्कीम निकाली कि किसी प्रोजेक्ट की कुल लागत 50 लाख तक होने पर 35 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी।

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जबकि, 72.5 लाख रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट पर सब्सिडी की राशि 50 फीसदी रखी गई है। याचिकाकर्ताओं ने सेब के फलों की पैकिंग व ग्रेडिंग यूनिट को स्थापित करने के लिए बैंक से लोन लिया। बोर्ड की स्कीम के तहत उन्होंने सब्सिडी के लिए नेशनल बागवानी बोर्ड के समक्ष आवेदन किया। बोर्ड ने उनके आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया कि प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को समय पर पूरा नहीं किया गया। अदालत ने पाया कि बोर्ड ने याचिकाकर्ताओं के आवेदन को गलत तरीके से रद्द किया है। जबकि, संयुक्त जांच टीम ने बोर्ड को रिपोर्ट दी थी कि यूनिट का निर्माण कार्य समय पर पूरा कर लिया गया था। अदालत ने पाया कि बोर्ड ने संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए याचिकाकर्ताओं का आवेदन खारिज किया है।

 

जंगी-थोपन प्रोजेक्ट मामले पर बहस के लिए सरकार ने मांगा समय

हाईकोर्ट में लंबित जंगी-थोपन मामले पर बहस के लिए सरकार ने अतिरिक्त समय मांगा है। अदालत ने मामले की सुनवाई अब 27 मार्च 2023 निर्धारित की है। अदालत ने अदाणी समूह और राज्य सरकार दोनों की अपीलों की सुनवाई एक साथ निर्धारित की है। किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। विदेशी कंपनी ब्रेकल के बाद अदाणी समूह भी इस परियोजना को नहीं बनाना चाहता है। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया गया। कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और अपफ्रंट राशि जमा नहीं करवाई।

इसके बाद यह प्रोजेक्ट अदाणी कंपनी को दिया गया। समूह ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ जमा किए। बाद में इस परियोजना के टेंडर को रद्द कर दिया गया। ब्रेकल कंपनी ने हिमाचल सरकार से पत्राचार किया और अगस्त 2013 को अदाणी समूह के पार्टनर के तौर पर 280.06 करोड़ की जमा राशि ब्याज सहित वापस करने के लिए आग्रह किया। अक्तूबर 2017 में कैबिनेट मीटिंग में वीरभद्र सिंह सरकार ने फैसला लिया था कि अदाणी समूह को पावर प्रोजेक्ट की 280 करोड़ की अपफ्रंट मनी वापस की जाएगी, लेकिन 5 दिसंबर, 2017 को सरकार ने अदाणी ग्रुप पर दिखाई गई 280 करोड़ रुपये की मेहरबानी वाला यह फैसला वापस ले लिया।

एमएमयू विद्यार्थियों से अतिरिक्त ट्यूशन फीस वसूली पर सरकार से जवाब तलब

 महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय (एमएमयू) के विद्यार्थियों से अतिरिक्त ट्यूशन फीस वसूलने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई अब 11 अप्रैल निर्धारित की है। एमएमयू और उससे संबद्ध मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज कुमारहट्टी के करीब 1,200 विद्यार्थियों से 103 करोड़ 96 लाख 53 हजार रुपये की धनराशि अतिरिक्त ट्यूशन फीस के तौर पर वसूलने का आरोप लगाया गया था। इस अनियमितता के लिए मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज पर हिमाचल राज्य निजी शिक्षा नियामक आयोग ने 45 लाख का जुर्माना लगाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने 22 जुलाई 2022 को आयोग के इस फैसले पर रोक लगा रखी है। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया था कि वर्ष 2012 से 2020 की अवधि के दौरान लगभग 1,200 एमबीबीएस छात्रों से 103 करोड़ 96 लाख 53 हजार रुपए की अतिरिक्त ट्यूशन फीस वसूली जा चुकी है।

एमएमयू की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिमाचल राज्य निजी शिक्षा नियामक आयोग की ओर से पारित आदेशों पर पूर्ण कोरम के हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि आयोग के दो सदस्यों में से जिन्होंने इस मामले की सुनवाई की थी, एक सदस्य शशिकांत शर्मा ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए। शशिकांत शर्मा ने हस्ताक्षर से इनकार करते हुए कहा था कि उनकी बेटी भी विश्वविद्यालय में नामांकित थी। बता दें कि वर्ष 2013-14 बैच की एमबीबीएस छात्रा निवेदिता राव और यामिनी की शिकायत पर यह आदेश पारित किए हैं। शिकायत की गई थी कि शुरू में उन्होंने अतिरिक्त ट्यूशन फीस की वसूली को लेकर विरोध भी किया था, लेकिन उन्हें ये कहकर धमकाया गया कि फीस न जमा करने पर डिग्री नहीं पूरी होने दी जाएगी। ये भी आरोप लगा था कि एसटी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति का भी संस्थान ने गोलमाल कर लिया था।

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