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Shimla News: एचआरटीसी के एमडी कार्यालय में फूटा महिला अभिभावकों का गुस्सा

Tue, 27 May 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 27 May 2025 11:59 PM IST
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Anger of female parents burst out in HRTC MD office
बस पास की घटाई गई दरों से सहमत नहीं अभिभावक, पुराने स्लैब को ही लागू करने पर अड़े
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बोले, हर छह महीने में बढ़ाई जा रहीं बस पास दरें
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की ओर से शहर के निजी स्कूलों को चलने वाली चार्टेड बसों के स्कूल बस पास किराये में की गई कटौती से अभिभावक सहमत नहीं है।

एचआरटीसी ने पांच किलोमीटर तक की बस पास दरें 1800 रुपये मासिक कर दी थीं। इसके बाद विरोध हुआ तो इसे घटाकर 1200 रुपये कर दिया है लेकिन अभिभावकों का कहना है कि यह कटौती कम है। अभिभावक अब इसे पुराने स्लैब 600 रुपये मासिक करने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार बार-बार बस पास किराये में बढ़ोतरी कर अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रही है। महिला अभिभावकों ने कहा कि सरकार पुराने स्लैब को ही लागू रखें।
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सैकड़ों की तादाद में महिला अभिभावक सुबह साढ़े ग्यारह बजे के करीब महाप्रबंधक डॉ. निपुण जिंदल से मिलने पहुंचीं। महिला अभिभावकों ने महाप्रबंधक से कहा कि संशोधन के बाद भी जो बस किराया है वह काफी ज्यादा हैै। महिला अभिभावकों ने कहा कि सरकार प्रत्येक छह महीनों में बस किराया बढ़ा रही है। इससे अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। महिला अभिभावक फालमा चौहान, सुरेंद्रा, सपना, पूजा और स्वाति गांधी ने बताया कि महंगाई की मार से बच्चों की पढ़ाई का खर्च तक चलाना मुश्किल होता जा रहा है। महिला अभिभावकों ने कहा कि सरकार एचआरटीसी को घाटे से उबारने के लिए अभिभावकों से यह पैसा वसूल रही है। बताया कि अधिकांश अभिभावकों के दो-दो बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। ऐसे में फीस के साथ 48 से 50 हजार रुपये किराये में ही देना पड़ रहा है। महाप्रबंधक डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि अभिभावक अपनी समस्याएं लिखित में दें। इसके बाद ही वह उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री इस बारे में बात कर पाएंगे। महिला अभिभावकों ने चेताया कि अगर उनकी समस्या हल नहीं हुई तो सरकार के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
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अलग बस की सुविधा तक नहीं
अदिति ने कहा कि सरकार बस किराया तो बढ़ा देती है, लेकिन बच्चों के लिए अलग से बस की सुविधा नहीं है। बच्चों को बस के लिए मुख्य सड़क तक पैदल जाना पड़ता है।

पुराना स्लैब करें लागू
फालमा चौहान ने कहा कि सरकार पुराना वाला स्लैब ही लागू करें। नए स्लैब में जो संशोधित किया है, वह अभी भी काफी ज्यादा है। पहले 6 से 12 किलोमीटर के 1350 रुपये देने पड़ते थे लेकिन अब 1800 रुपये देने पड़ रहे हैं।




शिक्षा के अधिकार पर हमला
कन्नू ने कहा कि एचआरटीसी ने किराया नहीं बढ़ाया है, बल्कि शिक्षा के अधिकार पर भी सीधा हमला किया है। बच्चों को स्कूल भेजना जरूरी है। इसलिए सरकार को अपने फैसले पर विचार करना चाहिए।




सस्ता और विश्वसनीय विकल्प होना चाहिए
प्रियंका ने कहा कि सरकारी ट्रांसपोर्ट सस्ता और विश्वसनीय होना चाहिए। लेकिन अब यह खर्चीला हो गया है। सरकार को चाहिए कि वह स्थिर नीति बनाए और हर तबके का ध्यान रखें।


सामान्य किराया भी करें कम
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि सरकार न्यूनतम बस किराया जोकि 10 रुपये है, उसे कम करें। अभिभावक बच्चों को लाने ले जाने के लिए चंद किलोमीटर का सफर करते है। ऐसे में रोजाना चार बार सफर करने के कारण उन्हें 40 रुपये देने पड़ रहे हैं। इसके अलावा अन्य बढ़ाया गया किराया भी कम किया जाए।
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