अंदर धूमल-शांता का मंथन, बाहर चलता रहा नड्डा का स्वागत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मिशन 60 प्लस के लिए हिमाचल भाजपा में नड्डा-धूमल-शांता गुटों की भ्रांतियां दूर करने आ रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे से एक दिन पहले कांगड़ा एयरपोर्ट से लेकर पालमपुर तक सियासत गर्माई रही। मंगलवार दोपहर से पहले नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल शांता कुमार से मिलने उनके घर यामिनी पहुंचे। यहां कार्यकर्ताओं ने धूमल का स्वागत किया।
यामिनी परिसर के अंदर शांता और धूमल अमित शाह के दौरे की तैयारियों को लेकर मंथन कर रहे थे। इसी बीच कांगड़ा एयरपोर्ट से लेकर पालमपुर तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का जोरदार स्वागत होता रहा। एयरपोर्ट पर नड्डा के स्वागत के लिए पूर्व विधायक राकेश पठानिया, कृपाल परमार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंचे थे।
पालमपुर पहुंचने पर बैंडबाजे के साथ नड्डा का भव्य स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से निकलने के बाद नड्डा ने शाह के दौरे की तैयारियों को लेकर कांगड़ा संगठनात्मक जिला के कार्यकर्ताओं के साथ मटौर में बैठक भी की। यहां भी टिकट के तलबगार नड्डा को घेरे हुए थे।
भाजपा का चेहरा कौन होगा पर रहेंगी सबकी निगाहें
हिमाचल में भाजपा के सीएम उम्मीदवार को लेकर मोदी दौरे के बाद भी बादल नहीं छंटे हैं। प्रदेश में पार्टी के चेहरे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी के मन में क्या है, अब इसके संकेत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के पालमपुर दौरे में मिल सकते हैं। इसी के चलते प्रदेश में पार्टी के सभी बड़े नेताओं की निगाहें टिक गई हैं।
शिमला रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सीएम पद के दावेदार धूमल और नड्डा दोनों को मंच पर बराबर अहमियत दी थी। उधर, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी भाजपा को सीएम पद प्रत्याशी घोषित करने की चुनौती दे रहे हैं। सीएम का कहना है कि भाजपा यदि प्रदेश में मजबूत है तो सीएम का चेहरा क्यों नहीं सामने ला रही। भाजपा के बड़े नेता भी चेहरों को लेकर उत्सुक हैं।
हिमाचल में भाजपा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यह भी तर्क दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर चुनाव में साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री पद पर अलग चेहरे बैठाकर कई भाजपा दिग्गजों को किनारे किया जा सकता है। हिमाचल में भी मोदी और शाह की जोड़ी इसी फॉर्मूले के तहत भाजपा सरकार का नेतृत्व तय कर सकती है।
हिमाचल में 5-5 साल सत्ता का बना है ट्रेंड
भाजपा दिग्गजों का कहना है कि मोदी लहर के बीच इस बार भाजपा जीत का रिकॉर्ड बनाएगी। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश भाजपा की कई बड़े दिग्गजों के बजाए मुख्यमंत्री पद के लिए किसी ईमानदार और सरल चेहरे पर विचार हो सकता है। भाजपा ने जिस तरह से
पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था, इस बार वैसा नहीं होगा। इसका आधार भी अन्य राज्यों में हुए चुनाव माने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित न करने की स्थिति में इस बात का भी साफ संकेत मिल चुका है कि मोदी और शाह हिमाचल विधानसभा चुनाव की कमान अपने हाथ में रखेंगे।
हिमाचल प्रदेश में जिस तरह से 5 साल भाजपा और 5 साल कांग्रेस के सत्ता में रहने का ट्रेंड बन चुका है, उसी तर्क पर भाजपा के नेता पहले से यही मानकर चल रहे हैं कि इस बार फि र भाजपा सत्ता में आएगी। वहीं, मोदी लहर उनके इस दावे को और मजबूती देगी।
खेमेबाजी को पाटेंगे अमित शाह
राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह प्रदेश भाजपा में खेमेबाजी की थाह लेंगे। धूमल, नड्डा और शांता कैंप में बंटी प्रदेश भाजपा को एक फ्रंट पर लाने का मंत्र भी शाह के दो दिवसीय दौरे से निकल सकता है। दौरे में सबसे अहम शाह की प्रदेश कोर ग्रुप से होने वाली बैठक रहेगी। बैठक के बाद मिलने वाली चुनावी जिम्मेदारियों से तीनों कैंपों का कद भी तय होगा।
दौरा यह भी तय करेगा शाह कि अब तक यूपी उत्तराखंड में कामयाब रहा ‘जिताऊ प्रत्याशी’ फार्मूला हिमाचल में कैसे लागू होगा। पार्टी ने कामयाबी से परंपरागत टिकट आवंटन फार्मेट को तोड़ कर परिवारवाद और दूसरे दलों के बागियों को जीत का हिस्सा बनाया, उससे प्रदेश में टिकट के दावेदारों की धड़कने बढ़ी हुई हैं।
शाह के सामने प्रदेश भाजपा में गुटबाजी पर ब्रेक लगाने की चुनौती
राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित संगठन के आधा दर्जन केंद्रीय पदाधिकारी बुधवार को पालमपुर पहुंच रहे हैं। टीम शाह का दौरा विधानसभा चुनाव के लिहाज से बेहद अहम बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व से प्रदेश संगठन की गुटबाजी छिपी नहीं है। समय समय पर सीएम पद के लिए लाबिंग के प्रकरण सामने आते रहेे हैं।
टीम शाह के सामने खेमों को एक करने के लिए प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व में तालमेल बैठाना होगा। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल का कैंप उनके सीएम बनाए जाने की समय समय पर पैरोकारी करते रहते हैं। वहीं धूमल को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से टक्कर मिलती दिख रही है। नड्डा का केंद्रीय नेतृत्व में खासा रसूख उनकी दावेदारी को मजबूत कर रहा है।
इन दोनों कैंपों के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार भी हैं। केंद्रीय नेतृत्व के सीएम या मंत्रीपद के लिए तय आयु सीमा मानक को शांता पार कर चुके हैं, लेकिन पार्टी में उनके करीबियों की कमी नहीं है। सर्वाधिक विधानसभा सीटों वाले कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र में शांता की मजबूत पकड़ के चलते उनको दरकिनार नहीं किया जा सकता।
‘जिताऊ प्रत्याशी’ के फार्मूले से बढ़ी हैं दावेदारों की धड़कने
ऐसे में दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रदेश भाजपा के कोर ग्रुप की शाह से होने वाली बैठक में कई अहम निर्णय हो सकते हैं। माना जा रहा है कि शाह के दौरे में चुनाव प्रचार अभियान को लेकर दी जाने वाली जिम्मेदारी से तीनों कैंपों का कद तय हो जाएगा। चुनाव के दौरान टिकट आवंटन की प्रक्रिया की स्थिति भी इससे साफ होगी कि आखिर किसके पास जिताऊ प्रत्याशी अधिक हैं।
यूपी और उत्तराखंड की चुनावी रणनीति से यह संकेत साफ हो गए हैं कि जिताऊ चेहरे पर पार्टी दांव खेलेगी। परिवारवाद से लेकर दल बदल के पुराने फार्मेट से बाहर निकलकर भाजपा विधानसभा चुनाव में उतर रही है। उत्तराखंड में तो पार्टी ने चार सिटिंग विधायकों का
टिकट काट दूसरे दलों से आए प्रत्याशियों को मौैका देकर संकेत दे दिया है कि चुनाव जीतने के लिए हर दांव खेला जा सकता है। अगर इसी फार्मूले पर पार्टी हिमाचल में भी उतरी तो सिटिंग विधायकों सहित कई अन्य दावेदारों की चिंता आने वाले दिनों में बढ़ सकती है।
अमित शाह बुधवार को कांगड़ा एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे। यहां हजारों कार्यकर्ता उनका भव्य स्वागत करेंगे। शांता, धूमल, नड्डा, सत्ती समेत प्रदेश भाजपा का नेतृत्व शाह का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत करेगा। भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने 1000 बाइकों की रैली निकालने की योजना भी बनाई है।
दरंग में भी पालमपुर और देहरा संगठनात्मक जिलों के कार्यकर्ताओं ने शाह के भव्य स्वागत की योजना बनाई है। उधर, शाह पालमपुर पहुंचते ही बैठकों का दौर शुरू कर देंगे। लंच के बाद अमित शाह पत्रकार वार्ता भी करेंगे। इसके बाद शाह प्रदेश भाजपा के कोर ग्रुप के साथ बैठक करेंगे।
वह प्रदेश भाजपा के पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों और आरएसएस के नेताओं के साथ बैठकें करेंगे। ये बैठकें रात 12 बजे तक चलेंगी। रात को 4 घंटे सोने के बाद अमित शाह 4 मई को सुबह 6:30 बजे फिर से बैठकें शुरू कर देंगे। शाह मीडिया ग्रुपों के संपादकों, प्रदेश के बुद्धिजीवियों और कुछ महत्वपूर्ण लोगों से भी बातचीत करेंगे।