{"_id":"628b43ee2a34f43ac74412f6","slug":"amar-ujala-umeed-ki-mashal-vinod-kumar-tissue-culture-lab-inspiring-story-bilaspur-himachal-pradesh","type":"story","status":"publish","title_hn":"उम्मीद की मशाल: सुनार का काम छोड़ मिट्टी को ‘सोना’ बनाने में जुटे विनोद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उम्मीद की मशाल: सुनार का काम छोड़ मिट्टी को ‘सोना’ बनाने में जुटे विनोद
Mon, 23 May 2022 01:53 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 23 May 2022 01:53 PM IST
सार
दधोल गांव के विनोद ने बागवानी क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में खास पहचान बना ली है। स्नातक के बाद वह पुश्तैनी सुनार के काम में बड़े भाई का सहयोग करने लगे। सोने के व्यापार से अलग होकर वर्ष 2006 में टिशू कल्चर लैब खोली।
विज्ञापन
विनोद सोनी
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिला बिलासपुर के विनोद सोनी सुनार का पुश्तैनी काम छोड़कर मिट्टी को सोना बनाने में जुटे हैं। वर्ष 2006 से अपनी टिशू कल्चर लैब में पौधे तैयार कर इन्हें प्रदेश सहित अन्य राज्यों को निर्यात कर रहे हैं। उन्होंने लैब में करीब 50 महिलाओं सहित 70 लोगों को रोजगार दिया है। लैब का सालाना करीब चार करोड़ रुपये का टर्नओवर है। विनोद सोनी को कई अवार्ड भी मिले हैं।
विज्ञापन
घुमारवीं उपमंडल के दधोल गांव के विनोद ने बागवानी क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में खास पहचान बना ली है। स्नातक के बाद वह पुश्तैनी सुनार के काम में बड़े भाई का सहयोग करने लगे। सोने के व्यापार से अलग होकर वर्ष 2006 में टिशू कल्चर लैब खोली।
विज्ञापन
विनोद ने बताया कि उस समय ग्रीन हाउस की ओर किसानों का काफी रुझान था। ग्रीनहाउस में लगने वाले पौधे बंगलूरू से आयात होते थे। इससे प्रदेश के किसानों-बागवानों को काफी दिक्कतें होती थीं। बागवानों-किसानों को उन्नत किस्म के पौधे प्रदेश में मिलें, इसके लिए 2006 में लैब खोली और टिशू कल्चर तकनीक से पौधे तैयार करने शुरू किए। उस वक्त प्रदेश में सेब के पौधों की काफी मांग थी। बागवानों को उन्नत किस्म के पौधे देने की दिशा में काम शुरू किया।
विज्ञापन
गर्म क्षेत्रों में पैदा होने वाले सेब के पौधे भी लैब में तैयार कर बागवानों को उपलब्ध करवाए। बागवानी विभाग का भी उन्हें पूरा सहयोग मिला। वह अपनी लैब में सेब, आड़ू, ब्लूबेरी, प्लम सहित कई अन्य पौधे तैयार कर प्रदेश सहित जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान, बंगलूरू और महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों के बागवानों को निर्यात कर रहे हैं। विनोद सोनी को कृषि अनुसंधान केंद्र दिल्ली ने इनोवेटिव फार्मर अवार्ड, पूर्व राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने एंप्लायमेंट कंट्रीब्यूशन अवार्ड, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से बेस्ट फार्मर अवार्ड और आईएचबीटी पालमपुर से टेक्नालॉजी एडप्शन अवार्ड व अन्य कई अवार्ड मिले हैं।