फब्तियां कसना, फेसबुक और व्हाट्सएप पर गलत संदेश भेजना भी अपराध
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डीएसपी घुमारवीं राजेंद्र कुमार जसवाल ने कहा कि महिलाओं को फब्तियां कसना भी अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा अगर महिलाओं को फेसबुक व व्हाट्सएप पर कोई गलत संदेश भेजता है तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। डीएसीपी घुमारवीं में ‘अमर उजाला’ द्वारा आयोजित 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे।
घुमारवीं अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में 100 के करीब आशा वर्कर ने भाग लिया। जसवाल ने कहा कि ऐसी कई घटनाएं हर रोज घटती हैं कि कोई महिला व लड़की बाजार में अकेली जा रही होती हैं तो कुछ मनचले उन पर फब्तियां कसते हैं लेकिन महिलाएं डर और संकोच के कारण उनकी बातें सुनती रहती हैं जिससे उन मनचलों का हौसला और बढ़ता है लेकिन महिलाओं को इन से डरना नहीं चाहिए और उनकी शिकायत करनी चाहिए।
अगर महिलाएं व लड़कियां साहस करती भी हैं तो बात थाना तक पहुंचने के बाद आगे की कार्रवाई करने से सामाजिक डर से मना कर देती हैं लेकिन महिलाओं को बिना डर व संकोच से इनके विरुद्ध कार्रवाई करवानी चाहिए ताकि मनचलों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके। कहा कि अगर महिलाएं थाना में नहीं आना चाहती हैं तो वह कोर्ट के माध्यम से भी अपनी बात रख सकती हैं। महिलाएं सामाजिक डर से कई तरह से यातनाओं का सामना कर लेती हैं पर कानून का सहारा लेने से अभी भी संकोच करती हैं जो गलत है।
महिलाओं को कानूनी जानकारी होना जरूरी
आशा कार्यकर्ता संघ खंड घुमारवीं की प्रधान सोमा कपूर ने बताया कि आज भी समाज मे महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं और हमें इसके लिए महिलाओं को कानून के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
महिलाएं करें पुलिस में शिकायत : धीमान
आशा कार्यकर्ता संघ जिला प्रधान वीना धीमान ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को महिला हिंसा के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग से प्रशिक्षण मिल चुका है और उन्होंने सभी आशा कार्यकर्ताओं से कहा कि अपने अपने कार्य क्षेत्र में होने वाली महिला हिंसा के बारे में पुलिस को शिकायत करें ताकि महिलाओं पर हो रहे अत्याचार कम हो सके।
लड़का-लड़की से भेदभाव न करें : किरण
आशा कार्यकर्ता संघ खंड घुमारवीं की मुख्य सलाहकार किरण ठाकुर ने बताया कि यदि हम समाज में लड़का व लड़की में भेद भाव न करें और लड़कियों को अच्छी शिक्षा दें तो हम समाज से महिला और लड़कियों पर हो रही हिंसा को रोक सकते हैं।
महिलाओं का जागरूक होना जरूरी : जगदीश
स्वास्थ्य पर्यवेक्षक घुमारवीं जगदीश चंद ने बताया कि बालिकाओं के साथ आज भी गर्भ से ही हिंसा शुरू हो जाती है और जन्म लेने के बाद मृत्यु तक हिंसा हो रही है। इसके लिए अब महिलाओं को जागरूक होना चाहिए क्योंकि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं।
कार्यक्रम से मिलीं बहुत सी जानकारियां: पुष्पा
पुष्पा देवी वार्ड सदस्य व आशा वर्कर ने कहा कि अमर उजाला के द्वारा आयोजित अपराजिता सौ मिलियन स्माइल्स के इस कार्यक्रम में बहुत सी जानकारियां मिली। इसे वह आगे भी लोगों को बताएगी। अमर उजाला का इस तरह का अभियान चलाने के लिए धन्यवाद हैं।
लिंग जांच करने वाला डॉक्टर और करवाने वाले सब अपराधी : चंदेल
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से खंड स्वास्थ्य शिक्षक सुरेश चंदेल ने बताया कि महिलाओं पर होने वाली घरेलू हिंसा पर सरकार ने कानून बनाए हैं यदि किसी महिला से किसी प्रकार की हिंसा हो तो वह कानून का सहारा ले सकती है। चंदेल ने स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बताया कि यदि किसी गर्भवती औरत के गर्भ की लिंग की जांच कर परिवार के लोग जबरदस्ती गर्भपात करवाने को कहें तो यह कानूनी अपराध है।
इसके लिए लिंग जांच करने वाला डॉक्टर और करवाने वाले सभी दोषी माने जाएंगे और ऐसे व्यक्तियों के लिए सजा व जुर्माने का प्रावधान है। चंदेल ने बताया कि गर्भपात तभी करवाया जा सकता है जब बच्चा रहने से मां को या बच्चे को कुछ खतरा हो तो डॉक्टर सलाह से गर्भपात करवाया जा सकता है। बताया कि 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की वर्ष 2018 के लिंग अनुपात को देखा जाए तो घुमारवीं खंड की 1000 लड़कों पर 938 लड़कियां हैं और यदि इसी तरह लड़कियों की
जनसंख्या कम होती रही तो समाज के लिए यह घातक सिद्ध होगा। कहा कि स्वास्थ्य विभाग में सरकार द्वारा बेटियों को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी बालिका सुरक्षा योजना चलाई है जिसमें एक बालिका पर परिवार नियोजन का करवाने पर 35 हजार की एफडी बेटी के नाम और दो बालिकाओं पर ऑपरेशन करवाने पर 25 हजार की एफडी बेटियों के नाम की जा रही है।