सरकारी स्कूलों में लगेगी एक्स्ट्रा क्लास
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शिक्षा के क्षेत्र में निजी कोचिंग और ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर्स चांदी कूट रहे हैं। स्कूलों में मिलने वाली शिक्षा के अलावा घर पर ट्यूशन देने का कारोबार खूब फल फूल रहा है। बच्चों के माता-पिता की उम्मीद स्कूलों से कम और घर पर पढ़ाने वाले मास्टरजी से ज्यादा रहती है।
लोगों में यह अवधारणा है कि स्कूलों में बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता। लिहाजा, शिक्षा के गिरते स्तर और शिक्षकों के रवैये पर सरकार गंभीर हो गई है।
शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूल मुखियाओं को निर्देश दिए हैं कि सुबह स्कूल खुलने से पहले और शाम को छुट्टी होने के बाद नैतिक दायित्व के तहत स्पेशल कोचिंग कक्षाएं लगवाएं। नौवीं से बारहवीं के बच्चे जिस सब्जेक्ट में कमजोर हों, उन्हें स्पेशल कोचिंग दें।
अध्यापक नैतिक दायित्व के तहत स्पेशल कोचिंग कक्षाओं में पढ़ाएंगे। इसकी एवज में बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह स्पेशल कोचिंग कक्षाएं केवल स्कूल में आयोजित की जाएंगी।
निजी कोचिंग ट्यूशन लेने वाले शिक्षकों के खिलाफ होगी कार्रवाई
यदि कोई शिक्षक बच्चों को प्राइवेट कोचिंग सेंटर में ट्यूशन के लिए प्रेरित करता पाया गया तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। परिसर में स्कूल प्रबंधन किसी भी निजी कोचिंग कंपनी के प्रतिनिधियों को समर्थन नहीं देगा।
इस पर स्कूल मुखिया शिक्षकों पर नजर रखेंगे। यदि कोई भी शिक्षक कोचिंग या ट्यूशन कंपनी के साथ सहयोग करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उच्च शिक्षा उप निदेशक मंडी सुशील पुंडीर ने कहा कि शिक्षा निदेशालय से निर्देश मिले हैं। सभी स्कूल मुखियाओं को ये भेजे जा रहे हैं। प्राइवेट कोचिंग के प्रतिनिधियों को स्कूल परिसर में आने पर पूर्ण रूप से मनाही है। कोई भी शिक्षक छात्रों को ट्यूशन के लिए प्रेरित नहीं करेगा।
जिला मंडी लेक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण भारती, साइंस मास्टर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष जगदीश ठाकुर ने शिक्षा विभाग की पहल को सराहा है। दोनों की संघों के नेताओं ने कहा कि शिक्षक विभाग के निर्देशों का ईमानदारी से पालन करेंगे।