{"_id":"5e1dde618ebc3e4b0f77aa9a","slug":"ajay-sharma-s-research-paper-published-in-the-indian-science-congress-proceedings-journal","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंडियन साइंस कांग्रेस की कार्यवाही पत्रिका में छपा अजय शर्मा का शोधपत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंडियन साइंस कांग्रेस की कार्यवाही पत्रिका में छपा अजय शर्मा का शोधपत्र
Wed, 15 Jan 2020 05:00 AM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 15 Jan 2020 05:00 AM IST
विज्ञापन
अजय शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
107वीं इंडियन साइंस कांग्रेस 2020 बंगलूरू की छपी कार्यवाही पत्रिका में अजय शर्मा का शोधपत्र छपा है। इसमें न्यूटन के 334 साल पुराने नियम को संशोधित करने की बात छापी गई है। इसी बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान नई दिल्ली के भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष ने भी लिखित रूप में अजय को सुझाव दिया है कि यह प्रयोग होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजूकेशन मुंबई में किए जा सकते हैं।
विज्ञापन
शर्मा के शोध के अनुसार न्यूटन का नियम वस्तु के आकार की अनदेखी करता है। इस सिद्धांत के 334 वर्ष पुराने इतिहास में इस नियम को बिना कुछ विशेष प्रयोगों के सही माना जा रहा है। 22 अगस्त 2018 को अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स के अध्यक्ष और लायोला विश्वविद्यालय शिकागो के प्रो. गार्डन पी रामसे ने अजय के अनुसंधान पेपर पर रिपोर्ट दी थी।
विज्ञापन
इसमें कहा गया है कि अजय की ओर से वस्तु के आकार पर आधारित प्रयोगों में नियम गलत साबित हो सकता है। 2019 में राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने वस्तु के आकार न्यूटन के प्रभाव को जांचने के लिए संवेदनशील प्रयोग करने की सलाह दी। कई वैज्ञानिक संस्थानों ने अजय को प्रयोगों के परिणाम पेश करने को कहा है। इन प्रयोगों के लिए अजय सरकार से प्रयोगशाला की सुविधाएं मांग रहे हैं।
विज्ञापन
नए नियम के अनुसार क्रिया और प्रतिक्रिया के बराबर अथवा कम या ज्यादा भी हो सकती है। शर्मा ने विनम्रता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से आग्रह किया है कि उन्हें प्रयोगों के लिए प्रयोगशाला की सुविधाएं दी जाए। इससे वह अंतिम रूप से न्यूटन के तीसरे नियम के संशोधन को सिद्ध कर सकेंगे।