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Shimla News: भाजपा-एसएफआई के कार्यकर्ताओं में धक्कामुक्की, हाथापाई से माहौल तनावपूर्ण
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उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान आमने-सामने आ गए दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता, पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर किया अलग
दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर लगाए भड़काने और हाथापाई करने के आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। उपायुक्त कार्यालय के बाहर बुधवार दोपहर के समय उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब भाजपा और एसएफआई के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। इस दौरान दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और इसके बाद धक्कामुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने फौरन बैरिकेडिंग की और सुरक्षा घेरा बनाकर किसी तरह से मामला शांत करवाया। पुलिस के आलाधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर भाजपा के नेताओं और एसएफआई के कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उन्हें समझाकर स्थिति को संभाला। दोनों ही पार्टियों ने एक -दूसरे को उकसाने और हमला करने के आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार उपायुक्त कार्यालय के समीप वर्षाशालिका में एसएफआई के कार्यकर्ता पेपर लीक और जंतर-मंतर में युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में क्रमिक अनशन कर रहे हैं। वहीं बुधवार को भाजपा ने प्रधानमंत्री आवास के समीप कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के किए विरोध प्रदर्शन के विरोध में धरना प्रदर्शन आयोजित किया। दोपहर ढाई बजे के समीप भाजपा के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपायुक्त कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और प्रदर्शन शुरू किया। 3:30 बजे के करीब उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब दोनों ओर से कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों और हाथापाई और धक्कामुक्की शुरू की। इस दौरान दोनों ओर से कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी भी हुई। इस दौरान कुछ युवाओं ने झंडों के लिए इस्तेमाल होने वाले डंडों को भी निकाल लिया था। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ता देखकर फौरन मोर्चा संभाला और बैरिकेडिंग करके सुरक्षा घेरा बनाकर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग किया। एएसपी अमित ठाकुर और डीएसपी शक्ति सिंह ने दोनों पार्टियों के नेताओं से बातचीत कर उन्हें समझाकर मामला शांत करवाया। इसके बाद बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता प्रदर्शन खत्म करने के बाद लौट गए और एसएफआई कार्यकर्ता भी शांत हो गए। किसी भी स्थिति को देखते हुए पुलिस बल घटनास्थल पर तैनात है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एसएफआई के कार्यकर्ता उनके प्रदर्शन में घुस गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इससे ही माहौल तनावपूर्ण हो गया है। वहीं आधे घंटे तक चले इस दोनों पार्टियों के बीच हुई इस धक्कामुक्की के कारण मालरोड और लोअर बाजार आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मार्ग अवरुद्ध होने के कारण लोग काफी देर तक सीटीओ चौक से आवाजाही नहीं कर सके।
इनसेट
सीटू–एसएफआई ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बनाया हिंसक, प्रशासन बना मूकदर्शक : कटवाल
भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने कहा कि सीटीओ पर भाजपा की ओर से प्रशासन से अनुमति लेकर किए जा रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को सीटू और एसएफआई से जुड़े लोगों ने सुनियोजित तरीके से बाधित करने का प्रयास किया। यह केवल भाजपा के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला नहीं बल्कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। भाजपा का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण आयोजित किया जा रहा था। इसके बावजूद सीटू कार्यकर्ता छात्रों की आड़ लेकर बिना अनुमति के वहां पहुंचे और जानबूझकर माहौल को तनावपूर्ण बनाने का प्रयास किया। सीटू के नेताओं ने स्वयं भीड़ में घुसकर छात्रों, विशेषकर छात्राओं को आगे कर उन्हें भड़काया और टकराव की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पूरी घटना के दौरान प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। भाजपा के कार्यक्रम में नियम-कानून लागू करने वाला प्रशासन बिना अनुमति पहुंचे सीटू और एसएफआई के कार्यकर्ताओं पर कोई कार्रवाई करने की बजाय उन्हें खुला संरक्षण देता रहा। इससे साफ है कि प्रशासन निष्पक्ष होकर नहीं, बल्कि सुक्खू सरकार के राजनीतिक इशारों पर कार्य कर रहा है।
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दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर लगाए भड़काने और हाथापाई करने के आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। उपायुक्त कार्यालय के बाहर बुधवार दोपहर के समय उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब भाजपा और एसएफआई के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। इस दौरान दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और इसके बाद धक्कामुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने फौरन बैरिकेडिंग की और सुरक्षा घेरा बनाकर किसी तरह से मामला शांत करवाया। पुलिस के आलाधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर भाजपा के नेताओं और एसएफआई के कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उन्हें समझाकर स्थिति को संभाला। दोनों ही पार्टियों ने एक -दूसरे को उकसाने और हमला करने के आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार उपायुक्त कार्यालय के समीप वर्षाशालिका में एसएफआई के कार्यकर्ता पेपर लीक और जंतर-मंतर में युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में क्रमिक अनशन कर रहे हैं। वहीं बुधवार को भाजपा ने प्रधानमंत्री आवास के समीप कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के किए विरोध प्रदर्शन के विरोध में धरना प्रदर्शन आयोजित किया। दोपहर ढाई बजे के समीप भाजपा के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपायुक्त कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और प्रदर्शन शुरू किया। 3:30 बजे के करीब उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब दोनों ओर से कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों और हाथापाई और धक्कामुक्की शुरू की। इस दौरान दोनों ओर से कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी भी हुई। इस दौरान कुछ युवाओं ने झंडों के लिए इस्तेमाल होने वाले डंडों को भी निकाल लिया था। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ता देखकर फौरन मोर्चा संभाला और बैरिकेडिंग करके सुरक्षा घेरा बनाकर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग किया। एएसपी अमित ठाकुर और डीएसपी शक्ति सिंह ने दोनों पार्टियों के नेताओं से बातचीत कर उन्हें समझाकर मामला शांत करवाया। इसके बाद बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता प्रदर्शन खत्म करने के बाद लौट गए और एसएफआई कार्यकर्ता भी शांत हो गए। किसी भी स्थिति को देखते हुए पुलिस बल घटनास्थल पर तैनात है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एसएफआई के कार्यकर्ता उनके प्रदर्शन में घुस गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इससे ही माहौल तनावपूर्ण हो गया है। वहीं आधे घंटे तक चले इस दोनों पार्टियों के बीच हुई इस धक्कामुक्की के कारण मालरोड और लोअर बाजार आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मार्ग अवरुद्ध होने के कारण लोग काफी देर तक सीटीओ चौक से आवाजाही नहीं कर सके।
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सीटू–एसएफआई ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बनाया हिंसक, प्रशासन बना मूकदर्शक : कटवाल
भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने कहा कि सीटीओ पर भाजपा की ओर से प्रशासन से अनुमति लेकर किए जा रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को सीटू और एसएफआई से जुड़े लोगों ने सुनियोजित तरीके से बाधित करने का प्रयास किया। यह केवल भाजपा के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला नहीं बल्कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। भाजपा का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण आयोजित किया जा रहा था। इसके बावजूद सीटू कार्यकर्ता छात्रों की आड़ लेकर बिना अनुमति के वहां पहुंचे और जानबूझकर माहौल को तनावपूर्ण बनाने का प्रयास किया। सीटू के नेताओं ने स्वयं भीड़ में घुसकर छात्रों, विशेषकर छात्राओं को आगे कर उन्हें भड़काया और टकराव की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पूरी घटना के दौरान प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। भाजपा के कार्यक्रम में नियम-कानून लागू करने वाला प्रशासन बिना अनुमति पहुंचे सीटू और एसएफआई के कार्यकर्ताओं पर कोई कार्रवाई करने की बजाय उन्हें खुला संरक्षण देता रहा। इससे साफ है कि प्रशासन निष्पक्ष होकर नहीं, बल्कि सुक्खू सरकार के राजनीतिक इशारों पर कार्य कर रहा है।
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