मणिमहेश यात्रा: प्रशासन ने वापस लिया फैसला, यात्रियों को राहत
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मणिमहेश यात्रा में विवादित यात्री पंजीकरण शुल्क को जिला प्रशासन ने वापस ले लिया है। अब यात्रियों से किसी तरह की उगाही नहीं होगी। वे बिना शुल्क दिए मणिमहेश यात्रा कर सकेंगे। ट्रस्ट की आय बढ़ाने के इस बड़े विकल्प पर प्रशासन को दबाव के आगे झुकना पड़ा है। हालांकि, मणिमहेश यात्रियों की ओर से शुल्क का कोई विरोध नहीं हुआ था।
हड़सर में 13 अगस्त से लागू इस व्यवस्था को सभी यात्री शांतिपूर्वक निभा रहे थे। निचले इलाकों में व्यवस्था के खिलाफ विरोध के स्वर मुखर थे। भरमौर और चंबा में भाजपा ने पंजीकरण शुल्क रद्द करने की मांग पर ज्ञापन सौंपे थे। शनिवार को उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने अतिरिक्त दंडाधिकारी भरमौर से बैठक कर पंजीकरण शुल्क न लेने पर मुहर लगाई।
मणिमहेश यात्रा में प्रशासन ने बीस रुपये प्रति यात्री पंजीकरण की व्यवस्था की थी। इसकी एवज में यात्रियों को स्वास्थ्य, खाद्य तथा शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ गंभीर हालत में हेलीकॉप्टर से भरमौर लाने-ले जाने का बंदोबस्त शामिल था।
अब पंजीकरण शुल्क हटाने से इन व्यवस्थाओं के प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। प्रशासन ने पंजीकरण से होने वाली आय से मणिमहेश के लिए रोप-वे बनाने का भी प्रस्ताव तैयार किया था। इसे भी झटका लग सकता है।
आय के लिए दूसरे साधन खोजेंगे: उपायुक्त
उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने बताया कि यात्रियों का पंजीकरण जारी रखने की कोशिश की जाएगी। किसी से भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्रशासन दूसरे साधनों से आय जुटाने के विकल्प तलाशेगा। मणिमहेश यात्रा निशुल्क जारी रहेगी। पंजीकरण शुल्क हटाने के बाद प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना है।
प्रशासन ने पंजीकरण की कुल अर्जित आय से करीब 8.5 प्रतिशत हिस्से पर पंजीकरण के टेंडर किए थे। 13 अगस्त से 12 सितंबर तक यात्रियों के पंजीकरण से होने वाली कुल आय से पंजीकरण का ठेका हासिल करने वाली फर्म को भुगतान किया जाना था। अब प्रशासन किसी भी तरह का शुल्क नहीं लेगा।
ऐसे में फर्म भी पंजीकरण से इनकार कर सकती है। यात्री पंजीकरण शुल्क को प्रशासन ने बंद करने का फैसला किया है। पार्किंग शुल्क जारी रहेगा। यात्रियों के वाहनों से निर्धारित 50, 100, 150 तथा 200 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क यात्रियों को कलसुई में देना होगा। पार्किंग को जगह हड़सर में मिलेगी।