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विदेशी सेब को चुनौती देने के लिए नई किस्में तैयार, एडम और किंग रॉट से निकाला तोड़

Mon, 07 May 2018 01:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Mon, 07 May 2018 01:00 PM IST
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Adams apple and King Roat apple varieties cultivation now in himachal pradesh

लंबे समय से विदेशों से आयात किए जा रहे सेब से परेशान हिमाचल के बागवानों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। दो महीने बाद जुलाई में शुरू होने वाले सेब सीजन में इस बार हिमाचल के बागवान दो नई किस्मों के फल मंडियों में उतारेंगे। इसमें अमेरिका का एडम और इटली का किंग रॉट सेब शामिल है।

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सुर्ख लाल रंग की रहने वाली इन किस्मों के फल इन दिनों बगीचों में अखरोट के आकार के बराबर हो चुके हैं। ये दोनों ही अर्ली किस्में हैं। वर्तमान में सेब बागवानों के सामने फलों की गुणवत्ता को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। विदेशों से आ रहा सुर्ख लाल और लंबोतरा सेब हिमाचल के सेब को मात दे रहा था।
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हिमाचल में तैयार होने वाले सेब में वक्त पर रंग न आना और आकार छोटा रह जाना इसकी बड़ी वजहें हैं। लेकिन शुरू से ही एडम और किंग रॉट किस्में सुर्ख लाल और लंबोतरी हैं। दोनों ही किस्मों के फल पूरी तरह विकसित होने के बाद मंडियों में बागवानों को अच्छे दाम दिलाने में सक्षम हैं।

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जेरोमाइन भी भर चुका है बागवानों की जेब

Adams apple and King Roat apple varieties cultivation now in himachal pradesh

इटली से लाई गई जेरोमाइन किस्म पिछले दो सालों से मार्केट में आ रही है तो इसका 25 से 28 किलो का एक बॉक्स 3000 रुपये से ऊपर भी बिक चुका है। इतनी ही मात्रा का सामान्य सेब का बॉक्स 1200 से 1800 रुपये तक ही बिक पाया है। जेरोमाइन और रेड विलोक्स किस्में तो इटली से कुछ साल पहले हिमाचल लाई जा चुकी हैं। किंग रॉट और एडम जेरोमाइन और रेड विलोक्स से भी अच्छी किस्में मानी जाती हैं।

क्या कहते हैं बागवान- सेब बहुल कोटखाई तहसील के गांव बखोल के बागवान संजीव चौहान का कहना है कि उनके बगीचे में एडम और किंग रॉट किस्मों में फल विकसित होना शुरू हो गए हैं। संजीव एडम सेब को मार्केट के अनुसार सर्वाधिक अनुकूल मानते हैं। ठियोग की ग्राम पंचायत कमाह के गांव गोथू (बसमोल) के बागवान कुलदीप कांत शर्मा ने अपने बगीचे में किंग रॉट किस्म को तैयार करने का दावा किया है। 

परखने के बाद ही कुछ कहूंगा- डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के पूर्व कुलपति एवं वर्तमान में निदेशक विस्तार डॉ. विजय सिंह ठाकुर का कहना है कि नई किस्मों के बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी है। विदेशों से लाई किस्मों को परख लेने के बाद ही यह दावा कर सकते हैं कि ये पैदावार और विपणन के हिसाब से अच्छी हैं या नहीं।

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