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कंडक्टर भर्ती घोटाला: पूर्व आईएएस समेत पांच डीएम नपेंगे

Wed, 05 Jun 2019 10:33 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 05 Jun 2019 10:33 AM IST
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action will be taken against five dm including former ias in conductor bharti scam

हिमाचल में 2003 की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान हुए बहुचर्चित कंडक्टर भर्ती घोटाले में एक सेवानिवृत्त आईएएस समेत पांच डीएम एसआईटी के शिकंजे में फंस चुके हैं। इनके खिलाफ ठोस साक्ष्य एकत्रित कर लिए गए हैं।

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अब केवल इन अफसरों के हस्ताक्षरों के नमूनों की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आते ही एसआईटी चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में दाखिल करेगी। एसपी शिमला ओमापति जमवाल ने बताया कि छानबीन के दौरान भर्ती में अनियमितताएं सामने आई हैं। 
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24 अक्तूबर, 2003 को निदेशक मंडल की बैठक में कंडक्टरों के 300 पद भरने को मंजूरी दी गई। इनमें सामान्य वर्ग के 166, ओबीसी के 54, एससी के 66 और एसटी के 14 पद भरे जाने थे।
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इन पदों के लिए 17 हजार 890 आवेदन आए। 20 सितंबर, 2004 को 300 की जगह 365 पद भरे। 12 मई, 2005 को 13 और पद भर दिए गए। इसी बीच, भर्ती विवादों में आ गई।

कोर्ट के आदेश पर शिमला पुलिस ने 14 मार्च, 2017 को तत्कालीन एमडी, डीएम समेत पांच लोगों को आरोपी बनाकर सदर थाने में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद एसआईटी का गठन हुआ।

यह हैं आरोप 

 विज्ञापन 300 पदों का था, लेकिन चयन 378 का कर लिया। अकेले धर्मशाला डिवीजन से ही करीब 147 कंडक्टर चयनित किए गए। इनमें भी तत्कालीन परिवहन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र नगरोटा बगवां से 73 और रोहड़ू से 35 लोग चयन सूची में थे। भर्ती में डिवीजन स्तर पर मेरिट नहीं बनी। भर्ती दस्तावेजों में कटिंग और ओवर राइटिंग थी। 

आरोपी परिवहन निगम अधिकारी की अग्रिम जमानत पर मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव भारद्वाज की कोर्ट में सुनवाई हुई। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अग्रिम जमानत पर सुनवाई को 11 जून की तिथि मुकर्रर की। इसी सुनवाई में अदालत फैसला ले सकती है कि आरोपी अधिकारी को नियमित जमानत दी जाए या उसे गिरफ्तार किया जाए।

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