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गरीब बच्चों को दाखिला नहीं देने वाले कान्वेंट स्कूलों की आई शामत

Sat, 11 Feb 2017 08:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 11 Feb 2017 08:41 AM IST
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action against convent schools under right to education act

आर्थिक तौर पर कमजोर बच्चों को एडमिशन नहीं देने वाले कान्वेंट स्कूलों पर शिकंजा कसने वाला है। नए शैक्षणिक सत्र में निजी स्कूलों को दाखिला लेने वाले बच्चों का पूरा ब्योरा उच्च शिक्षा निदेशालय को देना होगा। आरटीई एक्ट का सख्ती से पालन करने को शिक्षा निदेशालय ने कमर कस ली है। 

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शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल बिंटा ने प्रदेश के सभी जिला उपनिदेशकों को निजी स्कूलों का विजिट करने के आदेश दिए हैं। राज्य के निजी स्कूलों की हर कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। सरकार ने इसकी गाइडलाइंस की अधिसूचना भी जारी की है। नए शैक्षणिक सत्र से निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश को सुनिश्चित करने के लिए निदेशालय सक्रिय हो गया है।
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हिमाचल सरकार ने आरटीई के तहत गाइडलाइंस अपनाने को मंजूरी दी है। यह व्यवस्था सरकार से किसी भी प्रकार की मदद नहीं लेने वाले निजी स्कूलों पर लागू होगी। ऐसे में हजारों निजी स्कूलों के लिए कुल दाखिल बच्चों में से समाज के कमजोर वर्गों के लिए 25 फीसदी दाखिला देना जरूरी हो गया है। यह दाखिला बीपीएल परिवारों से संबंधित या विकलांगता से युक्त बच्चों को देना होगा। एससी, एसटी परिवारों के बच्चों को भी प्राथमिकता देनी होगी। 
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मुफ्त मिलेगा प्रोस्पेक्टस
निशुल्क सीट के लिए आवेदन करने वाले अभिभावकों से निजी स्कूल किसी भी तरह का पंजीकरण शुल्क और प्रोस्पेक्टस शुल्क नहीं ले सकेंगे। स्कूलों को प्रवेश फार्म निशुल्क उपलब्ध करवाना होगा।

बच्चे बढ़े तो ड्रा से मिलेगी सीट
कोटे की सीटों के लिए आवेदन करने वाले बच्चों की संख्या यदि तय सीटों से अधिक बढ़ जाती है तो सीटों का बंटवारा ड्रा से होगा। अभिभावकों, एसएमसी और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि की मौजूदगी में ड्रा होगा। अगर सीटें कम पड़ जाती हैं तो अन्य श्रेणियों के बच्चों को मौका दिया जाएगा।


साथ लगते सरकारी स्कूल में 25 बच्चे जरूरी
निजी स्कूलों में तभी 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को सीटें उपलब्ध करवाई जाएंगी, अगर साथ लगते सरकारी स्कूल में बच्चों की संख्या 25 से अधिक होगी।

राज्य सरकार वहन करेगी फीस का खर्च
जो निजी स्कूल सरकार या स्थानीय प्रशासन की ग्रांट के सहयोग के बिना चल रहे हैं। ऐसे स्कूलों को हर छात्र को मुफ्त में पढ़ाने की फीस राज्य सरकार लौटाएगी। प्रारंभिक शिक्षा के उपनिदेशक अपने-अपने जिलों में इस राशि का भुगतान निजी स्कूलों को करेंगे।

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