नदी के बीचोंबीच फंसी गाड़ी, चार शव निकाले गए
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हिमाचल के पांगी में चंद्रभागा नदी से राहत व बचाव दल ने चार लाशें बरामद कर ली हैं। जबकि तीन लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है। इन तीनों के पानी के बहाव के साथ दूर बह जाने की संभावना जताई जा रही है। शनिवार को भाखड़ा बांध प्रबंधन के गोताखोरों ने सुबह करीब ग्यारह बजे ऑपरेशन शुरू किया था। चंद्रभागा नदी के बीचोंबीच पड़ी गाड़ी बाहर से नजर आ रही थी।
लेकिन यहां बहाव तेज होने की वजह से अनुभव के बगैर पहुंचना संभव नहीं था। करीब आधा दर्जन गोताखोर नदी में उतरे और गाड़ी तक पहुंचने में कामयाब रहे। जिन चार लोगों के शव बरामद हुए हैं वे सभी गाड़ी के आसपास ही फंसे हुए थे। बचाव दल ने चारों को बारी-बारी कर नदी से बाहर निकाल लिया। यह ऑपरेशन दोपहर बाद तक जारी रहा।
बरामद किए गए इन चार लोगों के शव
जिन लोगों के शव बरामद हुए हैं उनकी पहचान शिरिंग तोमा पुत्र ठाकुर लाल निवासी सेचू, विमला देवी पत्नी सांचा राम निवासी सेचू, भाग चंद पुत्र राजनाथ निवासी मूरछ व ज्ञान चंद पुत्र बुद्धि सिंह निवासी फिंडरू के रूप में हुई है। इसके अलावा एक महिला सरिता देवी पत्नी प्रताप चंद की लाश पहले ही बरामद हो चुकी है।
वहीं, सांचा राम पुत्र संपूर्ण चंद, उनका बेटा सुरेंद्र व खेम राज पुत्र सूरज राम निवासी मिंधल का अभी भी कोई पता नहीं लग पाया है। गौरतलब है कि 16 दिसंबर करीब ढाई बजे मिंधल माता मंदिर के दर्शनों से लौट रहे लोग हादसे का शिकार हो गए थे। यह सभी बोलेरो गाड़ी में सवार थे जो गहरी ढांक से चंद्रभागा नदी में जा गिरी थी।
हादसे के एक दिन बाद महिला का शव बरामद हुआ था। जबकि अन्य की तलाश के लिए प्रशासन ने गोताखोरों की मदद मांगी थी। शनिवार को गोताखोरों की मदद से चलाए गए ऑपरेशन में चार शव बरामद हुए हैं।
अब नहीं चलाया जाएगा ऑपरेशन
उधर, एसडीएम पांगी कर्म सिंह चौधरी का कहना है कि अब तक पांच लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। जबकि तीन का कोई अतापता नहीं लग पाया है। उन्होंने बताया कि नदी में लगातार अभियान चलाना संभव नहीं है। जो लोग लापता हैं उनके जिंदा होने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में लगातार अभियान चलाना बाकी लोगों की जान जोखिम में डालने वाला होगा।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे शव
वहीं, पांगी प्रशासन ने शनिवार को चार शव बरामद होने के बाद सभी प्रभावितों को दस-दस हजार रुपये की फौरी राहत वितरित कर दी है। जबकि पोस्टमार्टम के बाद शवों को परिजनों के हवाले कर दिया गया। परिजन लगातार 16 दिसंबर से चंद्रभागा नदी के तट पर अपनों के मिलने का इंतजार कर रहे थे।