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ये कैसा स्कूल: बिना छत का भवन, दो कमरों में पांच कक्षाएं

Fri, 30 Dec 2016 12:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 30 Dec 2016 12:06 PM IST
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A school without roof in Shimla

सरकार के बेहतर शिक्षा देने के दावों का सच देखना हो तो डुब्लु स्कूल आइए। कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र और मशोबरा विकास खंड की ग्राम पंचायत बलोग के डुब्लू प्राथमिक स्कूल में भवन के नाम पर बने महज दो कमरों में पांच पांच कक्षाएं चलाना शिक्षकों की मजबूरी है। मौसम साथ दे तो एक- दो कक्षाएं बरामदे में बिठा कर पढ़ानी पड़ती है, लेकिन बारिश और ठंड बढ़ जाने पर यह भी संभव नहीं हो पाता है।

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ऐसे में शिक्षकों को स्कूल के इन्हीं दो कमरों में पांच पांच कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। स्कूल के पुराने भवन की जर्जर हालत होने से इसमें कक्षाएं बिठाना संभव नहीं है। इसमें कमरे चार हैं, मगर इसमें दीवारों में दरारें और छत से पानी टपकता है। करीब दो वर्ष पूर्व स्कूल के
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बने दो कमरों के ऊपर पंचायत से आए बजट से एक अतिरिक्त हाल जरूर बना, मगर इसकी छत आज तक नहीं लग पाई। बजट न मिलने के कारण इसकी सिर्फ दीवारें ही खड़ी हैं, जिससे बारिश में इस हाल में पानी भर जाने पर लेंटर से नीचे के दो कमरों में रिसाव शुरू हो जाता है।

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आश्वासन देकर चले जाते हैं अधिकारी

A school without roof in Shimla

स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावकों के साथ जनप्रतिनिधि स्कूल की छत लगाने को बजट की मांग विभाग, पंचायती राज विभाग और प्रशासन से उठाते आए हैं। स्कूल में मौजूदा समय में 65 छात्र छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन छात्रों और स्कूल के स्टाफ को इन्हीं दो कमरों और एक बरामदे में कक्षाएं पढ़ाने, मिड डे मील पकाने, परोसने के साथ स्टाफ रूम में यहीं चलाना पड़ रहा है। 

बलोग पंचायत प्रधान रचना राणा और उप प्रधान पूर्ण दत्त कश्यप का कहना है कि स्कूल के पास सिर्फ एक हाल है, जिसके दो हिस्से कर कमरे बनाने पड़े हैं। कक्षाएं इन्हीं में और बाहर बरामदे में लगानी पड़ रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारी आते जरूर हैं, मगर आश्वासन देने के बाद चले जाते हैं। 

एसएसए से नहीं मिल पा रहा छत के लिए बजट

A school without roof in Shimla

स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष संधीर कुमार काकु राम शर्मा सीता, कमला, सीमा, ममता, सेवक राम, संजय राणा का कहना है कि स्कूल के बने सीआरसी भवन के दो कमरों में स्कूल चल रहा है। इसके ऊपर हाल की दीवारें, दरवाजे और खिड़कियां बनी हैं, मगर छत नहीं लग पाई है।

यदि छत लग जाए तो स्कूल में छात्रों को बिठाने के लिए स्थायी हल हो जाएगा। मांग की है कि पुराने भवन को गिराने की प्रक्रिया पूरी कर शिक्षा विभाग स्कूल भवन को बजट दे कर नए भवन का निर्माण करवाया जाए। शिक्षा विभाग के बीआरसी लोकेंद्र नेगी का कहना

है कि सीआरसी भवन जिसमें स्कूल चल रहा है, उसकी ऊपरी मंजिला पंचायत के फंड से बनी है, इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान से पैसा रिलीज नहीं हो पाएगा। एसएसए सिर्फ नए भवन के लिए बजट देता है। जिसके लिए स्कूल के पुराने भवन को गिरवाने की प्रक्रिया लोनिवि पूरी करता है। उसके बाद ही बजट मुहैया करवाया जा सकेगा। 

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