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एक साल से जेब से भर रहे रात्रि ठहराव का खर्चा
Updated Mon, 09 Jul 2018 11:40 AM IST
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..जनाब पिछले एक साल से रात्रि ठहराव का खर्चा जेब से उठाना पड़ रहा है। पहले नाइट में ठहरने के 40 रुपये लगते थे, अब डेढ़ सौ रुपये तक लग जाते हैं। जो सैलरी मिलती है, वह रात्रि ठहराव में खर्च हो जाती है। एक साल से न नाइट मिली है और न ओवर टाइम।
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महंगाई में परिवार पालना मुश्किल हो गया है। रविवार को तारादेवी कार्यशाला में आयोजित एचआरटीसी आप्रेशनल स्टॉफ एवं चालक-परिचालक संगठन की बैठक में कुछ इस तरह चालक-परिचालकों के दिल का दर्द छलक आया। कर्मचारियों ने बताया कि एक साल से चालक और परिचालकों को भत्ते नहीं मिले हैं।
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बैठक में कर्मचारियों को पेश आ रही समस्याओं पर चर्चा की गई। संगठन के राज्य महासचिव हरिलाल ठाकुर ने बताया कि 17 फीसदी अंतरिम राहत और तीन फीसदी महंगाई भत्ते का भुगतान भी लंबित है।
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इससे कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने निगम प्रबंधन से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में कर्मचारियों के देय भत्ते जारी करने का फैसला लेने की मांग उठाई। इस अवसर पर लोकल यूनिट के महासचिव हाकम सिंह ठाकुर भी मौजूद रहे।
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में निगम कर्मियों को उनके लंबित भत्ते जारी करने का फैसला लिया जाना चाहिए। एक साल से कर्मियों को नाइट और ओवरटाइम का भुगतान नहीं हुआ है। अंतरिम राहत और महंगाई भत्ता भी तुरंत जारी किया जाना चाहिए। - देवराज ठाकु़र, प्रांतीय प्रधान
चालक-परिचालक संगठन ने एचआरटीसी प्रबंधन से हर महीने की 22 तारीख को रात्रि भत्ता और ओवर टाइम कर्मचारियों के खाते में डालने की मांग उठाई है। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि हर महीने पूर्व निर्धारित दिन पर कर्मचारियों को भत्ते मिलने से उन्हें पेश आ रही समस्या हल होगी और निगम पर भी एकमुश्त भारी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।