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भर्ती बच्चों को दे दिया कीड़ों वाला दूध
Updated Sat, 10 Jun 2017 12:11 AM IST
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धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला के चिल्ड्रल वार्ड में बच्चों को दिए गए दूध में कीड़े पाए जाने की बात सामने आई है। नाम न छापने की शर्त पर अभिभावकों ने बताया कि इसकी शिकायत उन्होंने अस्पताल प्रशासन से की है।
मामला सामने आने पर अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों को दिए जाने वाले दूध की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। उपचाराधीन बच्चों और तीमारदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें जो खाना मुहैया करवा जा रहा, वह भी गुणवत्ताविहीन है। वीरवार को उन्हें दिए गए दूध में कीड़े पाए गए। दूूध बहुत पतला था। उसका रंग भी देखने में अजीब लग रहा था। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से भी शिकायत की है। साथ ही दूध और खाने के सैंपल भी अस्पताल प्रशासन को दिए हैं। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन ने मेस संचालक को बुलाकर पूछताछ की है।
उपचाराधीन मरीजों और तीमारदारों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में उन्हें मिल रहा खाना गुणवत्ता विहीन है। दावा किया कि चावलों को बिना धोये पकाया जा रहा है। मूंग की दाल के स्थान पर उन्हें मसूर की दाल दी जा रही है। आलू और गोभी की सब्जी के अलावा दूसरी कोई सब्जी नहीं दी जा रही।
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पहले मैट्रन चेक करती हैं खाने की गुणवत्ता
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में मेस संचालित कर रहे संतोष ने बताया कि उन्हें किसी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। मरीजों को खाना बांटने से पहले अस्पताल में तैनात मैट्रन खाने की गुणवत्ता को परखती हैं। उसके बाद ही खाना मरीजों में बांटा जाता है। इस प्रकरण की जिम्मेदारी खुद पर न लेते हुए उन्होंने बताया कि मेस में एक नया लड़का रखा गया है। उसने ही शायद पुराने दूध को मरीजों में वितरित कर दिया था, जो फट गया था। इसके बारे में उन्होंने अस्पताल में तैनात चिकित्सक को भी बताया था।
कोट
-----
-मेस संचालित कर रहे ठेकेदार का टेंडर खत्म हो चुका है। इसके लिए शिमला में नए टेंडर हो रहे हैं। हो सकता है कि ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह से न निभा पा रहा हो। इस संबंध में शिकायत आई है। - डॉ. दिनेश महाजन, एमएस, धर्मशाला
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मामला सामने आने पर अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों को दिए जाने वाले दूध की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। उपचाराधीन बच्चों और तीमारदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें जो खाना मुहैया करवा जा रहा, वह भी गुणवत्ताविहीन है। वीरवार को उन्हें दिए गए दूध में कीड़े पाए गए। दूूध बहुत पतला था। उसका रंग भी देखने में अजीब लग रहा था। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से भी शिकायत की है। साथ ही दूध और खाने के सैंपल भी अस्पताल प्रशासन को दिए हैं। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन ने मेस संचालक को बुलाकर पूछताछ की है।
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उपचाराधीन मरीजों और तीमारदारों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में उन्हें मिल रहा खाना गुणवत्ता विहीन है। दावा किया कि चावलों को बिना धोये पकाया जा रहा है। मूंग की दाल के स्थान पर उन्हें मसूर की दाल दी जा रही है। आलू और गोभी की सब्जी के अलावा दूसरी कोई सब्जी नहीं दी जा रही।
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पहले मैट्रन चेक करती हैं खाने की गुणवत्ता
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में मेस संचालित कर रहे संतोष ने बताया कि उन्हें किसी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। मरीजों को खाना बांटने से पहले अस्पताल में तैनात मैट्रन खाने की गुणवत्ता को परखती हैं। उसके बाद ही खाना मरीजों में बांटा जाता है। इस प्रकरण की जिम्मेदारी खुद पर न लेते हुए उन्होंने बताया कि मेस में एक नया लड़का रखा गया है। उसने ही शायद पुराने दूध को मरीजों में वितरित कर दिया था, जो फट गया था। इसके बारे में उन्होंने अस्पताल में तैनात चिकित्सक को भी बताया था।
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-मेस संचालित कर रहे ठेकेदार का टेंडर खत्म हो चुका है। इसके लिए शिमला में नए टेंडर हो रहे हैं। हो सकता है कि ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह से न निभा पा रहा हो। इस संबंध में शिकायत आई है। - डॉ. दिनेश महाजन, एमएस, धर्मशाला