डाक्टरों को रास नहीं आ रही अनुबंध की नौकरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश में अनुबंध के आधार पर नौकरी करना डाक्टरों को रास नहीं आ रहा है। एक अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2014 के बीच राज्य के 54 एमबीबीएस डाक्टर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को अलविदा कह चुके हैं।
सरकाघाट के भाजपा विधायक इंद्र सिंह की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने लिखित में यह जवाब दिया है।
मंत्री की ओर से बताया गया कि उक्त अवधि के दौरान 16 विशेषज्ञ और 236 एमबीबीएस डाक्टरों की नियुक्तियां की गई है।
इनमें से कोई भी विशेषज्ञ डाक्टर नौकरी छोड़कर नहीं गया है, जबकि अनुबंध के आधार पर तैनात किए गए 54 एमबीबीएस डाक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं।
सदन में सरकार ने दिया लिखित जवाब
डाक्टरों का पलायन रोकने के लिए सरकार ने क्या नीति बनाई है, इस सवाल का मंत्री की ओर से जवाब दिया गया कि चिकित्सकों की दो, तीन, चार और पांच साल की सेवाएं पूरी होने पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
उच्च शिक्षा भत्ता देने की नीति बनाई गई है। यह शर्त रखी गई है कि पीजी डिग्री या डिप्लोमा करने वाले डाक्टरों को कम से कम पांच साल की सेवा प्रदेश में देनी अनिवार्य की गई है।
ऐसा न करने की स्थिति में उन्हें 25 लाख रुपये सरकार को लौटाने पड़ेंगे। पीजी करने वाले डाक्टरों से सरकार के खजाने में 40 लाख रुपये जमा करवाने का बांड भरवाया जाता है।