जीएसटी लागू होने के बाद आधा हुआ प्रदेश का राजस्व, केंद्र को लिखा पत्र
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देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद हिमाचल को इसका फायदा नहीं, बल्कि नुकसान ही हुआ है। जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश का राजस्व तय लक्ष्य से करीब 46 फीसदी कम हो गया। हिमाचल उपभोक्ता प्रधान प्रदेश है, जिस वजह से राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन, नतीजे इसके उलट रहे। राजस्व घाटे के बाद अब प्रदेश सरकार ने केंद्र से नुकसान की भरपाई की मांग उठाई है।
पिछले साल देशभर में एक देश एक टैक्स की अवधारणा के तहत केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने विभिन्न टैक्स खत्म कर जीएसटी लागू कर दिया। दावा था कि देश के लोगों को एक ही चीज के लिए कई तरह के टैक्स देने से छुटकारा मिलेगा और चीजें सस्ती होंगी। इसके अलावा यह भी कहा गया कि राज्यों के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। खासकर उन प्रदेशों की जहां उपभोक्ता ज्यादा हैं।
जीएसटी में है घाटा पूरा करने का प्रावधान
उपभोक्ता राज्य होने के बावजूद हिमाचल का राजस्व अर्जन आधार वर्ष 2015 के अनुपात में मार्च 2018 तक करीब 46 फीसदी कम रह गया। सरकार ने दावा किया कि इसके पीछे जीएसटी की खामियां वजह रही हैं। इनमें अपडेट न होने से लेकर कर अधिकारियों को जांच करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी लेने जैसी कई वजहें हैं।
इन्हीं कमियों को दूर करने की मांग के साथ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर लक्षित टैक्स में कम अर्जन की वजह से हुए 46 फीसदी टैक्स गैप की भरपाई करने की मांग की है।
जीएसटी लागू होने के दौरान केंद्र ने आश्वस्त किया था कि अगर तय लक्ष्य से कम टैक्स अर्जित होता है तो अगले कुछ साल तक लक्षित टैक्स और अर्जित टैक्स के बीच के 14 फीसदी टैक्स गैप को केंद्र पूरा करेगा।
प्रधान सचिव जेसी शर्मा ने बताया कि मार्च 2018 तक टैक्स में गैप करीब 46.70 फीसदी था, जो जून 2018 में घटकर 36 फीसदी हो गया है। हालांकि, अभी भी कुछ दिक्कतों की वजह से यह गैप बना हुआ है। इसे दूर करने के लिए केंद्र को मुख्यमंत्री की ओर से पत्र लिखा गया है।