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गर्भवती के लिए घातक है स्क्रब टायफस
Updated Wed, 08 Nov 2017 11:14 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। गर्भवती महिलाओं के लिए स्क्रब टायफस एक खतरनाक बीमारी है। समय पर सावधानी न बरतने पर इस बीमारी की चपेट में आने से गर्भवती महिला और पेट में पल रहे बच्चे तक की मौत भी हो जाती है। केएनएच अस्पताल में हाईग्रेड फीवर की चपेट में आने के बाद रोजाना औसतन आठ से दस महिलाएं मरीज अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रही हैं। महिला रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बिशन धीमान ने बताया कि इस तरह की बीमारी की चपेट में आने के बाद महिला मरीजों का डॉक्टरों की निगरानी में काफी सावधानी बरत कर इलाज करना होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात और सर्दियों के मौसम में इस तरह की बीमारी की जद में महिलाएं बड़ी तेजी से आती हैं। इससे किडनी, हार्ट और लीवर पर भी असर पड़ता है। इस दौरान महिला की इम्यूनिटी सिस्टम भी काफी कम हो जाती है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस दौरान महिलाएं हरी घास में नहीं जाएं। इसके अलावा अगर मरीज तेज बुखार जैसी बीमारी की चपेट में आता है तो उसे एंजीथ्रोमाइसिन, और डॉक्सीसाइक्लेन जैसी दवाएं चिकित्सक देते हैं।
अगर प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्क्रब टायफस की चपेट में आती है तो महिला के साथ पेट में बच्चे को भी इसका असर पड़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी गंभीर होने पर पेट में बच्चे की मौत तक हो सकती है।
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गर्भवती महिला की हो चुकी है मौत
आईजीएमसी में एक गर्भवती महिला की गत माह स्क्रब टायफस की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। यह महिला अस्पताल में बीमारी की चपेट में आने से कई दिनों से दाखिल थी, लेकिन उपचार के दौरान इसकी मौत हो गई है।
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शिमला। गर्भवती महिलाओं के लिए स्क्रब टायफस एक खतरनाक बीमारी है। समय पर सावधानी न बरतने पर इस बीमारी की चपेट में आने से गर्भवती महिला और पेट में पल रहे बच्चे तक की मौत भी हो जाती है। केएनएच अस्पताल में हाईग्रेड फीवर की चपेट में आने के बाद रोजाना औसतन आठ से दस महिलाएं मरीज अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रही हैं। महिला रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बिशन धीमान ने बताया कि इस तरह की बीमारी की चपेट में आने के बाद महिला मरीजों का डॉक्टरों की निगरानी में काफी सावधानी बरत कर इलाज करना होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात और सर्दियों के मौसम में इस तरह की बीमारी की जद में महिलाएं बड़ी तेजी से आती हैं। इससे किडनी, हार्ट और लीवर पर भी असर पड़ता है। इस दौरान महिला की इम्यूनिटी सिस्टम भी काफी कम हो जाती है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस दौरान महिलाएं हरी घास में नहीं जाएं। इसके अलावा अगर मरीज तेज बुखार जैसी बीमारी की चपेट में आता है तो उसे एंजीथ्रोमाइसिन, और डॉक्सीसाइक्लेन जैसी दवाएं चिकित्सक देते हैं।
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अगर प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्क्रब टायफस की चपेट में आती है तो महिला के साथ पेट में बच्चे को भी इसका असर पड़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी गंभीर होने पर पेट में बच्चे की मौत तक हो सकती है।
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गर्भवती महिला की हो चुकी है मौत
आईजीएमसी में एक गर्भवती महिला की गत माह स्क्रब टायफस की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। यह महिला अस्पताल में बीमारी की चपेट में आने से कई दिनों से दाखिल थी, लेकिन उपचार के दौरान इसकी मौत हो गई है।