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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   34 thousand quintal medicine will be produced in Ayurvedic pharmacy, budget of Rs 77 lakh released

Ayurvedic Pharmacy: आयुर्वेदिक फार्मेसी में 34 हजार क्विंटल औषधी का होगा उत्पादन, 77 लाख रुपये का बजट जारी

Sun, 14 May 2023 11:12 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, जोगिंद्रनगर (मंडी)
संवाद न्यूज एजेंसी, जोगिंद्रनगर (मंडी) Published by: Krishan Singh Updated Sun, 14 May 2023 11:12 AM IST
सार

राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी  कॉलेज जोगिंद्रनगर में आधुनिक मशीनरी और आधारभूत ढांचे में विस्तार होते ही औषधीय दवाइयों का उत्पादन दोगुना कर दिया है। इसके लिए अनुमानित 77 लाख का बजट जारी हुआ है। कच्चे माल की आपूर्ति भी शुरू हो गई है।

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34 thousand quintal medicine will be produced in Ayurvedic pharmacy, budget of Rs 77 lakh released
बीफार्मा आयुर्वेदिक महाविद्यालय जोगिंद्रनगर - फोटो : संवाद

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी कॉलेज जोगिंद्रनगर में आधुनिक मशीनरी और आधारभूत ढांचे में विस्तार होते ही औषधीय दवाइयों का उत्पादन दोगुना कर दिया है। इसके लिए अनुमानित 77 लाख का बजट जारी हुआ है। कच्चे माल की आपूर्ति भी शुरू हो गई है। इस बार 33,716.7 क्विंटल आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण का लक्ष्य फार्मेसी को मिला है। पिछले साल 18650 किलोग्राम औषधियों का निर्माण हुआ था। फार्मेसी के अधिकारियों के अनुसार इस बार भी जीएमटी के तहत (गुड मैन्युफेक्चर) दवाइयों के निर्माण के लिए अनुमानित 77 लाख के बजट को स्वीकृति मिल गई है।

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फार्मेसी की प्रभारी डॉ. नीलम ने बताया कि दस विभिन्न प्रकार की औषधीय दवाओं का निर्माण होगा। कोरोना काल में बढ़ते संक्रमण और दवा निर्माण में शत-प्रतिशत हाईजेन के उद्देश्य से केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेदिक पद्धति में प्रयोग होने वाली विस्तृत गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए पिछले साल 18,650 किलो औषधीय दवाओं के निर्माण में सफलता हासिल की है। ऐसे में इस बार दोगुना दवाओं के निर्माण में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि करीब दो करोड़ आयुर्वेदिक फार्मेसी के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ कर यहां जीएमटी के अनुरूप स्थापित मशीनरी पर करीब 50 लाख खर्च किए गए हैं।
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हाईजीन को पूरा ध्यान में रखते हुए औषधीय दवाइयों का निर्माण शुरू हुआ है। इसे प्रदेश की 1200 आयुर्वेदिक फार्मेसी में भेजा जाएगा। आयुर्वेदिक पद्धति से तैयार दवा और औषधीय काढ़ा देश भर में कोरोना संक्रमितों को बचाने में वरदान साबित हुआ है। डॉ. नीलम के अनुसार इस बार 34 हजार क्विंटल औषधियों का निर्माण किया जाएगा। इनमें अविपतिकर चूरन, 7314.200 किलोग्राम, सितोपलादी चूरन, 7332.700 किलोग्राम, त्रिफला चूरन, 7203.200 किलोग्राम, इसबगोल 1453.200, टंकण औषधी 3118.900, अर्जुन तवाक चूरन 3095.200, कंटकारी क्वात 11.700, वासा अवलेह 1367.200, डाईबैक्स टैब 802.700, गंधक शुद्ध 2017.700 किलोग्राम औषधियों के निर्धारित लक्ष्य पर कर्मचारियों ने कमर कस ली है।
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