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हॉस्टल कैसा होता है, आरकेएमवी से सीखे विवि प्रशासन
Updated Tue, 03 Oct 2017 11:12 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एक बड़े सरकारी शिक्षण संस्थान का छात्रावास कैसा होना चाहिए, इसकी व्यवस्था विवि प्रशासन को आरकेएमवी से सीखनी चाहिए। राजधानी के सबसे बड़े कन्या महाविद्यालय के 10 साल पहले बने छात्रावास की व्यवस्था काफी अच्छी है। तीन मंजिला भवन में कुल 33 कमरे हैं जिनमें 120 छात्राएं ठहरती हैं। हर कमरे में चार छात्राएं रहती हैं लेकिन इसके बावजूद गंदगी नहीं फैलती। परिसर की सफाई के लिए महिला कर्मचारी तैनात हैं जबकि हॉस्टल के भीतर की सफाई के लिए एक कर्मी तैनात है। गंदगी न फैले इसके लिए खुद छात्राएं सफाई का जिम्मा संभालती हैं। वार्डन डॉ. हिमालय नेगी ने बताया कि भवन की तीनों मंजिलों की सफाई व्यवस्था के लिए छात्राओं की तीन कमेटियां बनाई हैं। हर कमेटी अपने फ्लोर में सफाई और शौचालय की व्यवस्था देखती है। कोई दिक्कत हो तो तुरंत वार्डन को सूचित किया जाता है। शिकायत को समयसीमा के भीतर निपटाना सुनिश्चित किया जाता है। यही नहीं वार्डन रोज हर कमरे में जाकर खुद भी व्यवस्था चेक करती हैं।
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सुरक्षा भी चाक चौबंद, छात्राएं खुद भी कर रही पहल
हॉस्टल में सुरक्षा चाक चौबंद है। जगह जगह सीसीटीवी कैमरे से निगरानी रखी जाती है। गेट पर चौकीदार तैनात रहता है। मैस में खाने की गुणवत्ता जांचने के लिए बाकायदा छात्राओं की कमेटियां बनी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां की छात्राएं न सिर्फ खुद सफाई करती हैं बल्कि छात्रावास के बाहर एक छोटा गार्डन भी बनाया है। सभी छात्राएं बारी-बारी इसकी देखरेख करती है। हॉस्टलों के कमरों में अच्छे परदे लगे हैं। पढ़ने के लिए कमरों के भीतर टेबल कुर्सियों की सुविधा दी गई है। कॉलेज प्रिंसिपल नम्रता टिक्कू ने बताया कि प्रशासन हर समस्या को तुरंत दूर करने की कोशिश करता है। छात्राएं खुद भी हॉस्टल को साफ-सुथरा रखती हैं।
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राज्यपाल के दौरे ने खोली थी विवि छात्रावासों की पोल
शिमला। एचपी यूनिवर्सिटी के छात्रावासों की व्यवस्था की पोल राज्यपाल के औचक निरीक्षण में खुली थी। दौरे में छात्रावासों के भीतर कई खामियां पाई गई थी। कमरों में न तो सफाई होती है और न ही शौचालय दुरुस्त है। बिजली की तारें खुली लटकी पाई गई जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। साथ ही ज्यादातर कमरों में खिड़कियां टूटी हुई मिली थी। ऐसा नहीं कि छात्रों ने कभी इसकी शिकायत नहीं की। लेकिन प्रशासन इनपर पर्दा डालता रहा। आखिरकार अब राज्यपाल की फटकार के बाद इन छात्रावासों की हालत सुधारी जा रही है। बहरहाल ये व्यवस्था कब तक कायम रहती है, इसका तो पता नहीं लेकिन यदि विवि प्रशासन आरकेएमवी जैसे कॉलेजों में जाकर छात्रावासों की व्यवस्था देखे तो काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
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स्टोरी- सोनिया शर्मा
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शिमला। एक बड़े सरकारी शिक्षण संस्थान का छात्रावास कैसा होना चाहिए, इसकी व्यवस्था विवि प्रशासन को आरकेएमवी से सीखनी चाहिए। राजधानी के सबसे बड़े कन्या महाविद्यालय के 10 साल पहले बने छात्रावास की व्यवस्था काफी अच्छी है। तीन मंजिला भवन में कुल 33 कमरे हैं जिनमें 120 छात्राएं ठहरती हैं। हर कमरे में चार छात्राएं रहती हैं लेकिन इसके बावजूद गंदगी नहीं फैलती। परिसर की सफाई के लिए महिला कर्मचारी तैनात हैं जबकि हॉस्टल के भीतर की सफाई के लिए एक कर्मी तैनात है। गंदगी न फैले इसके लिए खुद छात्राएं सफाई का जिम्मा संभालती हैं। वार्डन डॉ. हिमालय नेगी ने बताया कि भवन की तीनों मंजिलों की सफाई व्यवस्था के लिए छात्राओं की तीन कमेटियां बनाई हैं। हर कमेटी अपने फ्लोर में सफाई और शौचालय की व्यवस्था देखती है। कोई दिक्कत हो तो तुरंत वार्डन को सूचित किया जाता है। शिकायत को समयसीमा के भीतर निपटाना सुनिश्चित किया जाता है। यही नहीं वार्डन रोज हर कमरे में जाकर खुद भी व्यवस्था चेक करती हैं।
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सुरक्षा भी चाक चौबंद, छात्राएं खुद भी कर रही पहल
हॉस्टल में सुरक्षा चाक चौबंद है। जगह जगह सीसीटीवी कैमरे से निगरानी रखी जाती है। गेट पर चौकीदार तैनात रहता है। मैस में खाने की गुणवत्ता जांचने के लिए बाकायदा छात्राओं की कमेटियां बनी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां की छात्राएं न सिर्फ खुद सफाई करती हैं बल्कि छात्रावास के बाहर एक छोटा गार्डन भी बनाया है। सभी छात्राएं बारी-बारी इसकी देखरेख करती है। हॉस्टलों के कमरों में अच्छे परदे लगे हैं। पढ़ने के लिए कमरों के भीतर टेबल कुर्सियों की सुविधा दी गई है। कॉलेज प्रिंसिपल नम्रता टिक्कू ने बताया कि प्रशासन हर समस्या को तुरंत दूर करने की कोशिश करता है। छात्राएं खुद भी हॉस्टल को साफ-सुथरा रखती हैं।
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राज्यपाल के दौरे ने खोली थी विवि छात्रावासों की पोल
शिमला। एचपी यूनिवर्सिटी के छात्रावासों की व्यवस्था की पोल राज्यपाल के औचक निरीक्षण में खुली थी। दौरे में छात्रावासों के भीतर कई खामियां पाई गई थी। कमरों में न तो सफाई होती है और न ही शौचालय दुरुस्त है। बिजली की तारें खुली लटकी पाई गई जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। साथ ही ज्यादातर कमरों में खिड़कियां टूटी हुई मिली थी। ऐसा नहीं कि छात्रों ने कभी इसकी शिकायत नहीं की। लेकिन प्रशासन इनपर पर्दा डालता रहा। आखिरकार अब राज्यपाल की फटकार के बाद इन छात्रावासों की हालत सुधारी जा रही है। बहरहाल ये व्यवस्था कब तक कायम रहती है, इसका तो पता नहीं लेकिन यदि विवि प्रशासन आरकेएमवी जैसे कॉलेजों में जाकर छात्रावासों की व्यवस्था देखे तो काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
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स्टोरी- सोनिया शर्मा