Mandi: 64 लाख की ठगी मामले में 22 लाख रुपये कराए रिफंड
मामले में साइबर पुलिस ने रिफंड की प्रकिया को तेज कर 400 खातों को फ्रीज करवा दिया है। खातों के लिंक हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में मिल रहे हैं।
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साइबर ठगी कर दो माह पहले मंडी जिले में एक व्यक्ति से ठगे 64 लाख रुपये में से 22 लाख रुपये रिफंड हो गए हैं। मामले में साइबर पुलिस ने रिफंड की प्रकिया को तेज कर 400 खातों को फ्रीज करवा दिया है। खातों के लिंक हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में मिल रहे हैं। साइबर पुलिस ने 15 लाख रिफंड करवाए। इससे पहले 7 लाख रुपये रिफंड किए थे। मामले में साइबर पुलिस अन्य ट्रांजेक्शनों का रिकॉर्ड भी खगालने में जुटी है। उक्त व्यक्ति ने दो माह पहले ठगी की शिकायत साइबर थाना मंडी में की थी। एक अन्य मामले में मंडी जिले में सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता से 20 लाख की ठगी करने के मामले में साइबर पुलिस ने पौने 6 लाख फ्रीज कर लिए हैं जबकि खातों को फ्रीज करवा दिया है।
वहीं, एक अन्य मामले में साइबर पुलिस ने कुल्लू के एक सेवानिवृत्त अधिकारी से 36.50 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में रिफंड की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। आरोपियों ने चेन के माध्यम से लगभग 18 खातों में धनराशि पहुंचाई। साइबर पुलिस अब ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड जुटाने में जुटी है। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन मध्य जोन मंडी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनमोहन सिंह ने बताया कि पुलिस थाना में दर्ज ठगी के मामलों में नियमानुसार जांच की जा रही है।
यहां करें शिकायत ः ट्रेडिंग के लिए अधिकृत एप का उपयोग करें और इस तरह के झांसे में न आएं। यह आपको आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। यदि फिर भी कोई व्यक्ति इस तरह के साइबर क्राइम का शिकार हो चुका है तो वह तुरंत साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930 या साइबर क्राइम पुलिस थाना मंडी के लैंडलाइन नंबर 01905-226900 पर संपर्क करें और अपनी शिकायत दर्ज करवाए।
इस तरह फंस रहे लोग
साइबर ठगों का शिकार हुए लोगों का आरोप है कि उन्होंने फेसबुक पर ट्रेडिंग का विज्ञापन देखा। जब क्लिक किया तो वह फर्जी व्हाट्सएप ट्रेडिंग ग्रुप से जुड़ गए। ग्रुप में शेयर खरीदने और आईपीओ लेने बारे में जानकारी दी जा रही थी। कई अन्य लोग भी जुड़े थे। उन्होंने सस्ते दामों पर शेयर खरीदने और आईपीओ खरीदने के लिए उकसाया। पैसे लगाने के बाद ठग फर्जी एप बनाकर दे रहे हैं। उसमें भुगतान की राशि और फर्जी लाभ दिखा रहे हैं। जब उक्त राशि को निकालना चाह रहे हैं तब ठगी का अहसास हो रहा है। वहीं, डिजिटल अरेस्ट करवाकर भी लोगों को ठगा जा रहा है। डिजिटल अरेस्ट में किसी शख्स को ऑनलाइन माध्यम से डराया जाता है कि वह सरकारी एजेंसी के माध्यम से अरेस्ट हो गया है, उसे पेनल्टी या जुर्माना देना होगा।