{"_id":"5c7abeddbdec22270f4fdf6d","slug":"21551548125-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्र अभिभावक मंच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्र अभिभावक मंच
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छात्र अभिभावक मंच आज
निदेशालय में करेगा प्रदर्शन
निजी स्कूलों के खिलाफ तीसरे चरण के आंदोलन का एलान
उच्चतर शिक्षा निदेशक सौंपा जाएगा 24 सूत्रीय मांगपत्र
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। निजी स्कूलों की मनमानी और तथाकथित लूट के खिलाफ आंदोलनरत छात्र-अभिभावक मंच अपने तीसरे चरण के आंदोलन के तहत बुधवार को शिक्षा निदेशालय परिसर में प्रदर्शन करेगा। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा की अगुवाई में होने वाले इस प्रदर्शन के दौरान मंच के पदाधिकारी उच्चतर शिक्षा निदेशक से मुलाकात कर 24 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा जाएगा। इसमें मुख्य रूप से शिक्षा निदेशक से निजी स्कूलों को जारी किए आदेशों को सख्ती से लागू करवाने और हर हाल में निजी स्कूलों की फीस कम करने तथा शुल्कों को लेकर की जान रही मनमानी पर रोक लगाने की मांग की जाएगी। हर स्कूल में पीटीए का गठन, स्कूल और छात्रों से संबंधित बड़ा फैसला लेने में पीटीए की सहमति की शर्त को सख्ती से लागू करने की मांग भी इसमें शामिल रहेगी। संयोजक विजेेंद्र ने कहा कि विभाग अपनी ही जारी की अधिसूचनाओं को लागू करवाने में नाकाम रहा है।
स्कूलों में न तो फीस कम हुई
न ही पीटीए का किया गठन
शिक्षा महकमे के आदेशों को निजी स्कूलों का ठेंगा
अभिभावकों पर अब भी थोपे जा रहे हैं मनमाने फैसले
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। छात्र-अभिभावक मंच के प्रथम और द्वितीय चरण के आंदोलन के बाद शिक्षा विभाग ने काफी मुस्तैदी दिखाई लेकिन धरातल पर इसके परिणाम नजर नहीं आए। निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने को लेकर कई अधिसूचनाएं जारी की र्गइं थीं लेकिन इसमें से एक भी अमल नहीं किया गया। न तो स्कूलों में फीस कम हुई न ही अधिकतर स्कूलों ने पीटीए का गठन किया।
शिक्षा विभाग ने चार मई को 96 स्कूलों को बढ़ाई गई फीस लौटाने या अगली फीस की किस्त में समायोजित करने के आदेश जारी किए थे। इस पर एक भी स्कूल ने अब तक अमल नहीं किया है। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि यह सिर्फ 96 स्कूल ही मनमर्जी से फीस नहीं वसूल रहे बल्कि प्रदेश के सभी 2700 स्कूलों में फीसें वसूलने में मनमानी की जा रही है। इन 2700 स्कूलों में पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन छात्रों के साथ दो-दो अभिभावक भी जोड़ दें तो यह सीधे तौर पर मामला 15 लाख लोगों से जुड़ा है। इसलिए चार मई की यह अधिसूचना सभी स्कूलों को जारी कर इसे सख्ती से लागू करवाएं।
विज्ञापन
अब तक सिर्फ खानापूर्ति ही हुई
मंच का आरोप है कि निजी स्कूलों की फीस को तर्कसंगत बनाने को लेेकर अब तक शिक्षा विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। मंच को यह मंजूर नहीं होगा। 96 स्कूलों ने शिक्षा विभाग से एक माह का समय मांगा है जिससे जाहिर है कि यह निजी स्कूल मामले को लटका कर ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा विभाग मूक दर्शक बना हुआ है।
विज्ञापन
निदेशालय में करेगा प्रदर्शन
निजी स्कूलों के खिलाफ तीसरे चरण के आंदोलन का एलान
उच्चतर शिक्षा निदेशक सौंपा जाएगा 24 सूत्रीय मांगपत्र
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। निजी स्कूलों की मनमानी और तथाकथित लूट के खिलाफ आंदोलनरत छात्र-अभिभावक मंच अपने तीसरे चरण के आंदोलन के तहत बुधवार को शिक्षा निदेशालय परिसर में प्रदर्शन करेगा। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा की अगुवाई में होने वाले इस प्रदर्शन के दौरान मंच के पदाधिकारी उच्चतर शिक्षा निदेशक से मुलाकात कर 24 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा जाएगा। इसमें मुख्य रूप से शिक्षा निदेशक से निजी स्कूलों को जारी किए आदेशों को सख्ती से लागू करवाने और हर हाल में निजी स्कूलों की फीस कम करने तथा शुल्कों को लेकर की जान रही मनमानी पर रोक लगाने की मांग की जाएगी। हर स्कूल में पीटीए का गठन, स्कूल और छात्रों से संबंधित बड़ा फैसला लेने में पीटीए की सहमति की शर्त को सख्ती से लागू करने की मांग भी इसमें शामिल रहेगी। संयोजक विजेेंद्र ने कहा कि विभाग अपनी ही जारी की अधिसूचनाओं को लागू करवाने में नाकाम रहा है।
स्कूलों में न तो फीस कम हुई
न ही पीटीए का किया गठन
शिक्षा महकमे के आदेशों को निजी स्कूलों का ठेंगा
अभिभावकों पर अब भी थोपे जा रहे हैं मनमाने फैसले
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। छात्र-अभिभावक मंच के प्रथम और द्वितीय चरण के आंदोलन के बाद शिक्षा विभाग ने काफी मुस्तैदी दिखाई लेकिन धरातल पर इसके परिणाम नजर नहीं आए। निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने को लेकर कई अधिसूचनाएं जारी की र्गइं थीं लेकिन इसमें से एक भी अमल नहीं किया गया। न तो स्कूलों में फीस कम हुई न ही अधिकतर स्कूलों ने पीटीए का गठन किया।
विज्ञापन
शिक्षा विभाग ने चार मई को 96 स्कूलों को बढ़ाई गई फीस लौटाने या अगली फीस की किस्त में समायोजित करने के आदेश जारी किए थे। इस पर एक भी स्कूल ने अब तक अमल नहीं किया है। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि यह सिर्फ 96 स्कूल ही मनमर्जी से फीस नहीं वसूल रहे बल्कि प्रदेश के सभी 2700 स्कूलों में फीसें वसूलने में मनमानी की जा रही है। इन 2700 स्कूलों में पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन छात्रों के साथ दो-दो अभिभावक भी जोड़ दें तो यह सीधे तौर पर मामला 15 लाख लोगों से जुड़ा है। इसलिए चार मई की यह अधिसूचना सभी स्कूलों को जारी कर इसे सख्ती से लागू करवाएं।
विज्ञापन
अब तक सिर्फ खानापूर्ति ही हुई
मंच का आरोप है कि निजी स्कूलों की फीस को तर्कसंगत बनाने को लेेकर अब तक शिक्षा विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। मंच को यह मंजूर नहीं होगा। 96 स्कूलों ने शिक्षा विभाग से एक माह का समय मांगा है जिससे जाहिर है कि यह निजी स्कूल मामले को लटका कर ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा विभाग मूक दर्शक बना हुआ है।