फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   आरएसएस से जुड़ी जमीन पर व विाद

आरएसएस से जुड़ी संस्था को करोड़ों रुपये की जमीन देकर विवादों में फंसा एमसी

Fri, 03 Aug 2018 11:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 03 Aug 2018 11:08 AM IST
विज्ञापन
आरएसएस से जुड़ी जमीन पर व विाद

शहर के बीचोंबीच करोड़ों रुपये की जमीन चुपचाप आरएसएस से जुड़ी संस्था को देकर भाजपा शासित नगर निगम विवादों में फंस गया है। नेशनल हाइवे से सटी करीब 30 बीघा इस जमीन की वर्तमान कीमत 25 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं, निगम 34 में से 19 पार्षदों के विरोध के बावजूद इस जमीन को संस्था के हवाले करने जा रहा है। निगम प्रशासन का दावा है कि यह जमीन एमसी की नहीं है और निगम सिर्फ एनओसी दे रहा है।

विज्ञापन


इसके अलावा 29 जून की मासिक बैठक में इस प्रस्ताव को पारित भी किया जा चुका है। लेकिन 19 पार्षदों के लिखित विरोध के बाद निगम का यह दावा सवालों के घेरे में आ गया है। प्रस्ताव के विरोध में हस्ताक्षर करने वालों में 15 विपक्षी जबकि चार भाजपा के पार्षद हैं।
विज्ञापन


इनका कहना है कि ज्यादातर पार्षदों की सहमति न होने के बावजूद यह प्रस्ताव पारित कैसे हो गया। 29 जून के जिस सदन में यह प्रस्ताव पारित हुआ, उसमें एक भी विपक्षी पार्षद मौजूद नहीं था। सदन में जो भाजपा पार्षद थे, उनमें से भी कुछेक पार्षदों ने इस पर सहमति नहीं दी थी। सदन में मौजूद रहीं भाजपा पार्षद आरती चौहान का कहना है कि ऐसे किसी प्रस्ताव पर उन्होंने मंजूरी नहीं दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो महीने के भीतर ही संस्था को दे दी जमीन
संस्था को 22669.38 वर्ग मीटर जमीन टूटीकंडी वार्ड में दी जा रही है। निगम के अनुसार यह सरकारी जमीन है जो वर्तमान में चरागाह के तौर पर इस्तेमाल हो रही है। संस्था की ओर से इसी साल 30 अप्रैल को संस्थान की गतिविधियां चलाने के लिए इस जमीन को उपलब्ध करवाने के लिए आवेदन किया था।

निगम के संयुक्त आयुक्त की ओर से जमीन संबंधी एनओसी देने के प्रस्ताव को जीएफसी की बैठक में रखा गया। यहां ज्यादातर पार्षदों को प्रस्ताव की जानकारी नहीं थी। ऐसे में इसे पारित कर दिया गया। 29 जून को मासिक बैठक में ज्यादातर पार्षद सदन में नहीं थे। इसी बीच निगम ने चुपचाप यह प्रस्ताव पारित भी करवा लिया।

लीज पर जमीन पाने के लिए पहले यह एनओसी जरूरी थी। उधर, नगर निगम पार्षदों के पार्क और पार्किंग के प्रस्तावों को तो महीनों तक लटकाता है, लेकिन संस्था को दो महीने में एनओसी दे दी। पार्षद सवाल इसलिए भी उठा रहे हैं कि निगम खुद भी वन विभाग से इस जमीन की मांग कर पार्क के लिए इस्तेमाल कर सकता था।

संस्था को जमीन देने पर उठे सवाल
नाभा इस्टेट में भी एक और संस्था विवेकानंद केंद्र को 257 वर्गमीटर जमीन देने पर विपक्षी पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय पार्षद सिमी नंदा के अनुसार इस जमीन को जनता के फायदे के लिए इस्तेमाल न कर निगम संस्था के हवाले कर रहा है।

सदन से दी गई है मंजूरी
इस प्रस्ताव को सदन ने मंजूरी दी है। यह एमसी की जमीन नहीं है। सिर्फ एनओसी के लिए हमारे पास आई थी। 19 पार्षदों का विरोध दर्ज कर लिया गया है। नगर निगम के एरिया में आने वाले क्षेत्र में जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर एमसी से एनओसी जरूरी होती है। - कुसुम सदरेट, नगर निगम महापौर


मामले की जांच करेंगे
यह प्रस्ताव जब पारित हुआ तब मैं सदन का हिस्सा नहीं था। अब संस्था को एनओसी देने के मामले में पार्षदों ने विरोध दर्ज करवाया है। कानूनी तौर पर इसका अध्ययन करेंगे कि सदन से पारित प्रस्ताव पर क्या किया जा सकता है। मामले की जांच होगी। - पंकज राय, नगर निगम आयुक्त

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed