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भवन नियमित करवाने को चुकानी पड़ सकती है डबल फीस
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:22 PM IST
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शिमला। शहर के हजारों भवन मालिकों को अपने मकान नियमित करवाने के लिए अब डबल फीस चुकानी पड़ सकती है। लोगों को अवैध निर्माण पर ग्रीन सेस के साथ नगर निगम की कंपाउंडिंग फीस भी जमा करवानी पड़ सकती है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अवैध निर्माण पर ग्रीन सेस वसूलने के आदेश दिए हैं लेकिन आदेशों में कहीं भी नगर निगम की पहले से वसूली जा रही कंपाउंडिंग फीस बंद करने का जिक्र नहीं है। आदेशों में एमसी एक्ट के नियमों को भी लागू रखा गया है। यानी नगर निगम ग्रीन सेस तो वसूलेगा ही, साथ ही पहले की तरह कंपाउंडिंग फीस भी वसूल सकता है। वहीं, अगर अब कंपाउंडिंग फीस खत्म करनी है तो पहले एक्ट में संशोधन करना होगा। हालांकि, निगम प्रशासन ने इसके बारे में पत्र लिखकर सरकार से भी स्पष्टीकरण मांगा है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि एनजीटी ने अवैध निर्माण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की एवज में ग्रीन सेस वसूलने के निर्देश दिए हैं। वहीं, कंपाउंडिंग फीस नगर निगम पहले से वसूलता रहा है। दोनों की शब्दावली भी अलग है। शहर में अभी हजारों भवन मालिक ऐसे हैं, जिनके भवन अवैध हैं। वहीं, कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने नक्शा पास करवाने के बाद भवन बनाए हैं और अब नियमितीकरण के लिए आवेदन करने जा रहे हैं।
क्या है कंपाउंडिंग फीस
दरअसल नक्शा पास करने के बावजूद भवन निर्माण में दस फीसदी तक डेविएशन (अंतर) आ सकता है। यह नगर निगम भी मानता है कि निर्माण के वक्त हल्की डेविएशन आती है। इसके लिए निगम 10 फीसदी डेविएशन की छूट भी देता है, लेकिन उसके बदले कंपाउंडिंग फीस वसूली जाती है।
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इतनी है ग्रीन सेस और कंपाउंडिंग फीस
एनजीटी के आदेशों के अनुसार अवैध निर्माण पर 5 हजार प्रति वर्ग फुट के हिसाब से ग्रीन सेस वसूला जाएगा। यह दर रिहायशी भवनों के लिए है। व्यावसायिक भवनों के लिए यह दर 10 हजार प्रति वर्ग फुट रखी गई है। वहीं, नगर निगम की कंपाउंडिंग फीस वर्तमान में करीब 1600 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। यदि दोनों शुल्क वसूले जाते हैं तो अवैध निर्माण करने वाले भवन मालिकों की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी।
सरकार की ओर से नहीं मिला जवाब
निगम प्रशासन ने एनजीटी के फैसले के कई बिंदुओं को स्पष्ट करने के लिए सरकार को पत्र लिखा है। लेकिन अभी सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। जिन लोगों ने नक्शे पास करवाए हैं, लेकिन काम शुरू नहीं किया है, उन्हें काम शुरू करने की अनुमति देनी है या नहीं, इस पर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। साथ ही लैंड यूज, पुराने भवनों के पुनर्निर्माण संबंधी मामलों पर भी जवाब आना बाकी है।
क्या कहते हैं आयुक्त
इसके बारे में कानूनी राय ली जा रही है। इसके अनुसार ही फीस वसूली पर निगम कोई फैसला लेगा।
जीसी नेगी, आयुक्त नगर निगम
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अवैध निर्माण पर ग्रीन सेस वसूलने के आदेश दिए हैं लेकिन आदेशों में कहीं भी नगर निगम की पहले से वसूली जा रही कंपाउंडिंग फीस बंद करने का जिक्र नहीं है। आदेशों में एमसी एक्ट के नियमों को भी लागू रखा गया है। यानी नगर निगम ग्रीन सेस तो वसूलेगा ही, साथ ही पहले की तरह कंपाउंडिंग फीस भी वसूल सकता है। वहीं, अगर अब कंपाउंडिंग फीस खत्म करनी है तो पहले एक्ट में संशोधन करना होगा। हालांकि, निगम प्रशासन ने इसके बारे में पत्र लिखकर सरकार से भी स्पष्टीकरण मांगा है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि एनजीटी ने अवैध निर्माण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की एवज में ग्रीन सेस वसूलने के निर्देश दिए हैं। वहीं, कंपाउंडिंग फीस नगर निगम पहले से वसूलता रहा है। दोनों की शब्दावली भी अलग है। शहर में अभी हजारों भवन मालिक ऐसे हैं, जिनके भवन अवैध हैं। वहीं, कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने नक्शा पास करवाने के बाद भवन बनाए हैं और अब नियमितीकरण के लिए आवेदन करने जा रहे हैं।
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क्या है कंपाउंडिंग फीस
दरअसल नक्शा पास करने के बावजूद भवन निर्माण में दस फीसदी तक डेविएशन (अंतर) आ सकता है। यह नगर निगम भी मानता है कि निर्माण के वक्त हल्की डेविएशन आती है। इसके लिए निगम 10 फीसदी डेविएशन की छूट भी देता है, लेकिन उसके बदले कंपाउंडिंग फीस वसूली जाती है।
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इतनी है ग्रीन सेस और कंपाउंडिंग फीस
एनजीटी के आदेशों के अनुसार अवैध निर्माण पर 5 हजार प्रति वर्ग फुट के हिसाब से ग्रीन सेस वसूला जाएगा। यह दर रिहायशी भवनों के लिए है। व्यावसायिक भवनों के लिए यह दर 10 हजार प्रति वर्ग फुट रखी गई है। वहीं, नगर निगम की कंपाउंडिंग फीस वर्तमान में करीब 1600 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। यदि दोनों शुल्क वसूले जाते हैं तो अवैध निर्माण करने वाले भवन मालिकों की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी।
सरकार की ओर से नहीं मिला जवाब
निगम प्रशासन ने एनजीटी के फैसले के कई बिंदुओं को स्पष्ट करने के लिए सरकार को पत्र लिखा है। लेकिन अभी सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। जिन लोगों ने नक्शे पास करवाए हैं, लेकिन काम शुरू नहीं किया है, उन्हें काम शुरू करने की अनुमति देनी है या नहीं, इस पर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। साथ ही लैंड यूज, पुराने भवनों के पुनर्निर्माण संबंधी मामलों पर भी जवाब आना बाकी है।
क्या कहते हैं आयुक्त
इसके बारे में कानूनी राय ली जा रही है। इसके अनुसार ही फीस वसूली पर निगम कोई फैसला लेगा।
जीसी नेगी, आयुक्त नगर निगम