फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   तेजी

तेजी

Sun, 13 Aug 2017 11:24 PM IST
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:24 PM IST
विज्ञापन
तेजी
कोटरोपी/पधर(मंडी)। इसे कुदरत का कहर के साथ साथ प्रशासन की बेपरवाही कहा जा सकता है। ग्रामीणेां की मानें तो शनिवार दोपहर से यह पहाड़ी दरकना शुरू हो गई थी। दरारें बढ़ रही थी। इसी तो देखते हुए पहाड़ी में रह रहे सात परिवारों ने अपने मकान शनिवार को ही खली कर दिए थे। अब प्रशभन उठता है कि अगर एनएच के ऊपर इस तरह से खतरा मंडरा रहा था तो क्या अफसराशही को इसकी भनक नहीं लगी। अगर समय पर इसकी भनक लग जाती तो ग्रामीणों की जिंदगी दांव पर नहीं लगती और इस बड़े हादसे में जानी नुकसान को बचाने की कोशिश हो सकती थी। हद तो यह है कि इन संवेदनशील प्वाइंटस पर गाड़ियों की आवाजाही की निगरानी और पहाड़ियों के दरकने के खतरे से सचेत करने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। राहत बचाव कार्य के दौरान कई खूब चर्चा का माहौल रहा। पंचायत प्रधान ऊरला रेखा देवी ने कहा कि कोटरोपी पहाड़ी पर रहने वालों में फूली राम, सीते राम, बुल राम, चौबे राम, लोगूू राम, जय चंद, ग्वाली सरवाला के मकान खाली करवा दिए गए थे। एनएच के नीचे की तरफ बाईं ओर तीन मकान पर भारी खतरा बना हुआ है। जिन्हें खाली करवा दिया गया है।
विज्ञापन




तो यहां हर बीस साल बाद मचती है तबाही
ग्रामीणों में वार्ड मेंबर नारायण सिंह ने किया दावा
1977 में दरका था पहाड़ पर नुकसान नहीं
1997 में फिर दरका था पहाड़ घरों को नुकसान
2017 में कहर बनकर टूटा पहाड़, गई जानें
अमर उजाला ब्यूरो
कोटरूपी (मंडी)। ...तो यहां हर बीस साल बाद मचती है तबाही। ग्रामीणों की मानें तो 20 हर बीस साल बाद यह नाला तबाही मचाता है। 1977 में यही पहाड़ीर दरकी थी। लेकिन जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। 1997 में भी यह पहाड़ी दरकी, लेकिन इससे कुछ घरों को नुकसान हुआ। दो दशाकों में यहां यातयात भी काफी बढ़ा। भारी आवाजाही के कारण यहां खतरा भी बढ़ा है। लेकिन 2017 में हुए इस हाइसे ने अब तक 34 जाने लील ली हैं। जबकि 13 के अब तक दबे होने की आशंका है। वार्ड मेंबर नारायण सिंह व रावण राम ने कहा कि हर बीस साल से यहां पहाड़ दरकता है। लेकिन जानी नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन 2017 में यह हादसा भयावह है। यह हादसा कभी ना भूलने वाली दहशत दे गया है।
विज्ञापन


साढ़े बाठ बजे शुरू हुई बारिश
पधर क्षेत्र में रात आठ बजे के करीब बारिश शुरू हो गई है। यदि यूं ही बारिश होती रही तो रेस्यकू आपरेशन में भारी दिक्कत हो सकती है। नाला दलदल में फिर से तबदील हो सकता है। वहीं मकानों पर खतरा भी बढ़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन





कोटरूपी हादसे ने छीनी जोगिंद्रनगर में जिमजिमा गांव की बेटी सुरूचिऱ्
रविवार देर सांय दुल गांव में हुआ सुरूचि का अंतिम संस्कार
कोटरोपी(मंडी)। पठानकोट-मंडी नैशनल हाईवे में शनिवार देर रात जोगिंद्रनगर के कोटरोपी गांव में पहाड़ी दरकने से हुए हृदय विदारक हादसे ने जोगिंद्रनगर में जिमजिमा गांव की बेटी सुरूचि ठाकुर व उसकी सहेली को छीन लिया है तथा सुरूचि के जीजा अभी लापता हैं। जोगिंद्रनगर के जिमजिमा गांव में ज्ञान चंद के घर जन्मी सुरूचि 4 बहनों में सबसे छोटी थी। चंडीगढ़ में एम.सी.ए में दाखिला करवाकर लौट रही सुरूचि,उसकी सहेली व सुरूचि के जीजा ने मंडी से 11 बजे जोगिंद्रनगर आने को मनाली-कटड़ा बस ली थी जो हादसे का शिकार हो गई। जोगिंद्रनगर के गरोडू गांव के रहने वाले सुरूचि के जीजा प्रेम कुमार सैंथल स्कूल में टी.जी.टी के पद पर तैनात थे। रविवार देर सांय जोगिंद्रनगर के दुल गांव में सुरूचि की बहन यामिनी ने उसकी चिता को मुखागिनी दी। सुरूचि के पिता एच.पी.एस.ई.बी में लाईनमैन के पद पर तैनात हैं। भगवान सुरूचि की आत्मा को शांति व परिवार को इस सदमे को सहने की हिम्मत दे व सभी मृतकों की आत्मा को शांति दे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed