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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   2.5 lakh people can become carriers of Thalassemia in Himachal, Revealed in the survey of Health Department

स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में खुलासा: हिमाचल में ढाई लाख लोग बन सकते हैं थैलेसीमिया के वाहक

Mon, 09 May 2022 10:36 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 09 May 2022 10:36 PM IST
सार

उमंग फाउंडेशन की ओर से करवाए गए वेबिनार में पद्मश्री डॉ. उमेश भारती ने बताया कि हिमाचल के 20 कॉलेजों में 2020 सैंपल लिए थे। इसमें यह बात सामने आई है। हिमाचल देश का पहला ऐसा राज्य बना है, जहां पर इस तरह का सर्वेक्षण हुआ है।

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2.5 lakh people can become carriers of Thalassemia in Himachal, Revealed in the survey of Health Department
थैलेसीमिया(सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हिमाचल में ढाई लाख लोग ऐसे हैं जो भविष्य में थैलेसीमिया रोग का कारण बन सकते हैं। इनके खून में पाए गए जींस से पैदा होने वाला बच्चा थैलेसीमिया से ग्रस्त हो सकता है। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की ओर से करवाए सर्वे में हुआ है। उमंग फाउंडेशन की ओर से करवाए गए वेबिनार में पद्मश्री डॉ. उमेश भारती ने बताया कि हिमाचल के 20 कॉलेजों में 2020 सैंपल लिए थे। इसमें यह बात सामने आई है। हिमाचल देश का पहला ऐसा राज्य बना है, जहां पर इस तरह का सर्वेक्षण हुआ है। इस बीमारी का पता निजी लैब में टेस्ट करवाकर किया जा सकता है। इस टेस्ट की कीमत 410 रुपये है। 

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उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया बच्चों को अपने माता-पिता से आनुवंशिक तौर पर मिलने वाला एक रक्त रोग है। रोग होने से शरीर में हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी शुरू हो जाती है। हालांकि इस बीमारी की पहचान जन्म के पांच से छह महीने में हो जाती है। ऐसे में विवाह पूर्व थैलेसीमिया की जांच करने से इस अनुवांशिक रक्त विकार रोग को फैलने से रोका जा सकता है। यह संक्रामक रोग नहीं है। इस बीमारी में बच्चा कमजोर हो जाता है और उसको समय-समय पर जिंदगी भर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा दवाइयां भी खानी पड़ती हैं। इस बीमारी का पक्का इलाज भी अभी नहीं है। बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और सिरमौर के लोगों में थैलेसीमिया के विकृत जींस पाए जाने की संभावना अधिक रहती है। 

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