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आईजीएमसी में नर्सों को बना दिया आहार विशेषज्ञ
Updated Tue, 02 Jan 2018 10:25 PM IST
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सुमित ठाकुर
शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों का डाइट चार्ट नर्सें बना रही हैं। आहार विशेषज्ञ के पांच पद तीन साल से खाली हैं।
आहार विशेषज्ञ का काम नर्सों के हवाले है। आईजीएमसी में नियमों को ताक पर रखकर स्वास्थ्य महकमा मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। इस पद के लिए बीएससी होम साइंस योग्यता है, लेकिन अभी यह काम नर्सें कर रही हैं।
अस्पताल में रोजाना औसतन 600 से 700 के मरीजों को खाना बनाया जाता है। इनमें से वर्ष भर विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए डाइट चार्ट भी आहार विशेषज्ञ की ओर से बनाया जाता है। मौजूदा समय में यह कार्य दो वार्ड सिस्टरों के हवाले है। बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्री के अस्पताल के दौरे के दौरान कुक और इस पद के खाली होने की बात कही गई थी।
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- विभागीय पक्ष -
क्या कहते है कॉलेज प्राचार्य
- आईजीएमसी कॉलेज के प्रो. अशोक शर्मा ने बताया कि आहार विशेषज्ञ संबंधी मामला सरकार को भेजा गया है। वह ही इस मामले पर कुछ करेंगी।
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कब क्या बनाया जाता है
अस्पताल में मरीजों को ब्रेकफास्ट के दौरान दूध, ब्रेड, अंडा और बटर दिया जाता है। दोपहर के खाने में आलू के साथ दूसरी सब्जी, दाल, चावल और चपाती दी जाती है। शाम में भी इसी तरह एक सब्जी और पांच चपातियां दी जाती हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों को खीर और जो दाल आदि न खा सकते हैं, उन्हें खिचड़ी दी जाती है।
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आहार विशेषज्ञ का काम
अस्पताल में वर्ष भर विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मरीज उपचार के लिए आते हैं। कैंसर, हार्ट, बीपी, डायबिटीज के मरीज भी दाखिल रहते हैं। इन्हें अलग-अलग तरह से डाइट दी जाती है। यह काम आहार विशेषज्ञ का होता है।
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कब से खाली चल रहा पद
अस्पताल में वर्ष 2015 से यह पद खाली चल रहे हैं। मौजूदा समय में आईजीएमसी में दो वार्ड सिस्टरों को यह काम सौंपा गया है।
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शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों का डाइट चार्ट नर्सें बना रही हैं। आहार विशेषज्ञ के पांच पद तीन साल से खाली हैं।
आहार विशेषज्ञ का काम नर्सों के हवाले है। आईजीएमसी में नियमों को ताक पर रखकर स्वास्थ्य महकमा मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। इस पद के लिए बीएससी होम साइंस योग्यता है, लेकिन अभी यह काम नर्सें कर रही हैं।
अस्पताल में रोजाना औसतन 600 से 700 के मरीजों को खाना बनाया जाता है। इनमें से वर्ष भर विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए डाइट चार्ट भी आहार विशेषज्ञ की ओर से बनाया जाता है। मौजूदा समय में यह कार्य दो वार्ड सिस्टरों के हवाले है। बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्री के अस्पताल के दौरे के दौरान कुक और इस पद के खाली होने की बात कही गई थी।
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- विभागीय पक्ष -
क्या कहते है कॉलेज प्राचार्य
- आईजीएमसी कॉलेज के प्रो. अशोक शर्मा ने बताया कि आहार विशेषज्ञ संबंधी मामला सरकार को भेजा गया है। वह ही इस मामले पर कुछ करेंगी।
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कब क्या बनाया जाता है
अस्पताल में मरीजों को ब्रेकफास्ट के दौरान दूध, ब्रेड, अंडा और बटर दिया जाता है। दोपहर के खाने में आलू के साथ दूसरी सब्जी, दाल, चावल और चपाती दी जाती है। शाम में भी इसी तरह एक सब्जी और पांच चपातियां दी जाती हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों को खीर और जो दाल आदि न खा सकते हैं, उन्हें खिचड़ी दी जाती है।
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आहार विशेषज्ञ का काम
अस्पताल में वर्ष भर विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मरीज उपचार के लिए आते हैं। कैंसर, हार्ट, बीपी, डायबिटीज के मरीज भी दाखिल रहते हैं। इन्हें अलग-अलग तरह से डाइट दी जाती है। यह काम आहार विशेषज्ञ का होता है।
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कब से खाली चल रहा पद
अस्पताल में वर्ष 2015 से यह पद खाली चल रहे हैं। मौजूदा समय में आईजीएमसी में दो वार्ड सिस्टरों को यह काम सौंपा गया है।