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डिफॉल्टरों के किरायेदारों से वसूली करेगा नगर निगम
Updated Mon, 14 May 2018 10:36 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भाजपा विधायक बलवीर वर्मा समेत शहर के छह बड़े टैक्स डिफॉल्टरों को संपत्ति कर न चुकाना अब महंगा पड़ने वाला है। नगर निगम इनके होटलों, दुकानों समेत व्यावसायिक संस्थानों से आने वाला सारा किराया लेकर टैक्स वसूली करने जा रहा है।
डिफॉल्टरों से टैक्स कैसे वसूला जाए। इस मामले को लेकर सोमवार को निगम आयुक्त रोहित जमवाल ने कर शाखा के अधिकारियों के साथ बैठक की। सचिव (कर) सुरेश शर्मा ने आयुक्त को बताया कि पांच बार नोटिस थमाने के बावजूद ये लोग टैक्स जमा करने नहीं पहुंच रहे हैं। शहर भर में इनकी करोड़ों की संपत्तियां हैं। इनमें कई नामी होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें चल रही हैं।
ऐसे में इनके किरायेदारों से किराया अटैच कर टैक्स का पैसा वसूला जा सकता है। आयुक्त ने इसे मंजूरी दे दी। अब इसकी सूचना देने के लिए सभी डिफॉल्टरों और इनके किरायेदारों को नोटिस दिया जाएगा। नोटिस मिलते ही किराये का पैसा निगम के खाते में जमा करना अनिवार्य होगा।
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निगम एक्ट लागू, होगी 3.88 करोड़ की वसूली
कुल 25 में से बड़े छह डिफॉल्टरों की संपत्तियों से मिलने वाले किराये से टैक्स वसूली की जाएगी। यानि इनके किरायेदार अब अपने मालिक को किराया न देकर सीधे निगम के खाते में पैसा जमा करवाएंगे। यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक टैक्स की राशि पूरी नहीं हो जाती। निगम ने अधिनियम 124(5) के तहत रेंट अटैचमेंट की यह कार्रवाई की है।
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19 डिफॉल्टरों की संपत्तियां रेड एंट्री के लिए भेजेंगे
निगम प्रशासन ने बाकी 19 डिफॉल्टरों की संपत्तियां एमसी एक्ट 124(1) में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री के लिए भेजने का फैसला लिया है। रेड एंट्री होने से डिफॉल्टर अपनी संपत्तियां नहीं बेच पाएंगे, साथ ही इन पर लोन भी नहीं ले पाएंगे। निगम भविष्य में इनकी संपत्तियां नीलाम कर टैक्स वसूली भी कर सकता है। इनमें शहर के कई नामी होटल शामिल हैं जिनका टैक्स आज तक नहीं भरा गया है।
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टैक्स न देने वालों पर कार्रवाई
टैक्स न चुकाने वाले छह बड़े डिफाल्टरों की संपत्तियों का किराया अटैच किया जा रहा है। बाकी 19 को रेड एंट्री के लिए भेजा जा रहा है। नोटिस के बावजूद टैक्स न जमा करवाने पर निगम को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी है।
रोहित जमवाल, नगर निगम आयुक्त
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शिमला। भाजपा विधायक बलवीर वर्मा समेत शहर के छह बड़े टैक्स डिफॉल्टरों को संपत्ति कर न चुकाना अब महंगा पड़ने वाला है। नगर निगम इनके होटलों, दुकानों समेत व्यावसायिक संस्थानों से आने वाला सारा किराया लेकर टैक्स वसूली करने जा रहा है।
डिफॉल्टरों से टैक्स कैसे वसूला जाए। इस मामले को लेकर सोमवार को निगम आयुक्त रोहित जमवाल ने कर शाखा के अधिकारियों के साथ बैठक की। सचिव (कर) सुरेश शर्मा ने आयुक्त को बताया कि पांच बार नोटिस थमाने के बावजूद ये लोग टैक्स जमा करने नहीं पहुंच रहे हैं। शहर भर में इनकी करोड़ों की संपत्तियां हैं। इनमें कई नामी होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें चल रही हैं।
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ऐसे में इनके किरायेदारों से किराया अटैच कर टैक्स का पैसा वसूला जा सकता है। आयुक्त ने इसे मंजूरी दे दी। अब इसकी सूचना देने के लिए सभी डिफॉल्टरों और इनके किरायेदारों को नोटिस दिया जाएगा। नोटिस मिलते ही किराये का पैसा निगम के खाते में जमा करना अनिवार्य होगा।
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निगम एक्ट लागू, होगी 3.88 करोड़ की वसूली
कुल 25 में से बड़े छह डिफॉल्टरों की संपत्तियों से मिलने वाले किराये से टैक्स वसूली की जाएगी। यानि इनके किरायेदार अब अपने मालिक को किराया न देकर सीधे निगम के खाते में पैसा जमा करवाएंगे। यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक टैक्स की राशि पूरी नहीं हो जाती। निगम ने अधिनियम 124(5) के तहत रेंट अटैचमेंट की यह कार्रवाई की है।
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19 डिफॉल्टरों की संपत्तियां रेड एंट्री के लिए भेजेंगे
निगम प्रशासन ने बाकी 19 डिफॉल्टरों की संपत्तियां एमसी एक्ट 124(1) में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री के लिए भेजने का फैसला लिया है। रेड एंट्री होने से डिफॉल्टर अपनी संपत्तियां नहीं बेच पाएंगे, साथ ही इन पर लोन भी नहीं ले पाएंगे। निगम भविष्य में इनकी संपत्तियां नीलाम कर टैक्स वसूली भी कर सकता है। इनमें शहर के कई नामी होटल शामिल हैं जिनका टैक्स आज तक नहीं भरा गया है।
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टैक्स न देने वालों पर कार्रवाई
टैक्स न चुकाने वाले छह बड़े डिफाल्टरों की संपत्तियों का किराया अटैच किया जा रहा है। बाकी 19 को रेड एंट्री के लिए भेजा जा रहा है। नोटिस के बावजूद टैक्स न जमा करवाने पर निगम को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी है।
रोहित जमवाल, नगर निगम आयुक्त