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पत्नी को साथ ले जा रहा था अमित हादसे ने छीन ली दोनों की जिंदगियां
Updated Mon, 14 Aug 2017 11:32 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा।
मंडी के कोटरोपी में हुई त्रासदी में जिला को गहरे जख्म दिए हैं। कुदरत ने चुराह के दुनी चंद से लाडला ही नहीं, उसकी बहू भी छीन ली। अब दोनों की चिताएं एक साथ जलाई जाएंगी। इससे दुनी चंद के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। सभी का रो रोकर बुरा हाल है। अमित निवासी सतापर, दुलाहर अपनी पत्नी मनीषा कुमारी को अपने साथ मनाली ले जा रहा था। मनाली में अमित नौकरी करता था। डेढ़ साल पहले ही उन दोनों की शादी हुई थी।पत्नी को लेने के लिए ही वह घर पहुंचा था। दोनों की अभी तक कोई संतान नहीं थी। दोनों अपनी जिंदगी को लेकर प्लानिंग कर रहे थे। उन्हें क्या पता कि कोटरोपी में उनकी मौत इंतजार कर रही थी। चंबा-मनाली बस के भूस्खलन के चपेट में आने से दोनों मलबे में दब गए। इनका पता रविवार को लग पाया। मौत की खबर मिलते ही पूरा परिवार शोक मेें डूब गया। अमित के पिता दुनी चंद और रिश्तेदार कोटरोपी के लिए निकल गए। दुनी चंद अपने बेटे और बहू के शवों को लेकर आ रहे हैं। देररात तक उनके गांव में पहुंचने की संभावना है। अमित की मां चंपा देवी और बहन पूजा को ढांढस बंधाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। मां-बेटी की दशा देख ग्रामीण भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पा रहे है। मां टकटकी लगाकर अपने बेटे और बहू के आने की आस लिए बैठी है। बहन पूजा को विश्वास ही नहीं हो पा रहा है कि जिस कलाई पर उसने चंद दिन पहले ही राखी बांधी थी अब उस कलाई पर वह कभी भी राखी नहीं बांध पाएगी।
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चंबा।
मंडी के कोटरोपी में हुई त्रासदी में जिला को गहरे जख्म दिए हैं। कुदरत ने चुराह के दुनी चंद से लाडला ही नहीं, उसकी बहू भी छीन ली। अब दोनों की चिताएं एक साथ जलाई जाएंगी। इससे दुनी चंद के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। सभी का रो रोकर बुरा हाल है। अमित निवासी सतापर, दुलाहर अपनी पत्नी मनीषा कुमारी को अपने साथ मनाली ले जा रहा था। मनाली में अमित नौकरी करता था। डेढ़ साल पहले ही उन दोनों की शादी हुई थी।पत्नी को लेने के लिए ही वह घर पहुंचा था। दोनों की अभी तक कोई संतान नहीं थी। दोनों अपनी जिंदगी को लेकर प्लानिंग कर रहे थे। उन्हें क्या पता कि कोटरोपी में उनकी मौत इंतजार कर रही थी। चंबा-मनाली बस के भूस्खलन के चपेट में आने से दोनों मलबे में दब गए। इनका पता रविवार को लग पाया। मौत की खबर मिलते ही पूरा परिवार शोक मेें डूब गया। अमित के पिता दुनी चंद और रिश्तेदार कोटरोपी के लिए निकल गए। दुनी चंद अपने बेटे और बहू के शवों को लेकर आ रहे हैं। देररात तक उनके गांव में पहुंचने की संभावना है। अमित की मां चंपा देवी और बहन पूजा को ढांढस बंधाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। मां-बेटी की दशा देख ग्रामीण भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पा रहे है। मां टकटकी लगाकर अपने बेटे और बहू के आने की आस लिए बैठी है। बहन पूजा को विश्वास ही नहीं हो पा रहा है कि जिस कलाई पर उसने चंद दिन पहले ही राखी बांधी थी अब उस कलाई पर वह कभी भी राखी नहीं बांध पाएगी।
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