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वन रक्षक मौत मामले की हो सीबीआई जांच : एसएफआई
Updated Wed, 05 Jul 2017 10:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की राज्य कमेटी ने मंडी के करसोग में संदिग्ध हालत में पेड़ से लटके मिले वन रक्षक मामले की सीबीआई से जांच करवाए जाने की मांग को लेकर बुधवार को उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर धरना प्रदर्शन किया। राज्य अध्यक्ष विवेक राणा की अगुवाई में किए गए इस प्रदर्शन में विवि और कॉलेज इकाई से आए कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यकर्ताओं ने वन रक्षक की मौत के असल कारणों का पता लगाने में प्रदेश पुलिस और सरकार को नाकाम करार देते हुए इस मामले की छानबीन को सीबीआई को सौंपे जाने की मांग की और इसके समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
अध्यक्ष विवेक राणा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वन रक्षक कैसे पेड़ पर लटका मिला, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान कर ही जांच कर रही है, जबकि परिजन और स्थानीय लोग इसे हत्या का मामला होने की शंका जता रहे हैं। इसलिए इस मामले की सीबीआई से ही जांच होनी चाहिए। राणा ने कहा कि इस नौजवान युवक की वनों की रक्षा करते हुए संदिग्ध हालात में हुई मौत में प्रदेश में सक्रिय वन माफियाओं का हाथ हो सकता है। प्रदेश में लगातार कानून व्यवस्था बिगड़ती जा रही है, प्रदेश सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। सरकार के सामने वनों का अवैध कटान हो रहा है। जहां भी निहत्थे वन रक्षक ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास करते है, उन्हें रास्ते से इसी तरह से हटाया जा रहा है। सरकार बार बार वन रक्षकों को हथियारों से लेस करने की मांग किए जाने के बावजूद आज तक उन्हें हथियार नहीं दे पाई है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के जवान वन रक्षक होशियार की मौत के कारणों का पता सिर्फ सीबीआई जांच में ही लग सकता है, और असल गुनाहगार बेनकाब हो सकते हैं।
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शिमला। एसएफआई की राज्य कमेटी ने मंडी के करसोग में संदिग्ध हालत में पेड़ से लटके मिले वन रक्षक मामले की सीबीआई से जांच करवाए जाने की मांग को लेकर बुधवार को उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर धरना प्रदर्शन किया। राज्य अध्यक्ष विवेक राणा की अगुवाई में किए गए इस प्रदर्शन में विवि और कॉलेज इकाई से आए कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यकर्ताओं ने वन रक्षक की मौत के असल कारणों का पता लगाने में प्रदेश पुलिस और सरकार को नाकाम करार देते हुए इस मामले की छानबीन को सीबीआई को सौंपे जाने की मांग की और इसके समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
अध्यक्ष विवेक राणा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वन रक्षक कैसे पेड़ पर लटका मिला, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान कर ही जांच कर रही है, जबकि परिजन और स्थानीय लोग इसे हत्या का मामला होने की शंका जता रहे हैं। इसलिए इस मामले की सीबीआई से ही जांच होनी चाहिए। राणा ने कहा कि इस नौजवान युवक की वनों की रक्षा करते हुए संदिग्ध हालात में हुई मौत में प्रदेश में सक्रिय वन माफियाओं का हाथ हो सकता है। प्रदेश में लगातार कानून व्यवस्था बिगड़ती जा रही है, प्रदेश सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। सरकार के सामने वनों का अवैध कटान हो रहा है। जहां भी निहत्थे वन रक्षक ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास करते है, उन्हें रास्ते से इसी तरह से हटाया जा रहा है। सरकार बार बार वन रक्षकों को हथियारों से लेस करने की मांग किए जाने के बावजूद आज तक उन्हें हथियार नहीं दे पाई है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के जवान वन रक्षक होशियार की मौत के कारणों का पता सिर्फ सीबीआई जांच में ही लग सकता है, और असल गुनाहगार बेनकाब हो सकते हैं।
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