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एसडीएम शहरी की कंडम गाड़ी में अब एसी टू डीसी करेंगे सफर
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पंकज चौहान
शिमला। डीसी कार्यालय में एसडीएम शहरी की कंडम सरकारी बुलैरो गाड़ी को एसी टू डीसी को देने के आदेश से हड़कंप मचा हुआ है। एसी टू डीसी को निर्देश दिए हैं कि वह अपनी सरकारी गाड़ी स्विफ्ट डिजायर एसडीएम शहरी को दे दें। जिला प्रशासन के इस फैसले से अफसरशाही में हड़कंप मचा हुआ है। इस फैसले से अफसरों के बीच मतभेद बढ़ने की भी संभावनाएं है।
डीसी ऑफिस की अफसरशाही निर्देश पढ़कर पसोपेश में है और गाड़ियों को एक्सचेंज नहीं किया है लेकिन देरसबेर ऊपर से आए आदेशों की अनुपालना करनी होगी अन्यथा अनुशासनहीनता का डंडा चलने की पूरी संभावना है। मौजूदा समय में उपायुक्त के अलावा यहां एडीसी, एडीएम (कानून व्यवस्था), एडीएम (प्रोटोकॉल), एसी टू डीसी, एसडीएम (शहरी) और एसडीएम (ग्रामीण) के अलावा तहसीलदारों की तैनाती है। इनमें से केवल तहसीलदार ग्रामीण को सरकारी गाड़ी मिली है। तहसीलदार शहरी को सरकारी गाड़ी नहीं है। इन अफसरों को आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकारी गाड़ियों की सुविधा दी है। डीसी कार्यालय के पास चार गाड़ियां हैं। इसके अलावा अन्य अफसरों के पास एक-एक गाड़ी है। इनमें से एसडीएम शहरी की गाड़ी करीब एक साल से कंडम पड़ी है।
जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम के लिए नई गाड़ी की खरीद का प्रस्ताव सरकार को भेजा था लेकिन अभी तक नई गाड़ी की खरीद नहीं हुई है। लिहाजा एसडीएम शहरी उसी कंडम गाड़ी का इस्तेमाल कर रही हैं। कंडम गाड़ी का सफर कभी भी घातक हो सकता है। सारे पहलुओं को ध्यान में रखकर कंडम गाड़ी को बदलने की बात की गई। लेकिन कंडम गाड़ी को बदलने की जगह उसे एसी टू डीसी को देने के निर्देश दे दिए हैं। सरकारी गाड़ी एसडीएम शहरी को देने का फैसला लिया है। अब इसके पीछे जिला प्रशासन का क्या तर्क है यह अफसरों की समझ से परे है। बहरहाल उपायुक्त कार्यालय के इस आर्डर के खूब चर्चे हो रहे हैं। वहीं डीसी अमित कश्यप से वाहनों को बदलने वाले पूछा तो उन्होंने कहा कि यह कार्यालय का अंदरूनी मामला है।
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शिमला। डीसी कार्यालय में एसडीएम शहरी की कंडम सरकारी बुलैरो गाड़ी को एसी टू डीसी को देने के आदेश से हड़कंप मचा हुआ है। एसी टू डीसी को निर्देश दिए हैं कि वह अपनी सरकारी गाड़ी स्विफ्ट डिजायर एसडीएम शहरी को दे दें। जिला प्रशासन के इस फैसले से अफसरशाही में हड़कंप मचा हुआ है। इस फैसले से अफसरों के बीच मतभेद बढ़ने की भी संभावनाएं है।
डीसी ऑफिस की अफसरशाही निर्देश पढ़कर पसोपेश में है और गाड़ियों को एक्सचेंज नहीं किया है लेकिन देरसबेर ऊपर से आए आदेशों की अनुपालना करनी होगी अन्यथा अनुशासनहीनता का डंडा चलने की पूरी संभावना है। मौजूदा समय में उपायुक्त के अलावा यहां एडीसी, एडीएम (कानून व्यवस्था), एडीएम (प्रोटोकॉल), एसी टू डीसी, एसडीएम (शहरी) और एसडीएम (ग्रामीण) के अलावा तहसीलदारों की तैनाती है। इनमें से केवल तहसीलदार ग्रामीण को सरकारी गाड़ी मिली है। तहसीलदार शहरी को सरकारी गाड़ी नहीं है। इन अफसरों को आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकारी गाड़ियों की सुविधा दी है। डीसी कार्यालय के पास चार गाड़ियां हैं। इसके अलावा अन्य अफसरों के पास एक-एक गाड़ी है। इनमें से एसडीएम शहरी की गाड़ी करीब एक साल से कंडम पड़ी है।
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जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम के लिए नई गाड़ी की खरीद का प्रस्ताव सरकार को भेजा था लेकिन अभी तक नई गाड़ी की खरीद नहीं हुई है। लिहाजा एसडीएम शहरी उसी कंडम गाड़ी का इस्तेमाल कर रही हैं। कंडम गाड़ी का सफर कभी भी घातक हो सकता है। सारे पहलुओं को ध्यान में रखकर कंडम गाड़ी को बदलने की बात की गई। लेकिन कंडम गाड़ी को बदलने की जगह उसे एसी टू डीसी को देने के निर्देश दे दिए हैं। सरकारी गाड़ी एसडीएम शहरी को देने का फैसला लिया है। अब इसके पीछे जिला प्रशासन का क्या तर्क है यह अफसरों की समझ से परे है। बहरहाल उपायुक्त कार्यालय के इस आर्डर के खूब चर्चे हो रहे हैं। वहीं डीसी अमित कश्यप से वाहनों को बदलने वाले पूछा तो उन्होंने कहा कि यह कार्यालय का अंदरूनी मामला है।
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