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सेमेस्टर परीक्षा के शेड्यूल पर सवाल
Updated Tue, 20 Feb 2018 09:16 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई ने विश्वविद्यालय की ओर से यूजी की 11 अप्रैल से सेमेस्टर परीक्षाएं करवाने के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। एसएफआई के राज्य अध्यक्ष विक्रम कायथ ने कहा कि अधिकतर कॉलेजों में अभी तक सिर्फ 18 से 20 रेगुलर कक्षाएं हो पाई हैं। ग्यारह अप्रैल तक किसी भी कॉलेज में यूजी की परीक्षाओं के लिए यूजीसी के सीबीसीएस के लिए तय हर सेमेस्टर में 90 कक्षाओं की शर्त पूरी नहीं हाेंगी। फिर विश्वविद्यालय कैसे सेमेस्टर की परीक्षाएं करवा रहा है। इस मामले को लेकर मंगलवार को प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कायथ और सचिव अमित ठाकुर सहित विवि इकाई के पदाधिकारियों ने परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात की और उन्हें मांग पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने मांग उठाई कि यूजी कोर्स में लगातार परीक्षा और कक्षाओं को लेकर अव्यवस्था रही है। इसके चलते छात्र परेशान हैं।
90 दिन की कक्षाएं पूरे किए बिना किसी भी सूरत में यूजी की परीक्षाएं न करवाई जाएं। इसलिए उन्होंने यूजी परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने प्रदेश भर में यूजी कोर्स कर रहे सवा लाख छात्रों के लिए अकादमिक शेड्यूल बनाने की मांग भी उठाई। वहीं रूसा सीबीसीएस में पढ़ रहे छात्रों को रि-अपीयर और रि-इवेल्यूएशन की सुविधा दिए जाने की मांग भी उठाई। कायथ का कहना है कि किसी भी सूरत में प्रदेश के किसी भी कॉलेज में 11 अप्रैल तक 50 कक्षाएं भी पूरी नहीं लग पाएंगी।
कॉलेजों में आंकड़ा 50 से नीचे ही रहेगा, जबकि न्यूनतम 90 कक्षाएं लगनी अनिवार्य है। ऐसे में इस न्यूनतम शर्त को पूरा करने के लिए परीक्षा शेड्यूल में बदलाव किया जाए। कायथ का कहना है कि परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी ने इस मांग पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। कायथ ने चेताया कि यदि एक सप्ताह के भीतर परीक्षा शेड्यूल न बदला गया तो एसएफआई यूजी छात्रों को साथ लेकर प्रदेश भर में आंदोलन खड़ा करेगी।
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कॉलेजों में समय से शुरू हुईं कक्षाएं : परीक्षा नियंत्रक
विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी का कहना है कि 11 नवंबर तक यूजी कक्षाओं की रेगुलर सेमेस्टर परीक्षाएं समाप्त हो गई थी। एक दिन बाद 12 नवंबर से तय शेड्यूल के मुताबिक कक्षाएं शुरू हो गई। कॉलेजों में कक्षाएं हो पाई या नहीं यह कॉलेज प्राचार्य और शिक्षा विभाग का क्षेत्र है। यूजी परीक्षा की तिथि तय शेड्यूल के मुताबिक ही तय की गई है। यदि इसमें बदलाव किया गया तो समय से परीक्षाएं करवाना और उसके परिणाम घोषित करना विवि के लिए मुश्किल होगा।
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शिमला। एसएफआई ने विश्वविद्यालय की ओर से यूजी की 11 अप्रैल से सेमेस्टर परीक्षाएं करवाने के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। एसएफआई के राज्य अध्यक्ष विक्रम कायथ ने कहा कि अधिकतर कॉलेजों में अभी तक सिर्फ 18 से 20 रेगुलर कक्षाएं हो पाई हैं। ग्यारह अप्रैल तक किसी भी कॉलेज में यूजी की परीक्षाओं के लिए यूजीसी के सीबीसीएस के लिए तय हर सेमेस्टर में 90 कक्षाओं की शर्त पूरी नहीं हाेंगी। फिर विश्वविद्यालय कैसे सेमेस्टर की परीक्षाएं करवा रहा है। इस मामले को लेकर मंगलवार को प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कायथ और सचिव अमित ठाकुर सहित विवि इकाई के पदाधिकारियों ने परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात की और उन्हें मांग पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने मांग उठाई कि यूजी कोर्स में लगातार परीक्षा और कक्षाओं को लेकर अव्यवस्था रही है। इसके चलते छात्र परेशान हैं।
90 दिन की कक्षाएं पूरे किए बिना किसी भी सूरत में यूजी की परीक्षाएं न करवाई जाएं। इसलिए उन्होंने यूजी परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने प्रदेश भर में यूजी कोर्स कर रहे सवा लाख छात्रों के लिए अकादमिक शेड्यूल बनाने की मांग भी उठाई। वहीं रूसा सीबीसीएस में पढ़ रहे छात्रों को रि-अपीयर और रि-इवेल्यूएशन की सुविधा दिए जाने की मांग भी उठाई। कायथ का कहना है कि किसी भी सूरत में प्रदेश के किसी भी कॉलेज में 11 अप्रैल तक 50 कक्षाएं भी पूरी नहीं लग पाएंगी।
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कॉलेजों में आंकड़ा 50 से नीचे ही रहेगा, जबकि न्यूनतम 90 कक्षाएं लगनी अनिवार्य है। ऐसे में इस न्यूनतम शर्त को पूरा करने के लिए परीक्षा शेड्यूल में बदलाव किया जाए। कायथ का कहना है कि परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी ने इस मांग पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। कायथ ने चेताया कि यदि एक सप्ताह के भीतर परीक्षा शेड्यूल न बदला गया तो एसएफआई यूजी छात्रों को साथ लेकर प्रदेश भर में आंदोलन खड़ा करेगी।
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कॉलेजों में समय से शुरू हुईं कक्षाएं : परीक्षा नियंत्रक
विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी का कहना है कि 11 नवंबर तक यूजी कक्षाओं की रेगुलर सेमेस्टर परीक्षाएं समाप्त हो गई थी। एक दिन बाद 12 नवंबर से तय शेड्यूल के मुताबिक कक्षाएं शुरू हो गई। कॉलेजों में कक्षाएं हो पाई या नहीं यह कॉलेज प्राचार्य और शिक्षा विभाग का क्षेत्र है। यूजी परीक्षा की तिथि तय शेड्यूल के मुताबिक ही तय की गई है। यदि इसमें बदलाव किया गया तो समय से परीक्षाएं करवाना और उसके परिणाम घोषित करना विवि के लिए मुश्किल होगा।