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एनजीटी के फैसले के नफा-नुकसान की बनेगी रिपोर्ट
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:06 PM IST
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शिमला। प्रदेश सरकार राजधानी शिमला में भवन निर्माण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले की समीक्षा करेगी। इस मामले को लेकर शनिवार को मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता में हुई बैठक में चार सदस्यीय रिव्यू कमेटी गठित की र्गई। यह कमेटी एनजीटी के फैसले से हो रहे फायदे और नुकसान पर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगामी रणनीति तैयार करेगी।
प्रधान सचिव विधि की अध्यक्षता में रिव्यू कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में निदेशक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, नगर निगम शिमला के आयुक्त और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिमुडा को शामिल किया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि रिव्यू कमेटी एनजीटी के फैसले की हर पहलू से समीक्षा करेगी। एनजीटी के जिन फैसलों से जनता को नुकसान नहीं हो रहा है, उन्हें कैसे लागू किया जाना है? इसकी रूपरेखा तैयार करेगी। फैसले से हो रहे नुकसान को किस तरह से कम किया जाना है? इसका भी समाधान तलाशने का काम कमेटी करेगी। कानूनी तौर पर फैसलों को लागू करना कितना आसान है? फैसले लागू करने से कौन से चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं? इसको लेकर भी रिव्यू कमेटी रिपोर्ट तैयार करेगी। कमेटी द्वारा रिपोर्ट तैयार किए जाने पर सरकार आगामी रणनीति तैयार करेगी।
कल होगी समीक्षा कमेटी की पहली बैठक
मुख्य सचिव की ओर से गठित की गई कमेटी की पहली बैठक सोमवार को राज्य सचिवालय में होगी। इस बैठक में कमेटी के सदस्यों को उनके कामकाज से अवगत करवाते हुए रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा होगी।
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सरकार के पास हैं दो विकल्प
- एनजीटी में फैसले के पुनर्विचार की याचिका दायर करे।
- एनजीटी के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करे।
डेवलेपमेंट प्लान की टेंडरिंग को मांगेंगे मंजूरी
बैठक में फैसला लिया गया कि शिमला प्लानिंग एरिया के लिए बनाए जाने वाले डेवलेपमेंट प्लान का टेंडर जारी करने के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी मांगी जाएगी।
16 नवंबर को एनजीटी ने सुनाए ये मुख्य फैसले
- शिमला में कोर, ग्रीन और फॉरेस्ट एरिया में किसी भी तरह के नए भवन निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध
- शिमला प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिल से अधिक भवन निर्माण पर रोक
- सड़कों से तीन मीटर की दूरी के भीतर निर्माण कार्य पर प्रतिबंध
- बिना मंजूरी पेड़ काटने, जमीन की कटिंग पर पांच लाख जुर्माना
- अवैध निर्माण तीन सप्ताह में गिराए जाएं, भवन नियमित करवाने को आवेदन करने वालोें से वसूला जाए मुआवजा
- 35 से 45 डिग्री से ज्यादा निर्माण करने पर रोक
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प्रधान सचिव विधि की अध्यक्षता में रिव्यू कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में निदेशक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, नगर निगम शिमला के आयुक्त और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिमुडा को शामिल किया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि रिव्यू कमेटी एनजीटी के फैसले की हर पहलू से समीक्षा करेगी। एनजीटी के जिन फैसलों से जनता को नुकसान नहीं हो रहा है, उन्हें कैसे लागू किया जाना है? इसकी रूपरेखा तैयार करेगी। फैसले से हो रहे नुकसान को किस तरह से कम किया जाना है? इसका भी समाधान तलाशने का काम कमेटी करेगी। कानूनी तौर पर फैसलों को लागू करना कितना आसान है? फैसले लागू करने से कौन से चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं? इसको लेकर भी रिव्यू कमेटी रिपोर्ट तैयार करेगी। कमेटी द्वारा रिपोर्ट तैयार किए जाने पर सरकार आगामी रणनीति तैयार करेगी।
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कल होगी समीक्षा कमेटी की पहली बैठक
मुख्य सचिव की ओर से गठित की गई कमेटी की पहली बैठक सोमवार को राज्य सचिवालय में होगी। इस बैठक में कमेटी के सदस्यों को उनके कामकाज से अवगत करवाते हुए रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा होगी।
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सरकार के पास हैं दो विकल्प
- एनजीटी में फैसले के पुनर्विचार की याचिका दायर करे।
- एनजीटी के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करे।
डेवलेपमेंट प्लान की टेंडरिंग को मांगेंगे मंजूरी
बैठक में फैसला लिया गया कि शिमला प्लानिंग एरिया के लिए बनाए जाने वाले डेवलेपमेंट प्लान का टेंडर जारी करने के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी मांगी जाएगी।
16 नवंबर को एनजीटी ने सुनाए ये मुख्य फैसले
- शिमला में कोर, ग्रीन और फॉरेस्ट एरिया में किसी भी तरह के नए भवन निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध
- शिमला प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिल से अधिक भवन निर्माण पर रोक
- सड़कों से तीन मीटर की दूरी के भीतर निर्माण कार्य पर प्रतिबंध
- बिना मंजूरी पेड़ काटने, जमीन की कटिंग पर पांच लाख जुर्माना
- अवैध निर्माण तीन सप्ताह में गिराए जाएं, भवन नियमित करवाने को आवेदन करने वालोें से वसूला जाए मुआवजा
- 35 से 45 डिग्री से ज्यादा निर्माण करने पर रोक