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लिथोट्रिप्सी मशीन बंद, पत्थरी के मरीज बेहाल
Updated Mon, 14 May 2018 10:36 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आईजीएमसी के यूरोलॉजी विभाग में लिथोट्रिप्सी मशीन सोमवार को अचानक बंद हो गई। इससे गुर्दे की पत्थरी के मरीजों का उपचार नहीं हो पाया। मरीज इलाज के लिए दिनभर बारी का इंतजार करते नजर आए। अस्पताल में डेढ़ दर्जन मरीजों का इलाज किया जाना था।
आईजीएमसी में इस मशीन को छठी मंजिल में स्थापित किया गया है। करीब दो करोड़ से अधिक की कीमत से स्थापित इस मशीन को वर्ष 2015 में मरीजों की सहूलियत के लिए लगाया गया था। सोमवार को मशीन में ओवर हीटिंग हो गई। इससेमशीन की स्क्रीन पर इलाज संबंधित दिखने वाली प्रक्रिया ठप पड़ गई।
इलाज करवाने पहुंचे मरीज परेशान हुए। आनन-फानन में विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों ने मशीन की मरम्मत के लिए फैक्स और ई-मेल संबंधित प्रक्रिया शुरू की। दोपहर ढाई बजे तक मशीन बंद पड़ रही और कमरे के बाहर मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
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- विभागीय पक्ष -
- डॉ. जनक राज
- वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
इनसेट
बिना सर्जरी के होता है इलाज
अस्पताल में लगी इस मशीन की मदद से बिना सर्जरी के गुर्दे की पत्थरी का इलाज किया जाता है। लेजर तकनीक से यह पत्थरी बिना दर्द के निकाली जाती है।
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सस्ती दरों पर मिलता है इलाज
अस्पताल में नवंबर 2015 में मशीन को स्थापित किया गया था। इलाज में करीब सात हजार खर्च होता है। निजी अस्पतालों में इस बीमारी के इलाज के लिए 25 से 30 हजार रुपये खर्च होते हैं।
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बार-बार आती है खराबी
अस्पताल में जब से यह मशीन स्थापित की गई है। तब से इस मशीन में कुछ न कुछ खराबी चल रही है। प्रशासन दावा करता है कि ज्यादा वर्कलोड के कारण मशीन में खराबी आती है। इससे पहले शॉक वेव जेनरेटर का पार्ट खराब होने के कारण मशीन करीब दस माह तक बंद रह चुकी है।
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किडनी स्टोन के ऑपरेशन होते हैं अहम
लिथोट्रिप्सी मशीन आईजीएमसी में ही लगी है। इससे पहले यहां से मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ जाना पड़ता था। इस मशीन से किडनी स्टोन के मरीजों का बिना चीरफाड़ किए लेजर तकनीक से इलाज होता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पत्थरी को निकाला गया है।
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शिमला। आईजीएमसी के यूरोलॉजी विभाग में लिथोट्रिप्सी मशीन सोमवार को अचानक बंद हो गई। इससे गुर्दे की पत्थरी के मरीजों का उपचार नहीं हो पाया। मरीज इलाज के लिए दिनभर बारी का इंतजार करते नजर आए। अस्पताल में डेढ़ दर्जन मरीजों का इलाज किया जाना था।
आईजीएमसी में इस मशीन को छठी मंजिल में स्थापित किया गया है। करीब दो करोड़ से अधिक की कीमत से स्थापित इस मशीन को वर्ष 2015 में मरीजों की सहूलियत के लिए लगाया गया था। सोमवार को मशीन में ओवर हीटिंग हो गई। इससेमशीन की स्क्रीन पर इलाज संबंधित दिखने वाली प्रक्रिया ठप पड़ गई।
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इलाज करवाने पहुंचे मरीज परेशान हुए। आनन-फानन में विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों ने मशीन की मरम्मत के लिए फैक्स और ई-मेल संबंधित प्रक्रिया शुरू की। दोपहर ढाई बजे तक मशीन बंद पड़ रही और कमरे के बाहर मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
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- विभागीय पक्ष -
- डॉ. जनक राज
- वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
इनसेट
बिना सर्जरी के होता है इलाज
अस्पताल में लगी इस मशीन की मदद से बिना सर्जरी के गुर्दे की पत्थरी का इलाज किया जाता है। लेजर तकनीक से यह पत्थरी बिना दर्द के निकाली जाती है।
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सस्ती दरों पर मिलता है इलाज
अस्पताल में नवंबर 2015 में मशीन को स्थापित किया गया था। इलाज में करीब सात हजार खर्च होता है। निजी अस्पतालों में इस बीमारी के इलाज के लिए 25 से 30 हजार रुपये खर्च होते हैं।
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बार-बार आती है खराबी
अस्पताल में जब से यह मशीन स्थापित की गई है। तब से इस मशीन में कुछ न कुछ खराबी चल रही है। प्रशासन दावा करता है कि ज्यादा वर्कलोड के कारण मशीन में खराबी आती है। इससे पहले शॉक वेव जेनरेटर का पार्ट खराब होने के कारण मशीन करीब दस माह तक बंद रह चुकी है।
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किडनी स्टोन के ऑपरेशन होते हैं अहम
लिथोट्रिप्सी मशीन आईजीएमसी में ही लगी है। इससे पहले यहां से मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ जाना पड़ता था। इस मशीन से किडनी स्टोन के मरीजों का बिना चीरफाड़ किए लेजर तकनीक से इलाज होता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पत्थरी को निकाला गया है।