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नगर निगम हाउस आज, सफाई व्यवस् था पर हंगामे के आसार
Updated Wed, 27 Sep 2017 11:19 PM IST
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शिमला। चुनावी साल में आचार संहिता से पहले होने वाली नगर निगम की मासिक बैठक में वीरवार को सफाई व्यवस्था पर हंगामा होने के आसार हैं। सैहब कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहरवासियों को दो हफ्ते तक खुद कूड़ा उठाने को मजबूर होना पड़ा था। निगम ने पहले तो 20 फीसदी सैलरी नहीं बढ़ाई और फैसला एजीएम पर टाल दिया। लेकिन, जब एजीएम में भी फैसला नहीं हुआ तो खुद अपने स्तर पर ही सैलरी बढ़ा दी। ऐसे में कांग्रेसी और माकपा पार्षद निगम प्रशासन को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। इनका कहना है कि जब सैलरी निगम खुद अपने स्तर पर ही बढ़ा सकता था तो फिर पहले दिन ही क्यों इस पर फैसला नहीं लिया गया? आखिर क्यों शहरवासियों को कूड़ा उठाने के लिए मजबूर किया गया। शहर में गंदगी फैली, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? सैहब कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर मेयर पार्षदों के निशाने पर रह सकती हैं। उन्हें अपनी पार्टी के पार्षदों से भी कम ही समर्थन मिलने की उम्मीद है। क्योंकि ये सभी पार्षद पहले ही सैलरी बढ़ाने की मांग का समर्थन कर रहे थे।
इन प्रस्तावों पर लगेगी मुहर
बैठक में सफाई कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी। साथ ही शहर में दस करोड़ रुपये से अधिक पानी और सीवरेज के प्रस्तावों पर भी निगम हाउस में मुहर लग सकती है। एफसीपीसी की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा बैठक में पार्षद निधि को लेकर भी चर्चा की जानी है। पार्षद निधि के तहत हर पार्षद को 25 लाख रुपये बजट देने के लिए निगम को करीब 10 करोड़ रुपये बजट चाहिए। लेकिन ये कहां से आएगा, इस पर बैठक में चर्चा होनी है। चुनाव से पहले होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है।
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इन प्रस्तावों पर लगेगी मुहर
बैठक में सफाई कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी। साथ ही शहर में दस करोड़ रुपये से अधिक पानी और सीवरेज के प्रस्तावों पर भी निगम हाउस में मुहर लग सकती है। एफसीपीसी की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा बैठक में पार्षद निधि को लेकर भी चर्चा की जानी है। पार्षद निधि के तहत हर पार्षद को 25 लाख रुपये बजट देने के लिए निगम को करीब 10 करोड़ रुपये बजट चाहिए। लेकिन ये कहां से आएगा, इस पर बैठक में चर्चा होनी है। चुनाव से पहले होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है।
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