फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   जिला बनाने के नाम पर राजनीति

जिला बनाने के नाम पर राजनीति

Mon, 23 Oct 2017 10:35 PM IST
Updated Mon, 23 Oct 2017 10:35 PM IST
विज्ञापन
जिला बनाने के नाम पर राजनीति
रामपुर बुशहर।
विज्ञापन

हर चुनावी मौसम में नए जिलों का मुद्दा जोर शोर से उठता है। शिमला जिले के रामपुर तो कभी रोहड़ू को नया जिला बनाने की मांग समय-समय पर जोरदार तरीके से उठाई जाती रही है। विधानसभा चुनाव को कुछ दिन ही शेष हैं तो राजनीतिक दलों ने मुद्दे को फिर से भुनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
दरअसल रामपुर को जिले का दर्जा देने की मांग पिछले 40 साल से उठ रही है। कांग्रेस के सत्ता में आते ही रामपुर को अलग जिला बनाने का मामला गरमा जाता है। इस बार भी रामपुर को नया जिला बनाने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई। लेकिन नतीजा फिलहाल सिफर ही है। इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन स्थल ने जिले की उम्मीदें बढ़ा दी थीं। सरकार ने रामपुर में मुख्य समारोह करने का फैसला किया। लोग मान बैठे थे कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह रामपुर को नए जिले का तोहफा देंगे। लेकिन उम्मीदें लेकर समारोह में पहुंचे लोगों को बैरंग लौटना पड़ा।
विज्ञापन

वहीं दूसरी ओर भाजपा के सत्ता में रहते हुए जिला शिमला के रोहड़ू के दुर्गम क्षेत्रों को मिलाकर रोहड़ू को नया जिला बनाने की मांग की जाती रही है। इसके साथ ही रोहड़ू के लोग खासकर जन प्रतिनिधि भी यही तर्क देते हैं कि क्षेत्र के दुर्गम इलाकों के लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने में अधिक समय और धन खर्च करना पड़ा है। इस कारण से रोहड़ू को अलग जिला बनाया जाए। भाजपा नेता चुनाव नजदीक आते देख कहने लगे हैं कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो रोहड़ू को नया जिला बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। राज्य की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि प्रदेश में नए जिला बनाए जा सके। अगर शिमला को तोड़कर नया जिला बनाने पर विचार भी किया जाए तो इससे पहले कांगड़ा और मंडी जिले इतने बड़े हैं कि वहां पहले नए जिले बनाने को सरकार पर दबाव डाला जाने लगेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


300 किमी लंबा सफर बना मजबूरी
रामपुर को जिला बनाने के लिए बाकायदा एक आत्मा राम केदारटा व अन्य लोगों ने मिलकर मंच भी गठित किया गया है। लेकिन मुख्यमंत्री की फटकार के बाद यह मामला ठंडा पड़ गया।सरकार पर दबाव बनाने के लिए वजूद में आए मंच के सदस्यों का कहना है कि शिमला और कुल्लू के दुर्गम क्षेत्रों से लोगों को जिला मुख्यालय तक आने के लिए 250 से 300 किलोमीटर लंबा सफर करना पड़ता है। इन्हीं दुर्गम इलाकों को जोड़कर अलग से जिला बनाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed