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Shimla News: डीसी दफ्तर के बाहर 108 और 102 एंबुलेंस कर्मियों का प्रदर्शन
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न्यूनतम वेतनमान लागू करने का किया आग्रह
16 फरवरी को होगा प्रदेश स्तरीय आंदोलन का एलान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेशभर में तीन दिन से हड़ताल पर चल रहे 108 और 102 एंबुलेंस सेवा कर्मचारियों ने शनिवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। सीटू के बैनर तले चल रहे इस प्रदेश स्तरीय आंदोलन के तहत हुए प्रदर्शन में कर्मचारियों ने श्रम कानूनों, वेतन और अन्य वित्तीय लाभों को लेकर न्यायालय के दिए आदेशों को लागू करने की मांग की।
कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम देने का आग्रह भी किया। तय हुआ कि 16 फरवरी को राजधानी शिमला में नेशनल हेल्थ मिशन प्रबंध निदेशक कार्यालय कसुम्पटी के बाहर प्रदर्शन होगा। यूनियन ने चेताया कि इसके बावजूद यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो फिर निर्णायक आंदोलन होगा। प्रदर्शन में शामिल सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार और महासचिव बालक राम ने कहा कि मुख्य नियोक्ता नेशनल हेल्थ मिशन के तहत कार्यरत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन काम कर रहे सैकड़ों पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारी शोषण का शिकार हो रहे हैं। इन कर्मचारियों को सकरार के तय किया न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है और 14 घंटे काम लिया जा रहा है। इसका कोई ओवरटाइम नहीं दिया जाता। कर्मचारियों के लिए छुट्टियों का कोई प्रावधान नहीं, छुट्टी करने पर वेतन काट दिया जाता है। ईपीएफ कर्मचारियों से ही काटा जा रहा है। कर्मचारियों को छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, नोटिस पे और अन्य प्रकार के एरियर का भुगतान नहीं किया गया। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जाए।
सरकारी एंबुलेंस के सहारे मरीज
तीन दिन से 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों की एंबुलेंस सेवा और अन्य संस्थाओं की एंबुलेंस वाहन ही मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं। हड़ताल के कारण शहर से बाहर दूर दराज में होने वाले सड़क हादसों के घायलों और गंभीर रोगियों को लाने-ले जाने में लोगों को दिक्कतें पेश आना शुरू हो गई हैं। शहर में संस्थाओं की एंबुलेंस और अस्पतालों की अपनी इमरजेंसी वाहनों से मरीजों को मिल रही हैं।
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16 फरवरी को होगा प्रदेश स्तरीय आंदोलन का एलान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेशभर में तीन दिन से हड़ताल पर चल रहे 108 और 102 एंबुलेंस सेवा कर्मचारियों ने शनिवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। सीटू के बैनर तले चल रहे इस प्रदेश स्तरीय आंदोलन के तहत हुए प्रदर्शन में कर्मचारियों ने श्रम कानूनों, वेतन और अन्य वित्तीय लाभों को लेकर न्यायालय के दिए आदेशों को लागू करने की मांग की।
कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम देने का आग्रह भी किया। तय हुआ कि 16 फरवरी को राजधानी शिमला में नेशनल हेल्थ मिशन प्रबंध निदेशक कार्यालय कसुम्पटी के बाहर प्रदर्शन होगा। यूनियन ने चेताया कि इसके बावजूद यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो फिर निर्णायक आंदोलन होगा। प्रदर्शन में शामिल सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार और महासचिव बालक राम ने कहा कि मुख्य नियोक्ता नेशनल हेल्थ मिशन के तहत कार्यरत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन काम कर रहे सैकड़ों पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारी शोषण का शिकार हो रहे हैं। इन कर्मचारियों को सकरार के तय किया न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है और 14 घंटे काम लिया जा रहा है। इसका कोई ओवरटाइम नहीं दिया जाता। कर्मचारियों के लिए छुट्टियों का कोई प्रावधान नहीं, छुट्टी करने पर वेतन काट दिया जाता है। ईपीएफ कर्मचारियों से ही काटा जा रहा है। कर्मचारियों को छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, नोटिस पे और अन्य प्रकार के एरियर का भुगतान नहीं किया गया। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जाए।
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सरकारी एंबुलेंस के सहारे मरीज
तीन दिन से 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों की एंबुलेंस सेवा और अन्य संस्थाओं की एंबुलेंस वाहन ही मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं। हड़ताल के कारण शहर से बाहर दूर दराज में होने वाले सड़क हादसों के घायलों और गंभीर रोगियों को लाने-ले जाने में लोगों को दिक्कतें पेश आना शुरू हो गई हैं। शहर में संस्थाओं की एंबुलेंस और अस्पतालों की अपनी इमरजेंसी वाहनों से मरीजों को मिल रही हैं।
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