100 दिन: चार्जशीट पर दबे पांव आगे बढ़ रही सरकार, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ
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जयराम सरकार ने राज्यपाल को सौंपी भाजपा की चार्जशीट पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री से जब भी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान चार्जशीट की जांच पर सवाल किया गया, उन्होंने सिर्फ यही कहा कि द्वेष भाव से सरकार कोई काम नहीं करेगी।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि चार्जशीट पर सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। सरकार ने बिना शोर मचाए चार्जशीट का हिस्सा रहे परिवहन, आबकारी एवं कराधान विभाग, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक, राजस्व विभाग, उद्योग विभाग के कई आरोपों और घोटालों की जांच शुरू करा दी।
इस बात का खास ध्यान रखा गया कि बिना किसी ठोस सबूत के मामले को तूल देकर विवाद में न फंसा जाए। सरकार की इसी खामोश चाल के चलते विपक्ष परेशान करने का आरोप नहीं लगा सका है।
आरोप सही होने पर ही फ्रंटफुट पर सरकार
वैसे तो चार्जशीट में कई आरोप ऐसे थे, जो सिर्फ लगाने के लिए लगाए गए। यही वजह है कि सरकार पूरी चार्जशीट की जांच का एलान कराने से बचती दिखी। अंदरखाते प्रारंभिक जांच चल रही है।
मुख्यमंत्री के बजाय विभागीय मंत्री ही विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। इससे मुख्यमंत्री को न सिर्फ विवादों से बचाया जा रहा है, बल्कि कई मुहास होने से विपक्ष को भी पलटवार करने में परेशानी हो रही है।
अब तक इन मामलों पर हुई कार्रवाई
- रघुनाथ मंदिर को सरकारी नियंत्रण से बाहर किया
- धारा 118 के तहत जमीन खरीद के मामलों की जांच शुरू
- परिवहन विभाग में हुई टायर खरीद की धांधली की जांच शुरू
- कंडक्टर भर्ती के दौरान हुए घोटाले की जांच शुरू
- अनियमितताओं के आरोपों के बाद भंग किया केसीसी बैंक का बोर्ड
- चार्जशीट में दर्ज कई पेड़ कटाने के मामलों की हो रही विजिलेंस जांच
- शराब बिक्री में हुए घपले के चलते निरस्त की पिछली शराब नीति
- हिमाचल प्रदेश बीवरेजेस कारपोरेशन को किया भंग
- अवैध खनन व पेड़ कटान के मामलों की तैयार की जा रही सूची
- पिछली सरकार में हुई पाइपों की खरीद की जांच के आदेश
24 दिसंबर 2016 को सौंपी थी चार्जशीट
भाजपा ने पिछली वीरभद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान 24 दिसंबर, 2016 को वीरभद्र सिंह और अन्य के खिलाफ राज्यपाल आचार्य देवव्रत को चार्जशीट सौंपी थी।
राजभवन ने सरकार को चार्जशीट भेजी, लेकिन राजनीतिक आरोप बताकर तत्कालीन सरकार ने आरोपों को खारिज कर चार्जशीट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
अनिल शर्मा का भी है नाम
भाजपा की चार्जशीट की जांच में जयराम सरकार के ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा का भी नाम है। अनिल शर्मा पिछली वीरभद्र सरकार के दौरान पंचायतीराज मंत्री थे।
चार्जशीट में उनके खिलाफ पशुपालन विभाग में दवाएं खरीदने के लिए ब्लैकलिस्ट कंपनियों के साथ रेट कांट्रेक्ट करने का आरोप लगा।
इसके अलावा मंडी के राजमहल जमीन बेनामी सौदे में भी मंत्री द्वारा लेनदेन करने का आरोप लगा। इसके अलावा सबसे बड़ा आरोप आय से अधिक संपत्ति का लगाया गया।