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प्री-मेच्योर रिटायरमेंट लेने वाले 25 हजार फौजियों को बड़ी राहत

Mon, 07 Sep 2015 04:52 PM IST
Updated Mon, 07 Sep 2015 04:52 PM IST
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1.25 lakh ex servicemen of himachal will get benefit of one rank one pension.

वन रैंक वन पेंशन का फायदा अब सूबे के उन लगभग 25 हजार पूर्व सैनिकों को भी मिलेगा जिन्होंने प्री-मेच्योर रिटायरमेंट ली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद हिमाचल के पूर्व सैनिकों में खुशी की लहर है। जश्न मनाने के लिए मंगलवार को बिलासपुर में प्रदेश भर के पूर्व सैनिक जुट रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर में हड़ताल पर बैठे पूर्व सैनिक कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष सूबेदार प्रकाश चंद और सूबेदार रामानंद का किसान भवन में जोरदार स्वागत किया जाएगा।

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स्वागत और जश्न की तैयारियों को लेकर रविवार को बिलासपुर में समिति की बैठक भी हुई। बैठक में सचिव कैप्टन योगेंद्र जंबाल, ऋषि मार्कंडेय, सैनिक परिवहन एवं कल्याण समिति के अध्यक्ष कैप्टन सुरेंद्र कुमार, जोगेंद्र सेन, धनी राम, सूबेदार बलदेव, ओम प्रकाश, नंद लाल, सुख राम, धनी राम, नायब सूबेदार लच्छू राम और सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे। उधर, कारगिल युद्ध में टोलोलिंग और कारगिल सेक्टर की अगुवाई करने वाले ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (युद्ध सेवा मेडल) ने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार जताया है।
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इसलिए लेते हैं प्री-मेच्योर रिटायरमेंट

1.25 lakh ex servicemen of himachal will get benefit of one rank one pension.

पूर्व सैनिकों की मानें तो प्री-मेच्योर रिटायरमेंट के कई कारण हैं। ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) खुशहाल ठाकुर कहते हैं कि मेडिकल अनफिट और पारिवारिक कारणों से कई फौजी रिटायरमेंट ले लेते हैं।

सेना में प्रमोशन न होना भी एक वजह है। हवलदार शिव सिंह ने बताया कि मेडिकल अनफिट होने की वजह से कई बार प्रमोशन नहीं हो पाती। इस वजह से सैनिक प्री-मेच्योर रिटायरमेंट ले लेते हैं।

जिलावार पूर्व सैनिकों के आंकड़े

1.25 lakh ex servicemen of himachal will get benefit of one rank one pension.

जिला=====संख्या
हमीरपुर====24,579
कांगड़ा====54,403
ऊना=====12,848
मंडी=====14, 850
सोलन===3,349
बिलासपुर==8,886
चंबा======3,671
शिमला====3,444
कुल्लू=====1,685
सिरमौर====2,510

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क्या बोले मेजर विजय सिंह मनकोटिया?

1.25 lakh ex servicemen of himachal will get benefit of one rank one pension.

भूतपूर्व सैनिक लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने कहा कि पूर्व सैनिक ओआरओपी के लिए पिछले 34 सालों से संघर्ष कर रहे थे। ऐतिहासिक एवं साहसी निर्णय पर हिम्मत दिखाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व सैनिकों की वन रैंक वन पेंशन की मांग को पूरा किया है, वह इसके लिए बधाई के पात्र हैं। देश में न जाने कितने प्रधानमंत्री आए और गए लेकिन नरेंद्र मोदी ने इस निर्णय को लागू कर एक अलग शख्शियत का परिचय दिया है।

पूर्व सैनिकों को पता है कि इस निर्णय के पीछे प्रधानमंत्री के ही अपने लोगों ने कई बार मुखालफत की और अफसरशाही का भी भारी दबाव था। प्रधानमंत्री ने इस निर्णय से पूर्व सैनिकों, खासकर वृद्ध एवं पूर्व सैनिकों की विधवाओं जिनकी हालत काफी दयनीय हो चुकी थी, को नई जिंदगी दी है। शेष मांगों को भी कमेटी के गठन के बाद शीघ्र निपटा लिया जाएगा।

ब्रिगेडियर लाल चंद जसवाल की प्रतिक्रिया

1.25 lakh ex servicemen of himachal will get benefit of one rank one pension.

भाजपा सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ब्रिगेडियर लाल चंद जसवाल ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन से वीआरएस की शर्त हटने से देश के लाखों पूर्व सैनिकों को राहत मिली है।

सैनिकों को पदोन्नति न मिलने या किसी अन्य कारण सेवानिवृत्ति लेने पड़ती है, इसे वीआरएस नहीं कहा जा सकता। सभी को वन रैंक वन पेंशन का लाभ प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल बधाई के पात्र हैं।

कर्नल धर्मेंद्र पटियाल ने ये कहा...

1.25 lakh ex servicemen of himachal will get benefit of one rank one pension.

भूतपूर्व सैनिक विभाग कांग्रेस कमेटी हिमाचल प्रदेश के चेयरमैन कर्नल धर्मेंद्र पटियाल ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन का लाभ मिलने पर सभी पूर्व सैनिक बधाई के पात्र हैं। लेकिन इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोई भूमिका नहीं है। यह तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2015 में एडिशनल सोलीसिटर जनरल पिंक्की आनंद को आदेश दिया था कि ओआरओपी को पूर्व सैनिकों के हित में तीन माह के भीतर लागू किया जाए, नहीं को इसे कोर्ट के आदेशों की अवमानना माना जाएगा। पूर्व सैनिकों ने अपना हक लिया है, लेकिन इसमें भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैनिकों को बेइज्जत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। केंद्र सरकार ने सैनिकों और पूर्व सेनिकों के मनोबल को तोड़ा है। पूर्व सैनिकों को ओआरओपी दिलाने में मीडिया की भी सबसे बड़ी भूमिका रही।

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