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यूपीआई पर राजस्थान में क्यों मचा बवाल?: ऐसा क्या हुआ कि व्यापारी ‘बंद’ करने की बात कहने लगे

Fri, 18 Sep 2026 03:04 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 18 Sep 2026 03:04 PM IST
सार

यूपीआई पर MDR को लेकर राजस्थान में व्यापारियों का विरोध बढ़ गया है। संगठनों ने कहा कि चार्ज का असर आखिरकार ग्राहकों पर पड़ेगा। छोटे कारोबारी UPI बंद करने की चेतावनी दे रहे हैं।

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Why Has UPI Triggered a Row in Rajasthan? What Has Made Traders Threaten to Stop Accepting Digital Payments?
UPI - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर राजस्थान में व्यापारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल और फोर्टी ने सरकार के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि भले ही शुल्क सीधे ग्राहक से लेने की बात न हो, लेकिन कारोबार की लागत बढ़ने पर इसका असर आखिरकार उपभोक्ता पर पड़ सकता है।

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वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर को UPI पर MDR से संबंधित प्रेस रिलीज और FAQ जारी किए हैं। सरकारी दस्तावेजों में इसे चुनिंदा UPI P2M ट्रांजैक्शन के लिए लागू व्यवस्था बताया गया है।
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व्यापारी संगठनों ने जताई आपत्ति

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि MDR का भार सीधे या परोक्ष रूप से उपभोक्ता तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि छोटे मार्जिन वाले कारोबार और रोजमर्रा के भुगतान इससे प्रभावित हो सकते हैं।
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गुप्ता के मुताबिक, व्यापारी संगठनों को आशंका है कि बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को लाभ पहुंचाने वाली व्यवस्था का असर छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को लागू करने से पहले UPI स्टीयरिंग कमेटी के स्तर पर पुनर्विचार कराने की मांग की है।

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फोर्टी ने पीएम और वित्त मंत्री को लिखा पत्र

फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (FORTI) के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार का यह कहना कि MDR का भार ग्राहक पर नहीं पड़ेगा, व्यावहारिक रूप से पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार व्यापारी पर आने वाली अतिरिक्त लागत अंततः वस्तु या सेवा की कीमत में शामिल हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इससे कैश ट्रांजैक्शन बढ़ने की आशंका है। यूटिलिटी और स्टॉक मार्केट से जुड़े भुगतानों पर भी MDR को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। अग्रवाल ने बताया कि संगठन ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र भेजकर व्यवस्था वापस लेने की मांग की है।
FORTI के उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल ने कहा कि इसका असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा। उनका दावा है कि अतिरिक्त लागत का भार अंततः एंड यूजर तक पहुंच सकता है।

छोटे कारोबारियों को लेकर चिंता

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल का दावा है कि MDR व्यवस्था से करीब पांच करोड़ छोटे कारोबारी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें फल-सब्जी विक्रेता, दवा दुकानदार, पानी और कोल्ड ड्रिंक विक्रेता, जूते-चप्पल, प्लास्टिक सामान, खिलौने, कटलरी, स्कूल ड्रेस, कॉस्मेटिक और अन्य छोटे कारोबार करने वाले शामिल हैं।
व्यापारी संगठन का कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए मार्जिन पहले ही सीमित है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत आने से उनके कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और विवाद की स्थिति भी बन सकती है।
 

'जरूरत पड़ी तो दुकान पर लगा देंगे UPI बंद का बोर्ड'

जयपुर में चाय की दुकान चलाने वाले विमल का कहना है कि अगर UPI भुगतान पर कारोबारियों की लागत बढ़ती है तो छोटे दुकानदारों के सामने परेशानी खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वे दुकान पर 'UPI बंद' का बोर्ड लगाने को मजबूर हो सकते हैं।


दूसरी ओर UPI का इस्तेमाल करने वाले रघु राज सिंह का कहना है कि डिजिटल भुगतान से खुले पैसों की समस्या काफी हद तक खत्म हुई है। अगर छोटे दुकानदार UPI लेना बंद करते हैं तो ग्राहकों को भी परेशानी होगी।

पेट्रोल पंप डीलर्स बोले- फैसला वापस नहीं हुआ तो कोर्ट जाएंगे

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह का कहना है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर पेट्रोल पंप संचालकों पर अतिरिक्त शुल्क का भार डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह फैसला वापस लेना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर एसोसिएशन न्यायालय का रुख करेगा।

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