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उदयपुर निकाय चुनाव: अनारक्षित मेयर पद के लिए दिग्गजों में होड़, 39 वार्डों में बीजेपी-कांग्रेस की सीधी टक्कर
Fri, 11 Sep 2026 02:31 PM IST
उदयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: उदयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 02:31 PM IST
सार
उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में शुक्रवार सुबह से मतदान शुरू हो गया। 413 मतदान केंद्रों पर 220 प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा। 39 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है।
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विधायक ताराचंद जैन ने किया मतदान
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में पार्षद चुनने के लिए शुक्रवार सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया है। शहर में कुल 413 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। नगर निगम चुनाव में इस बार 220 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके राजनीतिक भविष्य का फैसला मतदाता करेंगे। वहीं, जिले की मावली और कानोड़ नगर पालिका में भी सुबह से मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है।
शहर विधायक ताराचंद जैन ने किया मतदान
उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने अपना मतदान किया और जनता से मतदान के दिन अधिक से अधिक भागीदारी करने की अपील की। मतदान शुरू होने से पहले ही कई मतदान केंद्रों पर मतदाता पहुंचने लगे थे। बड़ी संख्या में लोग सुबह जल्दी मतदान कर लोकतंत्र के इस पर्व में भागीदारी निभाने के लिए कतारों में नजर आए। मतदान केंद्रों पर प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
39 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला
उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में से 39 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। वहीं, अन्य वार्डों में बाप, माकपा और निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुकाबले को त्रिकोणीय और बहुकोणीय बना दिया है। भाजपा और कांग्रेस के कुल 160 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि अन्य प्रत्याशी अलग-अलग दलों और निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
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महापौर पद अनारक्षित, कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
इस चुनाव में कई बड़े राजनीतिक चेहरे भी पार्षद पद के लिए मैदान में हैं। चूंकि इस बार उदयपुर नगर निगम के महापौर का पद अनारक्षित (ओपन) है, इसलिए प्रमुख राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने पार्षद का चुनाव लड़कर महापौर पद की दावेदारी मजबूत करने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से दिनेश भट्ट, प्रमोद सामर, अतुल चंडालिया और पारस सिंघवी को महापौर पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से हितांशी शर्मा, शंकर चंदेल, अरुण टांक और डॉ. पूनम कुंवर राठौड़ जैसे नाम चर्चा में हैं। दोनों प्रमुख दलों के इन नेताओं ने अपने-अपने वार्ड में चुनाव प्रचार के दौरान पूरी ताकत झोंकी है। अब मतदान के बाद यह साफ होगा कि मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं।
करीब 30 साल से भाजपा का दबदबा
उदयपुर नगर निगम की राजनीति में पिछले करीब 30 वर्षों में भाजपा का दबदबा रहा है। इस दौरान नगर निगम में छह बार भाजपा का बोर्ड और मुखिया रहा है। हालांकि, इस बार कांग्रेस समेत अन्य दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने कई वार्डों में भाजपा को कड़ी चुनौती दी है। ऐसे में इस बार के चुनाव परिणाम को लेकर राजनीतिक दलों में भी उत्सुकता बनी हुई है।
युवा मतदाताओं पर भाजपा-कांग्रेस की नजर
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने युवा मतदाताओं को साधने के लिए चुनाव प्रचार के दौरान विकास, रोजगार, शिक्षा, शहर की सुविधाओं और बुनियादी समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाया। अब मतदान के जरिए मतदाता इन मुद्दों पर अपना फैसला सुनाएंगे।
ये भी पढ़ें- जयपुर: पति ने सोते समय पत्थर से सिर कुचला; पत्नी समेत तीन बेटियों की हत्या, पूरा परिवार खत्म
14 सितंबर को आएंगे चुनाव परिणाम
नगर निगम चुनाव के परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। इसके बाद महापौर पद के लिए चुनाव 21 सितंबर और उप महापौर पद के लिए चुनाव 22 सितंबर को होगा। चूंकि महापौर पद इस बार अनारक्षित है, इसलिए पार्षद चुनाव के परिणाम के साथ ही महापौर पद की तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो जाएगी।
मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए शहर के सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से मतदान केंद्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। अब उदयपुर की जनता के वोट से तय होगा कि नगर निगम की सत्ता किसके हाथों में जाएगी और आने वाले पांच वर्षों में शहर की सरकार की कमान कौन संभालेगा।
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शहर विधायक ताराचंद जैन ने किया मतदान
उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने अपना मतदान किया और जनता से मतदान के दिन अधिक से अधिक भागीदारी करने की अपील की। मतदान शुरू होने से पहले ही कई मतदान केंद्रों पर मतदाता पहुंचने लगे थे। बड़ी संख्या में लोग सुबह जल्दी मतदान कर लोकतंत्र के इस पर्व में भागीदारी निभाने के लिए कतारों में नजर आए। मतदान केंद्रों पर प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
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39 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला
उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में से 39 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। वहीं, अन्य वार्डों में बाप, माकपा और निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुकाबले को त्रिकोणीय और बहुकोणीय बना दिया है। भाजपा और कांग्रेस के कुल 160 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि अन्य प्रत्याशी अलग-अलग दलों और निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
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महापौर पद अनारक्षित, कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
इस चुनाव में कई बड़े राजनीतिक चेहरे भी पार्षद पद के लिए मैदान में हैं। चूंकि इस बार उदयपुर नगर निगम के महापौर का पद अनारक्षित (ओपन) है, इसलिए प्रमुख राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने पार्षद का चुनाव लड़कर महापौर पद की दावेदारी मजबूत करने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से दिनेश भट्ट, प्रमोद सामर, अतुल चंडालिया और पारस सिंघवी को महापौर पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से हितांशी शर्मा, शंकर चंदेल, अरुण टांक और डॉ. पूनम कुंवर राठौड़ जैसे नाम चर्चा में हैं। दोनों प्रमुख दलों के इन नेताओं ने अपने-अपने वार्ड में चुनाव प्रचार के दौरान पूरी ताकत झोंकी है। अब मतदान के बाद यह साफ होगा कि मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं।
करीब 30 साल से भाजपा का दबदबा
उदयपुर नगर निगम की राजनीति में पिछले करीब 30 वर्षों में भाजपा का दबदबा रहा है। इस दौरान नगर निगम में छह बार भाजपा का बोर्ड और मुखिया रहा है। हालांकि, इस बार कांग्रेस समेत अन्य दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने कई वार्डों में भाजपा को कड़ी चुनौती दी है। ऐसे में इस बार के चुनाव परिणाम को लेकर राजनीतिक दलों में भी उत्सुकता बनी हुई है।
युवा मतदाताओं पर भाजपा-कांग्रेस की नजर
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने युवा मतदाताओं को साधने के लिए चुनाव प्रचार के दौरान विकास, रोजगार, शिक्षा, शहर की सुविधाओं और बुनियादी समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाया। अब मतदान के जरिए मतदाता इन मुद्दों पर अपना फैसला सुनाएंगे।
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14 सितंबर को आएंगे चुनाव परिणाम
नगर निगम चुनाव के परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। इसके बाद महापौर पद के लिए चुनाव 21 सितंबर और उप महापौर पद के लिए चुनाव 22 सितंबर को होगा। चूंकि महापौर पद इस बार अनारक्षित है, इसलिए पार्षद चुनाव के परिणाम के साथ ही महापौर पद की तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो जाएगी।
मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए शहर के सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से मतदान केंद्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। अब उदयपुर की जनता के वोट से तय होगा कि नगर निगम की सत्ता किसके हाथों में जाएगी और आने वाले पांच वर्षों में शहर की सरकार की कमान कौन संभालेगा।