Udaipur News: औरंगजेब था कुशल... महाराणा प्रताप-अकबर पर सुखाड़िया विवि की कुलगुरु के बयान पर बवाल, ABVP भड़की
Prof Sunita Mishra Controversy: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर सुनीता मिश्रा के औरंगजेब पर दिए बयान और महाराणा प्रताप-अकबर पर की टिप्पणी को लेकर बवाल मच गया है। एबीवीपी ने इसे लेकर कड़ी निंदी की है। जानें पूरा मामला...।
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उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर सुनीता मिश्रा इन दिनों अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। शुक्रवार को बप्पा रावल सभागार में आयोजित एक सेमिनार में उन्होंने इतिहास के संदर्भ में कहा कि हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव से हम महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और अकबर जैसे राजाओं के बारे में सुनते हैं। हम कई अच्छे राजाओं को याद रखते हैं और कुछ औरंगजेब जैसे भी थे, जो एक कुशल प्रशासक था। उनके इस बयान ने विरोध के स्वर तेज कर दिए हैं।
एबीवीपी ने जताई कड़ी आपत्ति
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कुलगुरु के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एबीवीपी उदयपुर महानगर मंत्री पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को ऐतिहासिक तथ्यों पर टिप्पणी करते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान स्वीकार्य नहीं हैं और विद्यार्थी परिषद इसकी कड़ी निंदा करती है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली पर सेमिनार में दिया बयान
यह विवादास्पद टिप्पणी तब सामने आई जब प्रो. मिश्रा ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली: विकसित भारत 2047 के लिए रोडमैप’ विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में विचार रख रही थीं। इस कार्यक्रम का आयोजन गुरु नानक कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय और एसोसिएशन ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
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प्राचीन परंपराओं की सराहना भी की
अपने संबोधन में प्रो. मिश्रा ने कहा कि भारत की जीवंत परंपराएं हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाती हैं। उन्होंने बताया कि हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा इतनी सशक्त है कि उसने दुनिया की बड़ी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता दी है। उनका कहना था कि आज विश्व में कोई भी देश भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का मुकाबला नहीं कर सकता।
बयान से फीका पड़ा सकारात्मक पक्ष
हालांकि, प्रो. मिश्रा के भाषण का सकारात्मक पक्ष फीका पड़ गया और सारी चर्चा उनके उस बयान पर सिमट गई जिसमें उन्होंने औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ बताया। अब यह बयान न केवल शैक्षणिक जगत बल्कि राजनीतिक हलकों में भी बहस का विषय बन गया है।
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