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‘मिर्जापुर’ के एक सीन पर बवाल: गैंगवार के बीच महाराणा प्रताप के शूरवीर गीत के इस्तेमाल पर विरोध; कानूनी नोटिस
Wed, 09 Sep 2026 05:23 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Wed, 09 Sep 2026 05:23 PM IST
सार
फिल्म ‘मिर्जापुर’ के एक गैंगवार दृश्य में महाराणा प्रताप के शौर्य पर आधारित ‘शूरवीर’ गीत के इस्तेमाल को लेकर उदयपुर और मेवाड़ क्षेत्र में विरोध सामने आया है। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और इतिहासकारों ने दृश्य व गीत को हटाने की मांग की है।
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बॉलीवुड फिल्म मिर्जापुर को लेकर मचा बवाल
- फोटो : Social Media
विस्तार
बॉलीवुड फिल्म मिर्जापुर के एक विवादित दृश्य और उसमें इस्तेमाल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले गाने को लेकर उदयपुर सहित पूरे मेवाड़ क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। फिल्म के प्रमुख गैंगवार दृश्य में मुन्ना त्रिपाठी और गुड्डू भैया जैसे काल्पनिक आपराधिक पात्रों की हिंसा को महिमामंडित करने के लिए महाराणा प्रताप के शौर्य पर आधारित लोकप्रिय गीत शूरवीर का इस्तेमाल किया गया है। मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, प्रसिद्ध इतिहासकारों और गीतकार ने फिल्म निर्माताओं को इस विवादित दृश्य और गाने को तुरंत हटाने की चेतावनी दी है।
हिंसक दृश्य के साथ देशभक्ति गीत
ओटीटी पर वेब सीरीज की सफलता के बाद बनाई गई फिल्म ‘मिर्जापुर’ का निर्माण रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर और कासिम जगमगिया ने किया है, जबकि इसका निर्देशन गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई ने किया है। फिल्म में दो गुटों के बीच गोलीबारी और गैंगवार का हिंसक दृश्य फिल्माया गया है। इस दृश्य के पीछे राजस्थान के प्रसिद्ध गायक रैपरिया बालम का गीत शूरवीर बज रहा है। यह गीत महाराणा प्रताप के राष्ट्रप्रेम, त्याग, हल्दीघाटी युद्ध और चेतक की वीरता का बखान करता है। मेवाड़ के लोगों का आरोप है कि नशा करने वाले, गाली देने वाले और अनैतिक व्यवहार में लिप्त हिंसक पात्रों के पीछे महाराणा प्रताप का नाम जोड़ना पूरी तरह अनुचित है।
फिल्म निर्माताओं को कानूनी नोटिस
पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने निर्माताओं को उनकी सामाजिक और कलात्मक जिम्मेदारी याद दिलाई है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता मिलने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि लोग अपनी नैतिक जिम्मेदारी से भाग सकते हैं। कला का पहला धर्म लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना है। महाराणा प्रताप पूरे राष्ट्र के आराध्य हैं। वहीं, शूरवीर गीत के मूल गायक और संगीतकार रैपरिया बालम ने स्पष्ट किया है कि प्रोडक्शन हाउस ने इस गाने के इस्तेमाल के लिए उनसे कोई अनुमति नहीं ली थी। उन्होंने कहा कि यदि उनसे अनुमति मांगी भी जाती, तो वे ऐसे हिंसक दृश्य के लिए कभी अनुमति नहीं देते। गायक ने प्रोडक्शन हाउस को औपचारिक कानूनी नोटिस भेज दिया है।
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ये भी पढ़ें- अजमेर: वार्ड 12 क्यों बना चर्चा का केंद्र? पूजा टाक और रंजना आमने-सामने, विकास के मुद्दों पर वोटर्स की नजर
सांस्कृतिक अपराध पर बढ़ा रोष
महाराणा प्रताप पर गहन शोध करने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने भी इस दृश्य पर गहरा दुख जताया है। उनका कहना है कि महाराणा प्रताप की सबसे बड़ी पहचान उनका नैतिक बोध और मातृभूमि के प्रति उनका मूल्य-आधारित संघर्ष रहा है। किसी अनैतिक और आपराधिक पृष्ठभूमि वाली काल्पनिक गैंगवार फिल्म में उनका नाम जोड़ना एक सांस्कृतिक अपराध है।उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से इस मामले पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेते हुए दृश्य को हटाने की मांग की है।
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हिंसक दृश्य के साथ देशभक्ति गीत
ओटीटी पर वेब सीरीज की सफलता के बाद बनाई गई फिल्म ‘मिर्जापुर’ का निर्माण रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर और कासिम जगमगिया ने किया है, जबकि इसका निर्देशन गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई ने किया है। फिल्म में दो गुटों के बीच गोलीबारी और गैंगवार का हिंसक दृश्य फिल्माया गया है। इस दृश्य के पीछे राजस्थान के प्रसिद्ध गायक रैपरिया बालम का गीत शूरवीर बज रहा है। यह गीत महाराणा प्रताप के राष्ट्रप्रेम, त्याग, हल्दीघाटी युद्ध और चेतक की वीरता का बखान करता है। मेवाड़ के लोगों का आरोप है कि नशा करने वाले, गाली देने वाले और अनैतिक व्यवहार में लिप्त हिंसक पात्रों के पीछे महाराणा प्रताप का नाम जोड़ना पूरी तरह अनुचित है।
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फिल्म निर्माताओं को कानूनी नोटिस
पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने निर्माताओं को उनकी सामाजिक और कलात्मक जिम्मेदारी याद दिलाई है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता मिलने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि लोग अपनी नैतिक जिम्मेदारी से भाग सकते हैं। कला का पहला धर्म लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना है। महाराणा प्रताप पूरे राष्ट्र के आराध्य हैं। वहीं, शूरवीर गीत के मूल गायक और संगीतकार रैपरिया बालम ने स्पष्ट किया है कि प्रोडक्शन हाउस ने इस गाने के इस्तेमाल के लिए उनसे कोई अनुमति नहीं ली थी। उन्होंने कहा कि यदि उनसे अनुमति मांगी भी जाती, तो वे ऐसे हिंसक दृश्य के लिए कभी अनुमति नहीं देते। गायक ने प्रोडक्शन हाउस को औपचारिक कानूनी नोटिस भेज दिया है।
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सांस्कृतिक अपराध पर बढ़ा रोष
महाराणा प्रताप पर गहन शोध करने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने भी इस दृश्य पर गहरा दुख जताया है। उनका कहना है कि महाराणा प्रताप की सबसे बड़ी पहचान उनका नैतिक बोध और मातृभूमि के प्रति उनका मूल्य-आधारित संघर्ष रहा है। किसी अनैतिक और आपराधिक पृष्ठभूमि वाली काल्पनिक गैंगवार फिल्म में उनका नाम जोड़ना एक सांस्कृतिक अपराध है।उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से इस मामले पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेते हुए दृश्य को हटाने की मांग की है।