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बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष बने आरयू के कुलगुरु: डोटासरा बोले-देश की शिक्षा व्यवस्था का हो रहा है 'संघीकरण'

Fri, 25 Sep 2026 03:02 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 25 Sep 2026 03:02 PM IST
सार

राजस्थान यूनिवर्सिटी में भगवती प्रसाद सारस्वत की नियुक्ति पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विश्वविद्यालयों में वैचारिक दखल बढ़ाकर शिक्षा व्यवस्था का ‘संघीकरण’ कर रही है।

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Congress Questions Saraswat’s Appointment as Rajasthan University VC, Alleges ‘Saffronisation’ of Education
भगवती प्रसाद सारस्वत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान यूनिवर्सिटी के नए कुलगुरु डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों जैसे स्वायत्त संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों के लिए योग्यता और शैक्षणिक अनुभव के बजाय राजनीतिक और वैचारिक जुड़ाव को प्राथमिकता दी जा रही है।

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कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े जिन सवालों को लगातार उठा रहे हैं, राजस्थान यूनिवर्सिटी में सारस्वत की नियुक्ति उसी बहस का उदाहरण है।
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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था का ‘संघीकरण’ कर रही है और आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोगों को विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जा रहा है। पार्टी के मुताबिक इससे उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता और शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

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सारस्वत की नियुक्ति को बनाया मुद्दा

राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने गुरुवार को डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत को राजस्थान यूनिवर्सिटी का कुलगुरु नियुक्त किया। सारस्वत फिलहाल कोटा यूनिवर्सिटी के कुलगुरु हैं। उनके अलावा डॉ. युद्धवीर सिंह को शेखावाटी विश्वविद्यालय और प्रो. नरसी राम विश्नोई को महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर का कुलगुरु नियुक्त किया गया है। नियुक्तियां राज्य सरकार के परामर्श से की गई हैं।

कांग्रेस ने खास तौर पर सारस्वत के राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला दिया। पार्टी का कहना है कि वे भाजपा अजमेर ग्रामीण के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय के कुलगुरु जैसे पदों पर नियुक्ति का आधार क्या होना चाहिए और क्या राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति की नियुक्ति से संस्थान की स्वायत्तता पर सवाल नहीं उठते।

कांग्रेस ने उठाया नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल

कांग्रेस का आरोप है कि विश्वविद्यालयों में कुलगुरु समेत अहम पदों पर नियुक्तियां योग्यता, अनुभव और अकादमिक दृष्टि के आधार पर होनी चाहिए। पार्टी ने दावा किया कि मौजूदा सरकार के दौर में आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों को संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।


हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों और ‘संघीकरण’ के दावे को राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। राज्यपाल सचिवालय के अनुसार तीनों कुलगुरुओं की नियुक्तियां राज्य सरकार के परामर्श से की गई हैं। नवनियुक्त कुलगुरुओं का कार्यकाल कार्यभार संभालने की तारीख से तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगा, इनमें जो पहले हो।

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