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चुनाव से पहले साइबर ठगों का अलर्ट: फर्जी वोटर लिंक, OTP और QR कोड से हो सकती है ठगी, पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

Tue, 25 Aug 2026 05:50 PM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Tue, 25 Aug 2026 05:50 PM IST
सार

चुनाव के दौरान साइबर ठग फर्जी वोटर लिंक, ओटीपी, क्यूआर कोड, डीपफेक और भ्रामक संदेशों से मतदाताओं, प्रत्याशियों व चुनावकर्मियों को निशाना बना सकते हैं। राजस्थान पुलिस ने संदिग्ध लिंक से बचने, निजी जानकारी साझा न करने और ठगी पर 1930 पर शिकायत की अपील की।

 

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Beware of cyber fraudsters during municipal elections; police issue advisory.
साइबर अपराध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगामी नगर निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव के दौरान साइबर ठग मतदाताओं, चुनाव प्रत्याशियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों को निशाना बना सकते हैं। ठग फर्जी लिंक, ओटीपी, क्यूआर कोड, फिशिंग ई-मेल, डीपफेक और फेक न्यूज के जरिए साइबर वित्तीय धोखाधड़ी कर सकते हैं। इसे लेकर राजस्थान पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर आमजन को सतर्क रहने की अपील की है।

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अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं वीके सिंह ने बताया कि पुलिस मुख्यालय की साइबर क्राइम शाखा ने चुनाव के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चुनाव संबंधी किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
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वोटर लिस्ट में नाम देखें’ जैसे फर्जी लिंक से रहें सावधान
साइबर ठग वाट्सऐप या एसएमएस के जरिए ‘अपना नाम वोटर लिस्ट में देखें’, ‘आपका मतदान केंद्र बदल गया है’ जैसे संदेश भेजकर फर्जी लिंक पर क्लिक करा सकते हैं। ऐसे किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करें। मतदाता सूची और मतदान संबंधी जानकारी के लिए केवल राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान और मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
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ओटीपी मांगने वाला अधिकारी बनकर कर सकता है ठगी
चुनाव आयोग का अधिकारी बनकर मतदाता पहचान पत्र अपडेट, सत्यापन या अन्य चुनावी प्रक्रिया के नाम पर फोन करने वाले व्यक्ति को ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, यूपीआई पिन या अन्य निजी जानकारी साझा नहीं करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ओटीपी किसी के साथ साझा करने से साइबर ठगी हो सकती है।

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वायरल वीडियो और ऑडियो पर तुरंत विश्वास न करें
चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर नेताओं के नाम से फर्जी वीडियो, ऑडियो, भाषण और डीपफेक सामग्री वायरल की जा सकती है। किसी भी वीडियो या ऑडियो को आधिकारिक पुष्टि के बिना सच न मानें और उसे आगे भेजने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें।

प्रत्याशी और कार्यकर्ता सोशल मीडिया खाते सुरक्षित रखें
चुनाव प्रत्याशियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और वाट्सऐप खातों पर दो-स्तरीय सत्यापन सक्रिय रखने की सलाह दी गई है। मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और किसी अनजान लिंक के जरिए लॉगिन संबंधी जानकारी साझा न करें।

चुनावी चंदे के नाम पर क्यूआर कोड से ठगी
दान और धन जुटाने के नाम पर भेजे गए यूपीआई लिंक और क्यूआर कोड की अच्छी तरह जांच करें। किसी को पैसा प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं होती। क्यूआर कोड स्कैन करने या पिन डालने से पहले लेन-देन की पूरी जानकारी जांच लें।


वाट्सऐप समूह के व्यवस्थापक भी रहें सतर्क
प्रचार और चुनाव संबंधी वाट्सऐप समूह में केवल भरोसेमंद सदस्यों को ही संदेश पोस्ट करने की अनुमति देने की सलाह दी गई है। समूह की सेटिंग में ‘केवल व्यवस्थापक’ विकल्प का इस्तेमाल करने से भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार की आशंका कम की जा सकती है। चुनावी डेटा अथवा ईवीएम-वीवीपैट से संबंधित संवेदनशील जानकारी निजी उपकरण या असुरक्षित नेटवर्क अथवा सार्वजनिक वाई-फाई पर साझा नहीं करें। अनजान ई-मेल आईडी से प्राप्त चुनाव संबंधी परिपत्र, लिंक या संलग्नक को बिना सत्यापन के न खोलें।

ठगी होने पर गोल्डन ऑवर में 1930 पर करें शिकायत
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होती है तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा नजदीकी पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है। राजस्थान में साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है।

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