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Sawai Madhopur: अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम के सामने महिला ने कीटनाशक पिया, दस सालों से मकान बनाकर रह रही थी
Wed, 15 May 2024 02:49 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Wed, 15 May 2024 02:49 PM IST
सार
सवाई माधोपुर के बड़ौद गांव में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाए गए मकान को तोड़ने पर एक महिला ने अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम के सामने कीटनाशक दवा पी ली, जिससे वह बेहोश होकर गिर गई। महिला को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सवाई माधोपुर जिले के बड़ौद गांव में सरकारी जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने पहुंचे अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए, जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान अपना आशियाना उजड़ता देख एक महिला ने प्रशासन के सामने ही जहरीली कीटनाशक दवा का सेवन कर लिया और बेसुध होकर गिर गई।
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महिला की इस हरकत से मौके पर मौजूद पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों ने कार्रवाई को तुरंत रोककर उसे पुलिस वाहन से जिला अस्पताल में भर्ती कराया। महिला का जिला अस्पताल में उपचार जारी है , चिकित्सकों के मुताबिक महिला अब खतरे से बाहर है।
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जानकारी के अनुसार मामला खंडार उपखंड के बड़ौद गांव के पास स्थित एक तलाई की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण से जुड़ा है। इस जमीन पर पीड़ित महिला रुकमणी देवी पत्नी कपूरचंद मीणा करीब दस साल से मकान बनाकर रह रही है। उक्त जमीन पर महिला ने मकान भी बना रखा है और पांच बीघा से भी ज्यादा जमीन पर अमरूद का बगीचा लगा रखा है, यह जमीन सरकारी बताई जा रही है।
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इस सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए मंगलवार शाम को खंडार तहसीलदार धर्मेंद्र तसेरा ,खंडार थाना अधिकारी गिर्राजप्रसाद वर्मा पुलिस जाब्ता एवं राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, जिसका महिला ने विरोध किया लेकिन प्रशासन की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी, जिसे देखकर महिला घबरा गई और जहरीली कीटनाशक दवा का सेवन कर लिया।
पीड़ित महिला और उसके पति का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें ना तो कोई नोटिस दिया और ना ही कोई सूचना दी गई और बिना सूचना के ही टीम अतिक्रमण हटाने पहुंच गई। महिला एवं अन्य ग्रामीणों का कहना है कि इतने सालों तक प्रशासन कहां पर बैठा हुआ था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे लापरवाह अधिकारियों का तबादला होना चाहिए और इस प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच करवाई जानी चाहिए। वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस एवं प्रशासन ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।