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सलमान मामले में 18 वर्ष बाद अदालत ने कहा – यह इस कोर्ट का मामला ही नहीं था
ब्यूरो/ अमर उजाला, जयपुर
Updated Wed, 18 Jan 2017 06:05 PM IST
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salman khan
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नया साल अभिनेता सलमान खान के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अभिनेता सलमान खान के खिलाफ आर्म्स एक्ट मामले में सुनवाई करनेवाली जोधपुर की सीजेएम ग्रामीण अदालत ने 18 वर्ष बाद बुधवार को फैसले में कहा है कि यह इस कोर्ट का मामला ही नहीं था। फैसले में कहा है कि सलमान खान को खांमखां परेशानी सहनी पड़ी। अदालत ने सलमान को बरी कर दिया।
अदालत ने फैसले में कहा है कि मामला जिन धाराओं में दर्ज हुआ, वह धाराएं बनती ही नहीं हैं और जो धारा बन सकती थी, उसमें मामला दर्ज ही नहीं किया गया। घटना में इस्तेमाल संबंधित हथियार अवैध नहीं कहे जा सकते। ये मामला जिस धारा में बनता है, उसकी सुनवाई का अधिकार क्षेत्र उस अदालत का होता है, जिस जगह से हथियार का लाइसेंस जारी हुआ हो। सुबह से ही सलमान खान के समर्थक अदालत के आस-पास एकत्रित हो गए थे। सलमान की सुरक्षा में पुलिस के साथ साथ निजी सुरक्षा एजेंसियों ने भी कमान सम्भाल रखी थी। फैसले में अदालत ने कहा है कि धाराएं 3/25 व 3/27 में दर्ज हुआ, जो गलत है।
तत्कालीन कलक्टर ने इस मामले की गलत अनुसंशा की है। संबंधित हथियार का लाइसेंस तीन वर्ष के लिए जारी हुआ था, जिसमें उसे लगातार तीनों वर्ष नवीनीकरण करवाना था। लाइसेंस 8 अगस्त 1999 तक के लिए जारी हुआ था, जबिक घटना 1998 को हुई। इस मामले में धारा 3/21 लगती है। लेकिन इस धारा को सुनने का अधिकार इस अदालत को नहीं है। इस धारा में सुनवाई का अधिकार उस अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिस जगह से लाइसेंस जारी होता है। है कि सलमान खान की बंदूक का लाइसेंस मुम्बई से जारी हुआ था।
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गौरतलब है कि वर्ष 1998 में 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान सलमान के खिलाफ हिरण शिकार से जुड़े चागौरतलब र मामले दर्ज हुए थे। इनमें से एक मामला बिना लाइसेंस वाले हथियार से शिकार के आरोप के चलते आर्म्स एक्ट के तहत भी दर्ज किया गया था।
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अदालत ने फैसले में कहा है कि मामला जिन धाराओं में दर्ज हुआ, वह धाराएं बनती ही नहीं हैं और जो धारा बन सकती थी, उसमें मामला दर्ज ही नहीं किया गया। घटना में इस्तेमाल संबंधित हथियार अवैध नहीं कहे जा सकते। ये मामला जिस धारा में बनता है, उसकी सुनवाई का अधिकार क्षेत्र उस अदालत का होता है, जिस जगह से हथियार का लाइसेंस जारी हुआ हो। सुबह से ही सलमान खान के समर्थक अदालत के आस-पास एकत्रित हो गए थे। सलमान की सुरक्षा में पुलिस के साथ साथ निजी सुरक्षा एजेंसियों ने भी कमान सम्भाल रखी थी। फैसले में अदालत ने कहा है कि धाराएं 3/25 व 3/27 में दर्ज हुआ, जो गलत है।
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तत्कालीन कलक्टर ने इस मामले की गलत अनुसंशा की है। संबंधित हथियार का लाइसेंस तीन वर्ष के लिए जारी हुआ था, जिसमें उसे लगातार तीनों वर्ष नवीनीकरण करवाना था। लाइसेंस 8 अगस्त 1999 तक के लिए जारी हुआ था, जबिक घटना 1998 को हुई। इस मामले में धारा 3/21 लगती है। लेकिन इस धारा को सुनने का अधिकार इस अदालत को नहीं है। इस धारा में सुनवाई का अधिकार उस अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिस जगह से लाइसेंस जारी होता है। है कि सलमान खान की बंदूक का लाइसेंस मुम्बई से जारी हुआ था।
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गौरतलब है कि वर्ष 1998 में 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान सलमान के खिलाफ हिरण शिकार से जुड़े चागौरतलब र मामले दर्ज हुए थे। इनमें से एक मामला बिना लाइसेंस वाले हथियार से शिकार के आरोप के चलते आर्म्स एक्ट के तहत भी दर्ज किया गया था।