Bikaner: साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी का निधन, सीएम गहलोत ने कहा-उनका आशीर्वाद और त्याग पथ प्रदर्शन करता रहेगा
साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा का दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन से बीकानेर में शोक की लहर दौड़ गई है। बीकानेर में ही साध्वी कनकप्रभा को साध्वी प्रमुखा की उपाधि दी गई थी।
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जैन तेरापन्थ धर्मसंघ के साध्वी समुदाय की मुख्या शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा का दिल्ली में गुरुवार सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर महाप्रयाण हो गया है। इसके बाद से बीकनेर सहित पूरे देश में जैन समाज में शोक की लहर है। साध्वीप्रमुखा पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थी। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। सीएम गहलोत ने साध्वी के निधन पर शोक जताया है।
सीएम गहलोत ने ट्वीट कर लिखा कि एक साध्वी के रूप में उनकी छह दशकों की जीवन यात्रा, तीन आचार्यों के सान्निध्य में पूर्ण समर्पण और त्याग से गुजरी। जिसकी दिव्यता उनके अंतिम सांस तक परिलक्षित रही। उनके प्रगतिशील विचारों से जैन समाज ही नहीं, समूचा मानव समाज पोषित हुआ है। मेरा मानना है कि उनके प्रवचन, उनका साहित्य, उनका आशीर्वाद और उनका त्याग भावी पीढ़ियों को पथ प्रदर्शन करता रहेगा। मेरे सौभाग्य रहे कि मुझे अनेक बार उनके दर्शन और सेवा करने का अवसर मिला। जब वे जयपुर अपने उपचार के लिए पधारी थी तो 27 नवम्बर 2021 को मैंने उनके हॉस्पिटल में दर्शन किए और उनका भरपूर आशीर्वाद मिला। एक असाधारण साध्वीप्रमुखा को मैं अपने अंतर्मन से वंदना करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शान्ति और सर्वोच्च स्थान मिले।
महाश्रमण अंत तक रहे साथ
जैन समाज के आचार्य महाश्रमण साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा का बहुत सम्मान करते थे। उनकी बीमारी और गंभीर स्थिति का पता चलने के बाद वो स्वयं पदयात्रा करते हुए दिल्ली रवाना हो गए। तेरापन्थ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण ने उनसे मिलने के लिए लंबी पदयात्रा की। अंतिम समय तक आचार्य महाश्रमण उनके साथ थे। साध्वीप्रमुखा के स्वास्थ्य को प्रतिदिन गिरता देखकर उन्होंने संथारे की भावना व्यक्त की। आचार्य ने साध्वीप्रमुखा को गुरुवार सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर तेरापन्थ भवन परिसर अध्यात्म साधना केंद्र में संथारे का प्रत्याख्यान करवाया था। लगभग 1:30 घण्टे बाद संथारा सीज गया। तेरापन्थ धर्मसंघ सहित पूरे जैन और देशभर में साध्वीप्रमुखा के महाप्रयाण की खबर से शोक की लहर दौड़ पड़ी है।
आचार्य तुलसी ने बीकानेर में ही आयोजित एक कार्यक्रम में साध्वी कनकप्रभा को साध्वी प्रमुखा की उपाधि दी थी। वो तीन आचार्यों आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ और आचार्य महाश्रमण के साथ रहीं। जैन समाज के पुखराज चौपड़ा ने बताया कि बीकानेर में खासकर गंगाशहर में उनका प्रवास रहा। मर्यादा महोत्सव के दौरान भी साध्वी प्रमुखा बीकानेर में रहीं।